ये नया भारत है, ये तुम्हें तम्हारे घोंसले में कैद कर देगा

पूरे विश्व के सामने आज भारत को एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है. 1 मई 2019 को जैश- ए- मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर यूनाइटेड नेशन की तरफ से इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित कर दिया गया है. वो मसूद अजहर जो ‘मौलाना मसूद अजहर’ कहा जाता है. वो मसूद अजहर जो ज़िहाद के नाम पर नौजवानों को हिंसा की तालीम देता है. उस मसूद अज़हर को एक लम्बी ज़द्दोज़हद के बाद यूनाइटेड नेशन ने आख़िरकार अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया है.

पाकिस्तान में मौजूद भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी.

इसके बाद भारत ने विश्व के उन बहुत से देशों को धन्यवाद कहा जो यूनाइटेड नेशन की सुरक्षा परिषद के सदस्य थे. प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी एक रैली में इसे आतंकवाद के खिलाफ देश की बहुत बड़ी सफलता बताया.

उन्होंने tweet कर के ग्लोबल कम्युनिटी को धन्यवाद कहा और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ये जंग जारी रहेगी. हम विश्व में शान्ति और भाईचारे के लिए काम करते रहेंगे.

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के नेताओं पर उनके tweets  को लेकर भी निशाना साधा. वो नेता जो पिछली बार चीन के वीटो की वज़ह से मसूद अज़हर के बच जाने पर सरकार का मज़ाक उड़ा रहे थे, प्रधानमंत्री मोदी ने उन सभी को आड़े हाथों लिया.

किसी आतंकवादी के खिलाफ कार्रवाई हो और पाकिस्तान का पेट ना दर्द करे ये कैसे हो सकता है. पाकिस्तान ने इस बार सीधे यूनाइटेड नेशन की सुरक्षा समिति पर ही आरोप लगा दिया है. पाकिस्तान की तरफ से कहा गया कि समिति ने ‘मौलाना मसूद अजहर’ के मामले में गोपनीय जानकारी भारतीय मीडिया में लीक की है, और पूरी कार्रवाई का राजनीतिक इस्तेमाल किया है.

10 जुलाई, 1968 को पाकिस्तान, पंजाब के बहावलपुर में पैदा हुआ मसूद अजहर वही आतंकी सरगना है जो पुलवामा के अलावा संसद पर हमले में शामिल था, पठानकोट हमले में शामिल था, हरकत उल अंसार का हिस्सा था, और जिसको भारत की कैद से छुड़ाने के लिए 1999 में इंडियन एयरलाइन्स का एक विमान तक हाईजैक कर लिया गया, जिसमें 155 लोग सवार थे. नतीजा ये हुआ कि मसूद अजहर को छोड़ दिया गया.

उसके आतंकवादी संगठन जैश- ए- मोहम्मद ने बहुत सी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया. इन घटनाओं में इसी साल 14 फरवरी को पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुआ हमला भी शामिल है. इसके अलावा जैश-ए-मोहम्मद ने और भी कई आतंकी हमलों की खुद ही ज़िम्मेदारी ली.

बहुत से देश करते थे मसूद अजहर का विरोध

भारत साल 2009 में हुए 26/11 हमले के बाद से मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित कराने का प्रस्ताव दिया लेकिन भारत के हाथ नाकामी आई.

इसके बाद साल 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद भारत ने अपनी दूसरी कोशिश की. इस बार यूनाइटेड किंगडम, अमरीका और फ्रांस भी भारत के समर्थन में थे, लेकिन फिर भी कोशिश नाकाम रही.

तीसरी बार साल 2017 में जब जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना के कैम्प पर हमला हुआ तब भारत ने फिर से इस प्रस्ताव को यूएन के सामने रखा. लेकिन फिर से भारत के हाथ असफलता ही लगी.

तीन बार भारत को मिली इस असफलता का पूरा श्रेय चीन को जाता है. भारत ने तीन बार प्रस्ताव पेश किया और चीन ने हर बार वीटो लगाकर और ये कहकर ‘टेक्निकल होल्ड’ लिया कि उसे इस मुद्दे को समझने के लिए वक़्त चाहिए.  

चीन हर बार पाकिस्तान से अपनी दोस्ती निभाने के लिए वक़्त माँगता रहा, और भारत अब भी अपने प्रयासों में लगा हुआ था, हर बार नाकामयाबी मिलने के बाद भी भारत ने अपनी कोशिशें बंद नहीं की. पुलवामा में CRPF के काफिले पर हमले के बाद से ना जाने कितने ही बड़े और ताकतवर देश उस मसूद अज़हर के विरोध में और भारत के समर्थन में खड़े हो गए थे.

उन्होंने यूनाइटेड नेशन में मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित करने के लिए भारत के चौथे प्रस्ताव में भारत का साथ दिया. लेकिन कुछ गिने चुने देश थे, और कुछ मीडिया संस्थाएं थीं, जो ये मानने को तैयार नहीं थीं कि अलकायदा, तालिबान और दूसरे कई आतंकी संगठनों की मदद से बना जैश- ए- मोहम्मद एक आतंकवादी संगठन है.

फ़्रांस, अमरीका और ब्रिटेन जैसे देश भारत के पक्ष में खड़े थे लेकिन यूनाइटेड नेशन में शामिल चीन हमेशा की तरह इस बार भी राजी नहीं हुआ. विफलता के इस चौथे मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने tweet कर प्रधानमंत्री मोदी का मज़ाक भी उड़ाया.

कुल चार बार ऐसा हो चुका था जब सभी देश मसूद अजहर को सज़ा दिलाना चाहते थे, लेकिन चीन हर बार उसका बचाव करता रहा.

कभी समझ नहीं आता था चीन का समर्थन-

पाकिस्तान जो आतंकवाद की सबसे सुकून भरी पनाहगाह है, वो जब मसूद अजहर का बचाव करता है तो समझ आता था. अलकायदा और तालिबान को चरमपंथी संगठन कहने वाला मीडिया जब जैश- ए- मोहम्मद को भी ‘चरमपंथी संगठन’ कहकर संबोधित करता था तो समझ आता था. लेकिन अपने चंद फायदों के लिए, भारत से दुश्मनी निभाने के लिए और पाकिस्तान का दुलार पाने के लिए चीन का मसूद अज़हर को समर्थन देना कभी समझ नहीं आया.

इस बार चीन ने यूनाइटेड नेशन को बाकी देशों की तरफ से दी गयी अर्जी पर मसूद अजहर के बचाव में वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है.  चीन को शायद समझ आ गया है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त वाली रणनीति तब ठीक नहीं होती जब बात विश्व एकता की हो, विश्व की सुरक्षा की हो. वो शायद ये समझ गया है कि चीन- पाक इकनोमिक कॉरिडोर उसे भी आतंकवाद के गढ़ पाकिस्तान से जोड़ता है.

हालांकि चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में ये कहा गया कि इस मामले से जुड़े हुए देशों ने जब मामले की संशोधित सामग्री को दोबारा पेश किया, तब बारीकी से निरीक्षण के बाद चीन ने इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

लेकिन चीन की इस तरह की अटपटी बातों से अब सवाल ये उठता है कि इससे पहले क्या भारत कभी सही से मसूद अजहर के खिलाफ दस्तावेज़ ही प्रस्तुत नहीं किये? पता नहीं क्यों बार-बार ऐसा लगता है जैसे चीन संशोधित दबाव को संशोधित सामग्री कह रहा है. खैर जो भी हो भारत को सफलता मिली है, और ये ख़ुशी की बात है.

क्या होंगे मसूद अज़हर के इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित हो जाने के नतीजे-

यूनाइटेड नेशन की तरफ से मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित कर दिया गया है. अब मसूद अजहर पर कई तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए जायेंगे. और साथ ही पाकिस्तान पर मसूद अज़हर के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव भी बढ़ जाएगा.

विदेश यात्रा होगी प्रतिबंधित-

यूनाइटेड नेशन की तरफ से इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित होने के बाद मसूद अजहर की विदेश यात्राओं पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाएगा. मसूद अजहर पाकिस्तान से बाहर नहीं निकल पायेगा. और ऐसा हो जाने से उसकी आतंकी गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगेगी.

बंद होगी फॉरेन फंडिंग-

ये बात दुनिया में किसी से नहीं छुपी है कि आतंकवाद फॉरेन फंडिंग की नींव पर ही पानपता है. बहुत से देश दबे तौर पर गुपचुप तरीके से आतंकवाद का खर्चा चलाते हैं. जैश- ए- मोहम्मद को भी ऐसे ही देशों से पैसा पहुंचता होगा. लेकिन अब यूनाइटेड नेशन की तरफ से इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित हो जाने के बाद उसकी फॉरेन फंडिंग पर रोक लगेगी. और फॉरेन फंडिंग पर रोक लगने का नतीजा समझ तो गए ही होंगे आप.

संपत्तियों को कर लिया जाएगा फ्रीज-

यूनाइटेड नेशन की तरफ से इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित होने के बाद मसूद अजहर की विश्व में मौजूद संपत्तियों को फ्रीज कर लिया जाएगा. ऐसा होते ही वो अपनी उन संपत्तियों से नियंत्रण खो देगा और उन संपत्तियों में से किसी का इस्तेमाल नहीं कर पायेगा.

कुल मिलाकर सिर्फ पाकिस्तान ही बचा है जो उसकी पनाहगाह बना हुआ है. मसूद अजहर को अब जो कुछ भी करना होगा वहाँ बैठे- बैठे ही करना होगा. और इससे उसकी गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी. मसूद अजहर का इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित हो जाना सच में भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है.

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