भारत के 6 प्रधानमंत्री और उनकी ऐतिहासिक अमरीकी यात्राएँ

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“पूरा अमरीका डोल रहा है, मोदी मोदी बोल रहा है।”

हाउडी मोदी कार्यक्रम ने विश्व के आगे ये साबित कर दिया कि भारत-अमरीकी संबंध अन्य देशों से काफी अलग हैं। मानो मोदी नहीं, ट्रंप अमेरिका में गेस्ट स्पीकर हो। मोदी को सुनने आए जनसैलाब में तब तो जोश ही भर गया जब मोदी ने कहा कि वर्ष 2017 में ट्रंप ने अपने परिवार से मिलाया था, आज मैं अपने परिवार से आपको मिलाता हूं। वाकई प्रवासी भारतीयों को मोदी के इस कथन से अलग ही खुशी हुई होगी।

इस तरह का कार्यक्रम मजबूत होते भारत की तरफ इशारा करता है। हाउडी मोदी कार्यक्रम ने निश्चित रूप से अपना नाम भारत अमरीकी रिश्तों के इतिहास में दर्ज़ करा लिया है। लेकिन क्या आप मोदी के पीएम बनने से पहले, भारतीय प्रधानमंत्रियों की इसी तरह की ऐतिहासिक अमेरिका दौरों के बारे में जानते हैं? आज हम उन्हीं के बारे में बताने जा रहे हैं।

पहले नंबर पर आते हैं, आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू। नेहरू जी ने 1956 में पहली बार अमेरिका यात्रा की, इसी यात्रा से भारत और अमेरिका के सम्बन्ध की शुरुआत होती है। नेहरू और अमेरिका के राष्ट्रपति ड्वाइट डी ने गेट्सबर्ग में करीब 14 घंटे मीटिंग की। राष्ट्रपति ड्वाइट ने 822 मिलियन डॉलर के साथ भारत की सहायता की। साथ ही उन्होंने PL 480 फ़ूड प्रोग्राम के लिए भी मंजूरी दी । तीन साल बाद ड्वाइट ने भारत का दौरा भी किया। ये नेहरू जी की प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली और सबसे सफल अमरीकी यात्रा थी। हालाँकि, नेहरू की आखिरी अमेरिका यात्रा के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना था कि वह उनकी सबसे खराब राजकीय यात्रा रही।   

दूसरे नंबर पर हैं, नेहरू जी की बेटी श्रीमती इंदिरा गाँधी। वह साल 1966 में पहली महिला प्रधानमंत्री बनी। पहले तो रूस के साथ अच्छे सम्बन्ध होने के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन के साथ उनकी इतनी अच्छी नहीं जमी । लेकिन साल 1982 में जब उन्होंने अमेरिका यात्रा की, तो तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के साथ उन्होंने तारापुर परमाणु संयंत्र पर कॉपोरेशन ओन साइंस एंड टेक्नोलॉजी समझौते पर हस्ताक्षर किया। रिश्ते इतने गहरे होने लगे कि 1985 को अमेरिका ने ’भारत के वर्ष’ के रूप में चिन्हित किया।

तीसरे नंबर पर हैं, पीवी नरसिम्हा राव। नरसिम्हा साहब एक वकील थे। 1991 में प्रधानमंत्री बने , उनकी मई 1994 की अमेरिका यात्रा का अलग ही महत्व है। भारत और अमरीका के बीच व्यापार बढ़ने लगा था। नरसिम्हा साहब के शासन में अमेरिका से भारत में टेलीकॉम सेक्टर के लिए भारी निवेश मिला। अमेरिका भारत में सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टर के रूप में उभरा। नरसिम्हा जी की यात्रा ने भारत अमेरिका व्यापारिक रिश्तों की नीव रखी  थी।

चौथे नंबर पर हैं, अटल बिहारी वाजपेयी। 1999 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अटल जी, साल 2000 में अमेरिका यात्रा पर गए। अटल जी के द्वारा किए गए अमरीकी दौरे ने भारत-अमेरिका रिश्ते को पहले से और भी मजबूत बना दिया। उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के साथ जॉइंट कांग्रेस को सम्बोधित किया। भारत और अमेरिका के बीच व्यापर बढ़ाने का वादा हुआ, टेक्नोलॉजी, सीखने की उन्नति और सूचना के आदान प्रदान को बढ़ाने का वादा किया गया। आपको बता दें, भारत अमरीकी संबंध आज तक तक इसी कथन पर आधारित है।

पांचवे है, डॉक्टर मनमोहन सिंह जी। जो 2004 में भारत के प्रधानमंत्री बने। सिंह साहब पुरे विश्व के सबसे बढ़िया अर्थशास्त्रों में गिने जाते हैं। उनकी जुलाई 2005 की अमरीकी यात्रा ही थी जिसके बाद भारत का परमाणु भविष्य तय हुआ। सिंह साहब और अमेरिकी राष्ट्रपति बुश के बीच हुई बैठक में यह तय हुआ कि भारत अपनी नागरिक और सैन्य  परमाणु सुविधाओं को अलग करेगा।साथ ही, भारत अपनी सभी नागरिक परमाणु सुविधाओं को इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी रडार के तहत ही रखेगा।

मोदी जी ने हाउडी मोदी से पहले भी, 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद कई अमेरिकी यात्राएं की। नरेंद्र मोदी की बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप के साथ की गई सभी यात्राएं सफल ही रही। बता दें, भारत और अमेरिका की दोस्ती अब अपने चरम पर है। और हमें आशा है  भविष्य में ये दोस्ती और भी ज़्यादा गहरी होगी।