चीन में होगा इस्लाम का मॉडिफिकेशन

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चीन का नाम जब भी हमारे ज़हन में आता है.. तो एक तस्वीर बनती है कट्टर देश की.. खासकर इस्लाम धर्म के प्रति उनकी संकीर्णता को  हम सभी जानते हैं, चीन में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा यूनाइटेड नेशन्स में भी समय समय पर उठता रहा है और अन्य देशों द्वारा चीन के इस रवैये की कड़ी निंदा भी होती रही है, लेकिन इन सब के बावजूद भी इस्लाम धर्म को लेकर चीन का नजरिया नहीं बदला।
वजह..?? चीन में अधिकतर आबादी नास्तिक है, इनका किसी भी धर्म से कोई लेना देना नहीं होता है.. लेकिन इसके उल्टा इस्लामी लोग अपने धर्म के प्रति कट्टर विचारधारा रखते हैं.. एक के लिए देशभक्ति सर्वोपरि है और दुसरे के लिए धर्म. लम्बे समय से चले आ रहे इस मुद्दे पर चीनी सरकार ने काफी विचार विमर्श के बाद अब फैसला लिया है कि चीन में इस्लाम को समाजवादी रंग रूप में ढाला जायेगा.
अब चीन में इस्लाम का समाजवादी रंग रूप क्या होगा इस पर आते हैं… चीन सरकार के इस नए कानून के मुताबिक चीन में इस्लामिक लोग रह सकते हैं बशर्ते उन्हें वो सारी शर्तें माननी पड़ेंगी जो इस नए कानून में शामिल होंगी.. जैसे कि हो सकता है कि उनको नमाज ना पढने दी जाए, उन्हें लंबी दाढ़ी रखने से रोका जाये, मुस्लिम महिलायों को बुर्का और हिजाब त्यागना पड़े, उनको रोज़ा ना रखने दिया जाए.. और भी बहुत सारे नियम इसमें हो सकते हैं।
अब आते हैं बात पर कि आखिर चीन में इस्लामिक धर्म का समाजवाद में बदलने का मुद्दा उठा कहाँ से??
दरअसल चीन के शिनजियांग क्षेत्र में काफी समय से मुस्लिमों की एक जाति रहती चली आ रही है जिसका नाम है उइगर मुस्लिम, जो कि काफी तादात में ईस्टर्न और सेंट्रल एशियन देशों  में बसे हुए हैं, अब चीन की सरकार के साथ इनका विवाद क्या है इस पर बात करते हैं.. तो एक तरफ इस जाति के लोगों का कहना है कि चीन की सरकार उनकी धार्मिक आजादी का हनन कर रही है, उनकी सारी हरकतों पर नज़र रखी जाती है और उन्हें धर्म से संबंधित कोई भी काम जैसे नमाज़ पढना, दाढ़ी बढ़ाना, मुस्लिम महिलाओं का बुर्का और हिजाब पहनना, रोजे रखना इन सब से रोका जाता है.. यहाँ तक कि यह लोग अपने बच्चों का मुस्लिम नाम तक नहीं रख सकते हैं.
वहीँ चीन की सरकार का मानना है कि उनके देश में इस्लामिकता बढ़ रही है जिससे उनको वहां आतंकवाद के बढ़ने का डर है और कई आतंकवादी संगठन वहां अपना कब्जा करने की कोशिश में हैं, इसीलिए सरकार वहां इस्लामिक लोगों पर तमाम प्रतिबन्ध लगाये हुए है
तो यह है वो पूरा मुद्दा जिसकी वजह से लम्बे समय से चीनी सरकार और चीन के शिनजियांग इलाके में रह रहे उइगर मुसलमानों में तनातनी चलती आ रही है. चीन की आबादी का 1.5% प्रतिशत हिस्सा यानि लगभग 2 करोड़ आबादी मुसलमान हैं, और इस्लामिकता को चाइना से ख़त्म करने के लिए वहां की सरकार ने दस लाख से भी ज्यादा मुस्लिमों को शिनजियांग में indoctrination शिविरों में रखा हुआ है… indoctrination शिविर यानि वो जगह जहाँ पर व्यक्ति की मूल भावना या विचारों को बदल दिया जाता है, इन्ही शिविरों में उइगर मुस्लिमों का ब्रेनवाश किया जाता है. चीन को अपनी इस हरकत के लिए अन्य देशों की कड़ी आलोचना का शिकार भी होना पड़ा। चीन के प्रेसीडेंट शी जिनपिंग के राज्य में उइगर मुस्लिम्स पर हुए अत्याचारों की लिस्ट बहुत लंबी है.. जिनमें उनको जान और माल तक गंवाना पड़ा.. वो भी तब जब Chinese constitution 1982 के आर्टिकल 36 में लिखा है कि चीन के हर नागरिक को freedom of religion है। freedom of religion यानि धार्मिक स्वतंत्रता.
इसके बावजूद भी चीन में अल्पसंख्यक समुदायों और धर्म के लोगों को अपने धार्मिक नियमों और मान्यतायों का पालन करने पर उन्हें आतंकवादियों का दर्जा दे दिया जाता है और उन्हें तमाम ज्यादतियों का सामना करना पड़ता है.
काश, चीन हम से कभी सीख पाता कि अलग अलग धर्म और जातियों को प्यार, भाईचारे और सम्मान के साथ एक ही देश में बिना बंटवारा किये कैसे रखा जाता है. संपूर्ण विश्व को वसुधेव कुटुम्बकम का सन्देश देने वाला हमारा देश भारत अनेकता में एकता की पहचान है. और इसीलिए जब कोई यह कहता है कि उन्हें भारत में डर लगता है क्यूंकि यहाँ intolerance है तब बहुत अजीब लगता है.. वो भी ऐसे लोग जिनको देश कि जनता ने सर आँखों पर बैठा रखा है और उनका एक एक शब्द लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है, डर और असहिस्नुता क्या होती है यह उनको चीन जैसे देशों में देखना चाहिए. क्यूंकि जब जब मैं इस तरह कि ख़बरों को देखती या सुनती हूँ तब तब मुझे गर्व होता है कि मैं एक भारतीय हूँ.[alert type=white ]दरअसल चीन के शिनजियांग क्षेत्र में काफी समय से मुस्लिमों की एक जाति रहती चली आ रही है जिसका नाम है उइगर मुस्लिम, जो कि काफी तादात में ईस्टर्न और सेंट्रल एशियन देशों  में बसे हुए हैं, अब चीन की सरकार के साथ इनका विवाद क्या है इस पर बात करते हैं.. तो एक तरफ इस जाति के लोगों का कहना है कि चीन की सरकार उनकी धार्मिक आजादी का हनन कर रही है, उनकी सारी हरकतों पर नज़र रखी जाती है और उन्हें धर्म से संबंधित कोई भी काम जैसे नमाज़ पढना, दाढ़ी बढ़ाना, मुस्लिम महिलाओं का बुर्का और हिजाब पहनना, रोजे रखना इन सब से रोका जाता है.. यहाँ तक कि यह लोग अपने बच्चों का मुस्लिम नाम तक नहीं रख सकते हैं. वहीँ चीन की सरकार का मानना है कि उनके देश में इस्लामिकता बढ़ रही है जिससे उनको वहां आतंकवाद के बढ़ने का डर है और कई आतंकवादी संगठन वहां अपना कब्जा करने की कोशिश में हैं, इसीलिए सरकार वहां इस्लामिक लोगों पर तमाम प्रतिबन्ध लगाये हुए है।[/alert]