तनावपूर्ण हालातों के चलते भारत – पाकिस्तान मेगा सैन्य अभ्यास में लेंगे हिस्सा

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तनावपूर्ण हालातों के बाद भी भारत और पाकिस्तान अगले महीने रूस में संघाई सहयोग संगठन के स्ट्रक्चर द्वारा होने वाले मेगा सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेंगे. ये 16 से 21 सितंबर तक रूस के ऑरेनबर्ग में आयोजित किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि इस अभ्यास का मकसद एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है.

भारत और पाकिस्तान ने पिछले तरीके के अभ्यास में पिछली साल भी हिस्सा लिया था. ये आज़ादी के बाद पहला मौका था, जब दोनों देश किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा बने थे. दोनों देशो की सेनाओं ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भी एक साथ काम किया था. अधिकारियो ने कहा कि भारत इस अभ्यास के लिए एक बड़ी टीम भेजेगा जिसमें सेना और वायु सेना के जवान होंगे. एससीओ सैन्य अभ्यास आतंकवाद विरोधी सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित करेगा. एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में संपन्न एक शिखर सम्मेलन में रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने की थी. भारत और पाकिस्तान को 2005 में इस समूह में सुपवाइजर के तौर पर शामिल किया गया था. 2017 में दोनों देश इस समूह के पूर्ण सदस्य बने थे.

इस संगठन का उद्देश्‍य रेशियल और धार्मिक चरमपंथ से निपटने और व्यापार-निवेश बढ़ाना था. हालांकि, 1996 में शंघाई इनीशिएटिव के तौर पर इसकी शुरुआत हुई थी. इसका उद्देश्य ये था कि मध्य एशिया के नए आज़ाद हुए देशों के साथ लगती रूस और चीन की सीमाओं पर कैसे तनाव रोका जाए और धीरे-धीरे किस तरह से उन सीमाओं को सुधारा जाए और उनका निर्धारण किया जाए और ये लक्ष्य सिर्फ़ तीन साल में ही हासिल कर लिया गया. इसी की वजह से इसे काफ़ी प्रभावी संगठन माना जाता है.भारत के द्वारा कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने इसका जमकर विरोध किया और तीखी प्रतिक्रियाएं देना बंद नही कर रहा है और इसके चलते दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण है. भारत ने इस मामले को आंतरिक मामला बताते हुए किसी और पक्ष को इसमें हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है.