भारतीय रेल ने किया एक और बड़ा कीर्तिमान अपने नाम! सीधे आप से है इसका नाता

रेल दुर्घटनाओं से देश कई बड़े जख्म झेल चुका है। कभी स्कूली बच्चों से भरी बैन ट्रैन से टकराने की खबर , तो कभी रेल लाइन क्रॉस कर रहे लोगों के रेल की चपेट में आजाने से मृत्य। इस तरह के नाजाने कितनी ऐसी घटनाएं इस देश में हुई हैं जिसमे हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई हैं लेकिन सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने एक बड़ा संकल्प लिया वो संकल्प था देश को मानवरहित क्रासिंग से मुक्त करना जो अब पूरा हो चुका है। एक आंकड़े के अनुसार 2014-2015 में मानवरहित फाटकों पर विभिन्न घटनाओं में 130 लोगों की जान चली गई थी। 2015-16 में ऐसे फाटकों पर 58 लोगों और 2016-17 में 40 लोगों की मौतें हुईं। 2017-2018 में 26 लोग ऐसे फाटकों पर अपनी जान गंवा बैठे, जबकि पहली अप्रैल, 2018 से 15 दिसंबर, 2018 तक 16 लोग मारे गए थे, उनमें 13 लोग कुशीनगर हादसे में मारे गए, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे।
कुशीनगर में हुए हादसे के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने देश को मानवरहित क्रासिंग से मुक्त करने की सीमा को 2020 से हटाकर 2019 कर दिया था। जिसे अब पूरा किया जा चुका है। यहां आपको यह भी बताना जरूरी है कि आखिरी मानवरहित फाटक इलाहाबाद मण्डल में ही बचा था जिसे लोगों के विरोध के कारण खत्म नही किया जा सका था. हालाँकि रेलवे इसे भी बंद करने में कामयाब रही. इसके बाद यहाँ एक पत्थर लगाया गया है जिसपर लिखा है कि ‘आज दिनांक 31-01-2019 को इलाहाबाद मंडल के चुनार-चोपन रेलखंड के मानव रहित रेलखंड सं. 28-सी को बंद किया गया। यह भारतीय रेल के ब्रॉड गेज तंत्र के उन 4605 समपारों में से अंतिम मानवरहित समपार है, जो भारतीय रेलवे ने अपने अथक प्रयासों से पिछले 15 महीनों में हटाए हैं।’
रेल मंत्रलाय द्वारा जारी किया गया ये वीडियो देखिये

ऐसा माना जाता है कि देश में ज्यादातर होने वाले रेल हादसे क्रासिंग या फाटक की वजह से ही होते थे. जिन्हें बंद करने का काम रेलवे ने बड़ी तेजी से किया और अपने टार्गेट समय से पहले ही उसे पूरा कर लिया गया. मंत्रालय ने रेल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा समीक्षाएं आयोजित कराईं. उन्हें बेहतर, और बेहतर ट्रेनिंग दी गयी ताकि वो पूरी सावधानी, सुरक्षा और सतर्कता के साथ काम करें. इसके अलावा देश में पहला रेलवे विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी घोषणा की जा रही है. इसकी स्थापना गुजरात में की जायेगी.रेल मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि सरकार साल 2022 तक सरकार भारतीय रेलवे का 100% इलेक्ट्रिफिकेशन करने की योजना पर काम कर रही है. ऐसा हो जाने से ईंधन की बचत तो होगी ही साथ ही आपकी रेल यात्रा और भी सुरक्षित होगी. इलेक्ट्रिफिकेशन से रेलवे के सिग्नल सिस्टम में सुधार होगा, और दुर्घटना के आसार कम होंग. रेल मंत्रालय लगातार लोगों के हित में काम करने में जुटा हुआ हैं. पिछले कुछ सालों से जो नतीजे सामने आ रहे हैं उसे आपके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी है.

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