‘India’s Most Wanted’ का ट्रेलर क्यों है विवादों में

313

16 अप्रैल 2019 को फिल्म “India’s Most Wanted” का ट्रेलर रिलीज़ किया गया, यह फिल्म 2007 से ले कर 2013 के बीच हुए बम धमाको पर आधारित है. लेकिन ट्रेलर के मध्य में एक आतंकवादी भगवत गीता के एक श्लोक का उच्चारण करते हुए कहता है कि ‘आत्मा कभी नहीं मरती है, मरता तो सिर्फ शरीर है लेकिन आत्मा मौत के बाद एक शरीर से दुसरे शरीर में प्रवेश कर जाती है.’
इस तरह से ’क्या यह दिखाने कि कोशिश की जा रही है की एक आतंकवादी जिसको भगवत गीता का पूरा ज्ञान है और वह आतंकवाद और दहशद की राह को चुनता है. तो क्या गीता से ही प्रेरित होकर वो लोगों को मार कर उनकी आत्मा को दुसरे शरीर में भेज रहा है?
यह फिल्म जिस दौर में गढ़ी गयी है उस वक्त हिन्दू आतंकवाद नामक एक theory को जन्म दिया गया. यह इस देश के हिन्दुओं के खिलाफ रची गयी सबसे बड़ी साजिशों में से एक है, चाहे समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट हो या 2008 का मालेगांव ब्लास्ट जिसमे हिन्दू आतंकवाद के कोई साक्ष तो नहीं मिले मगर फिर भी ये प्रोपेगंडा फैलाने की आज भी कोशिश की जा रहा है.
यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यह फिल्म क्या साबित करना चाहती है, की भगवत गीता पढ़ कर लोग फसादी बन जाते हैं और लोगों का कतल-ए-आम करने लग जाते हैं? दुख की बात तो यह है कि ऐसा बॉलीवुड की फिल्म में पहेली दफा नहीं हो रहा, कुछ साल पहले आई फिल्म अग्निपथ और हाल ही में आई फिल्म जंगली में भी इसी तरह से विलन के किरदार को भगवत गीता का ज्ञातक दिखाया है पर तब भी वो गलत रास्ता ही अपनाता है, ये सिलसिला बॉलीवुड की फिल्मो में पिछले 20 सालों से चला आ रहा है.
जिस सभ्यता ने दुनिया को “वसुधैव कुटुम्बकम्”, “सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:ख भाग्भवेत्” का ज्ञान दिया, अहिंसा का पाठ पढाया, अज हमरा बॉलीवुड उसी संस्कृति को बदमान करने की कोशिश में लगा हुआ है.
यह भी जरुरी नहीं है की यह फिल्म इस बात को पूरी तरह से symbolize करती ही हो लेकिन आखिर क्यों सनातन धर्म और संस्कृति को बार बार ठेस पहुचने की कोशिश की जा रही है? कुछ महीनो पहले आई फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक” में इस्तेमाल हुए 72 हूरों वाले डायलाग को सेंसर बोर्ड इस लिए हटा दिया क्योंकि वो एक विशेष धर्म की भावनाओं को दुख पंहुचा सकता है, लेकिन इस देश में बन रही कई फिल्मों के ज़रिये हिन्दू भावनाओं को आहत पहुँचने की जो कोशिश की जा रही है उसपर कोई प्रकाश क्यों नहीं डालता?