ईश्वर चंद्र विद्यासागर, जिनकी मूर्ति तोड़ने पर मचा है बवाल

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लोकसभा चुनाव अपने अंतिम चरण से बस कुछ फसलों की दूरी पर है… सातवें चरण का मतदान 19 मई को होने वाला है … इसको लेकर खूब प्रचार प्रसार हो रहा है… लेकिन पश्चिम बंगाल में अलग ही नज़ारा देखने को मिल रहा है….प्रचार से ज्यादा हिंसा का सामना करना पर रहा … और सरकार की मनमानी भी… बंगाल इस लोकसभा चुनाव में बवालों से भरा पड़ा है….

वैसे आजकल कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान मशहूर शिक्षा शास्त्री ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा टूटने का मुद्दा भी गरमा गया है….. जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस बीजेपी कार्यकर्ताओं पर प्रतिमा तोड़ने का आरोप लगा रही है… वैसे आएये जानते है इश्वर चन्द्र विद्यासागर के बारे में …

भारत में 1872 का साल उच्च शिक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है… विधासागर कॉलेज पहला निजी कॉलेज है, जिसे भारतीयों ने चलाया, इसमें पढ़ाने वाले शिक्षक भी तब से  भारतीय ही रहे हैं…..यहां तक कि कॉलेज का वित्तीय प्रबंधन भी भारतीय ही करते रहे….

पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर के उत्साह, आकांक्षा और बलिदान के कारण, कॉलेज ने 1879 में स्नातक स्तर तक की शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय को मान्यता प्राप्त कराई…. बीएल कोर्स के लिए कॉलेज को 1882 में मान्यता मिली…. इस कॉलेज के खुलने से उच्च शिक्षा में यूरोपियों का एकाधिकार समाप्त हो गया था…इस कॉलेज का उद्देश्य मध्यम वर्गीय हिंदुओं को कम पैसों में उच्च शिक्षा देना था…… इस कॉलेज के शुरु होने से पहले तक उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना पड़ता था… लेकिन जिनके पास विदेश जाने के लिए पैसे नहीं होते थे, वो उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते थे…

शिक्षा के साथ साथ उन्होंने हमारे समाज के लिए काफी कुछ किया है … जिसमे से महिलाओं के लिए “विधवा पुनर्विवाह”..

विधवा महिलाओं के लिए मसीहा बन कर आए ईश्वर चंद्र विद्यासागर की तमाम कोशिशों के बाद विधवा-पुनर्विवाह कानून बना….. उन दिनों हिन्दु समाज में विधवाओं की स्थिति बहुत ही सोचनीय थी…. उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के लिए लोगमत तैयार किया.. उन्हीं के प्रयासों से साल 1856 में विधवा-पुनर्विवाह कानून पारित हुआ. आपको बता दें, उन्होंने अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक विधवा से ही करवाया था….. महिलाओं को दूसरा जीवन देने वाले ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने 29 जुलाई 1891 में दुनिया को अलविदा कह दिया था…..

वैसे अब आते है मूर्ति मामले पर….

मंगलवार को कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो हो रहा था…… उस दौरान  पश्चिम बंगाल में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति को तोड़ा गया था…… जिसके बाद सियासी झड़प शुरू हो गई…. मूर्ति को तोड़ने का आरोप तृणमूल कांग्रेस भाजपा के कार्यकर्ताओं पर लगा रही है…ऐसे में अमित शाह ने खुद कुछ तस्वीर जारी की…. जिसमें उन्होंने कहा कि विद्यासागर की मूर्ति को तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने तोड़ा है……

आपको बता दें, दिल्ली में अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटना की जानकारी दी….. जिसमें उन्होंने कहा कि ‘अब तक चुनाव के 6 चरण समाप्त हो चुके हैं लेकिन बंगाल के सिवाय देशभर में कहीं कोई हिंसा नहीं हुई है… ममता बनर्जी का आरोप है कि हिंसा बीजेपी की ओर से की गई है……. वहीं तृणमूल पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए अमित शाह ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ने के लिए भी टीएमसी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताया है…..

 बहुत लोग यह कह रहे की ममता बनर्जी अपने हार को महसूस कर चुकी हैं  इसलिए बौखलाहट में ऐसे कदम उठा रही … खैर दोषी कोई भी हो लेकिन कही न कही यह लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है …