इजराइली वैज्ञानिकों ने बनाया अनोखा बैक्टीरिया, खायेगा कार्बनडाई ऑक्साइड और बनाएगा चीनी

1158

इजराइल, एक ऐसा देश जो अपनी देशभक्ति और बेहद कम समय में तरक्की कि ऊंचाइयों को छूने के लिए जाना जाता है, इजराइल जितना छोटा देश है उससे कहीं बड़ा उसका ओहदा है, चाहे वो हथियारों की बात हो या वैज्ञानिक तकनीक की, इजराइल ने दुनियाभर को अपने काम से प्रभावित किया है. हाल ही में इजराइली वैज्ञानिकों ने 10 वर्ष की रिसर्च के बाद एक ऐसा बैक्टीरिया बनाया लिया है जो कार्बन डाइऑक्साइड गैस को खाएगा और शक्कर को बनाएगा. इतना ही नहीं इस बैक्टीरिया से जुडी जानकारी देते हुए वैज्ञानिकों ने ये भी बताया कि यह हमारे वातावरण को भी शुद्ध करेगा.

यह दुनियां को चौकाने वाली खोज वेइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस द्वारा की गई है. तेल अवीव के सेंट्रल इजरायल के रेहोवोट में स्थित इस रिसर्च सेंटर को 1934 में डैनियल सीफ इंस्टीट्यूट के रूप में बनाया गया था. गौर करने वाली बात ये भी है कि इस संस्थान को प्राकृतिक और सटीक विज्ञान में खोज करने के लिए दुनिया के गिने चुने रिसर्च सेंटर्स में शुमार किया जाता है.

हाल ही में जर्नल सेल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कॉली बैक्टीरिया को लगभग एक दशक की लंबी प्रक्रिया के बाद चीनी से पूरी तरह हटा लिया गया. और इसी को हटाने के बाद इजरायल के वैज्ञानिक इनकी री-प्रोग्रामिंग करने में कामयाब भी रहे. चलिए आपको बताते हैं कैसे ये बैक्टीरिया चीनी को पैदा करते हैं. दरअसल, ये बैक्टीरिया शुगर कंज्यूम करने के बाद कॉर्बन डाइऑक्साइड को निकलते थे, लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इनकी री-प्रोग्रामिंग कर दी तो उसके बाद ये कॉर्बन डाइऑक्साइड कंज्यूम करके शुगर का निर्माण करने लगे. इस काम को करने के लिए ये बैक्टीरिया अपनी बॉडी का निर्माण पर्यावरण में मौजूद कॉर्बन डॉइऑक्साइड से करेंगे और फिर चीनी पैदा करेंगे.

इस शोध से जुडी हर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वैज्ञानिकों ने उन जीन्स को मैप किया जो इस प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी थे और उन्हीं में से कुछ को अपनी लैब में बैक्टीरिया के जीनोम में शामिल कर लिया. और अपनी अथक मेहनत के पश्चात शोधकर्ता इन बैक्टीरिया की री-प्रोग्रामिंग में भी कामयाब रहे.