5 साल में इतनी बदल गई भारतीय रेलवे की सूरत

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इस देश की आधी से ज्यादा आबादी ट्रेन से सफ़र करती है क्यूंकि ट्रेन से सफ़र करना सबके लिए बेहद आरामदायक और आसान हो जाता है. आज इस देश की जनता भारतीय railway का पूरा विश्वास करती है कि वो उन्हें कम से कम पैसे में सबसे बेहतर सुविधा मुहैया कराएगी. लेकिन क्या यही विश्वास आज से 5 साल पहले इस देश कि जनता में था ? ज्यादा नहीं, आप बस 5 साल पीछे चले जाए, तो आपको उन तंग रेलवे स्टेशनों और बदहाल ट्रेनों की याद आ जाएगी, आये दिन ट्रेन दुर्घटना की खबरे सुन कर उस वक्त लोग ट्रेनों से सफ़र करने तक से कतराने लगे थे.वैसे आपको बता दें कि आज भारतीय रेलवे ने Railway safety और modernization के क्षेत्रों में सबसे अच्छा प्रदर्शन दर्ज करते हुए जबरदस्त ग्रोथ देखी है.

आज से 5 साल पहले चले जाए तो railway stations पर कूड़े दान तो दूर दूर तक कहीं दिखते ही नही थे. लोग भी कूड़े को station platform पर ही फेक दिया करते थे. पान खाकर किसी भी दीवार पर थूक कर अपनी कलाकारी दिखा देते थे. दीवारों से पेंट झड़ जाते थे लेकिन दूबारा पेंट नही होता था. लोगों को घंटो ट्रेनों के इंतज़ार में railway station पर गुजारने पड़ते थे और वहां बैठने के कोई ख़ास इंतेज़ाम भी नही हुआ करते थे. न railway station के बाहर पार्किंग की सुविधा हुआ करती थी और वेटिंग रूम की हालत इतनी तंग रहती थी कि वहां पंखे तक नही होते थे, साफ़ सफाई का तो बस नाम ही था.

लेकिन अब ज्यादातर railway station और ट्रेन साफ़ सुथरी रहती है. जगह जगह पर कूड़ेदान मौजूद रहते है ताकि कोई भी शख्स कूड़ा इधर उधर न फेके. दीवारों को सुंदर बनाने के लिए उनपर सुंदर सुंदर चित्रकारी की गई है. भारतीय रेल अपनी लेट लतीफी और लम्बे वेटिंग लिस्ट के लिए भी बदनाम थी लेकिन अब ये सब बीते दिनों की बात हो गई है. रेलवे की स्थिति सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने मिशन रफ़्तार नाम से एक योजना भी लॉन्च की है. इस मिशन के तहत ट्रेनों कि रफ़्तार बढाई जा रही है. पहले महिलाओ के लिए भी railway में कुछ खास सुविधाए नही थी पर अब भारतीय रेलवे ने महिलाओं की सुविधा के लिए एक अहम कदम उठाया है. अब भारतीय रेल में भी महिलाओं के लिए आरक्षित कोच लगाए जा रहे है ताकि महिलाएं बिना डरे अपने बच्चों के साथ सुरक्षित और सुकून भरी यात्रा कर सकें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने से पहले भारतीय रेलवे के पुनरुद्धार का वादा किया, और वो उसको पूरा भी कर रहे है.

रेल मंत्रालय ने railway की दशा और दिशा बदलने के लिए गंभीर फैसले भी किए है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारतीय रेल विश्व की पहली ग्रीन रेलवे बनने की ओर अग्रसर है. भारतीय रेलवे ट्रेनों को इको फ्रेंडली बनाने जा रही है. इको फ्रेंडली यानी पर्यावरण के अनुकूल. इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए भारतीय रेल को डीजल इंजनों से मुक्त कर पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बनाने की कोशिश की जा रही है. पहले लोगों को railway station पर wifi की सुविधा भी नहीं दी जाती थी लेकिन अब मोदी सरकार यात्रियों की सुविधाओं को विश्वस्तरीय और डिजिटल बनाने के लिए उन्हें रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई की सुविधा भी प्रदान की जा रही है. सरकार ने कुछ ही वर्षों में रेलवे का पूरी तरह से कायापलट कर दिया है, सरकार ने इस देश को बदहाली के दौर से बाहर निकाल कर भारतीय railway के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है.