17 सालों से दूसरों के toilet साफ़ करके बनाया के कीर्तिमान

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गरीब परिवार में जन्म लेने और आर्थिक तंगी के कारण लोगानाथन 6ठी  से आगे की पढ़ाई नहीं कर सके. वो 12 साल का था जब घर चलाने के लिए उन्हें देहाड़ी पर काम शुरू करना पड़ा था.  ना चाहते हुए भी उन्हें अपने सपनों को भूल कर घर वालों का पेट भरने के लिए दिन रात मेहनत करनी पड़ी. भले ही उनकी ख्वाहिशें दब कर रह गई लेकिन वो ये नहीं चाहते थे कि कोई भी बच्चा उनकी तरह कठिनाइयों का सामना करे और अपने सपनों को छोड़ दे, इसलिए लोकनाथ ने ठान लिया की उनसे बच्चों की पढाई के लिए जो कुछ भी मदद हो पाएगी वो करंगे, और आज तक करते आ रहे हैं.

अपने जीवन की कठिनाइयों से प्रेरित 52-वर्षीय लोगानाथन पिछले 17 सालों से शौचालय की सफाई कर रहे हैं ताकि इतना पैसा कमा सके की अनाथ बच्चों की पढ़ाई में उनकी मदद हो जाए. हर दिन लोगानाथन कोयम्बटूर में अपने बाकी के कामों को पूरा करने के बाद वो कई बड़ी कंपनियों के बाथरूम साफ करते हैं.

लोग टॉयलेट की सफाई के काम बहुत शर्मनाक मानते है, और अजीब सी नज़रों से देखते हैं. लेकिन लोकनाथ को ऐसा नहीं लगता है. लोकनाथ ने एक न्यूज़ चैनेल से बात करते हुए बताया की “मैं सैकड़ों लोगों की स्वच्छता में योगदान दे रहा हूं, फिर ये शर्मनाक कैसे हो सकता है? मैं ये सैकड़ों बच्चों के भविष्य के लिए ऐसा कर रहा हूं और मुझे इसमें बिलकुल भी शर्म नहीं आती है. शर्म उन्हें आती है जिनकी सोच छोटी होती है.”

लोगानाथन कन्नमपालयम, कोयम्बटूर के रहने वाले हैं, उन्होंने ये नेक काम 2002 में शुरू किया था. शुरुवात में उन्होंने अनाथालयों में बाँटने के लिए अच्छे परिवारों से कपड़े और किताबें जमा करना शुरू किया. इसके अलावा वो हर साल 10,000 रुपये शहर के जिला कलेक्टर को सरकारी अनाथालयों में भेजते हैं, ये पैसे अनाथालयों में रहने वाले लगभग 1,600 छात्रों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. अपनी भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम इन बातों पर ध्यान भी नहीं देते, हम कभी कभार सोचते ज़रूर है लेकिन करते नहीं हैं, हमे लोकनाथ ऐसे लोगों से सीख लेनी चाहिए और सोचना चाहिए की हमारी जिंदगी का असल मकसद क्या है.