कुछ भी लिखने या दिखाने से पहले मीडिया को कर लेनी चाहिए पड़ताल

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“अफज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल ज़िंदा हैं”

ये नारा सुना था? हाँ! अफज़ल गुरु की फांसी के बाद जेएनयू से गूंजा था, और बहुत जोर से गूंजा था. और सिर्फ यही नहीं, और भी बहुत से देश विरोधी नारे थे जो जेएनयू में गूँज रहे थे. काफी बवाल भी मचा था इन देश विरोधी नारों को लेकर उस वक़्त. पूरा देश दो खेमों में बंट सा गया था. एक वो जो नारे लगाने वालों का समर्थन कर रहे थे और दूसरे वो जो विरोध.

उन दिनों गूँज रहे इन्ही देश विरोधी नारों में से एक नारा था,

“तुम कितने अफज़ल मारोगे, हर घर से अफज़ल निकलेगा”

ये सारे नारे गूंजे संसद हमले के मास्टरमाइंड अफ़जल गुरु को फाँसी चढ़ाए जाने के विरोध में. साल 2001 में 13 दिसम्बर को पांच आतंकी सफ़ेद अम्बेसडर लेकर संसद भवन में घुस गए और ताबड़तोड़ फायरिंग करने के साथ ग्रेनेड बरसाने लगे. उन पांचो को मार गिराया गया. लेकिन इस हमले में संसद भवन के गार्ड और पुलिस के जवानों को मिलाकर 9 लोग शहीद हुए. इस घटना ने देश के लोगों को हिलाकर रख दिया.

ये पूरा खेल अफज़ल गुरु का ही रचा हुआ था. इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया और उसपर केस चलाया गया. इस केस के फैसले में उसे मौत की सजा सुनाई गई. जैश- ए- मोहम्मद ने तो अफज़ल गुरु के नाम से सुसाइड स्क्वाड तक बना रखा है. लेकिन हमारे जेएनयू वाले बुद्धिजीवी बहुत नाराज़ थे कि ऐसे आतंकी को सज़ा क्यों दी गई? वो इतने नाराज़ थे कि देश के टुकड़े करने तक की बात कह डाली,

“भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह!”

बुद्धिजीवियों ने जितना जमकर हंगामा किया, उतना ही जमकर देश के मीडिया ने उनका साथ भी दिया. उन देशद्रोही बुद्धिजीवियों को, जिनको जेएनयू कैंपस के बाहर कोई जानता तक नहीं था, हीरो बनाकर पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी हमारे तेज- तर्रार मीडिया ने.

सिर्फ अकेले अपने दम पर देश के मीडिया ने भविष्य के तीन से चार राजनीतिज्ञ पैदा कर दिए उस “हर घर से अफ़जल निकलेगा” वाले सीन में.

इससे हमें समझ आ गया था कि हमारे देश का मीडिया अपने काम के प्रति कितना जिम्मेदार है. और अभी फिलहाल देश का यही जिम्मेदार मीडिया फिर से अपनी एक और जिम्मेदारी निभा रहा है. वो अफ़जल गुरु जो हर घर से निकल रहा था, उसके अपने घर से उसका बेटा निकला है, ग़ालिब गुरु.

ग़ालिब अपनी माँ तबस्सुम और नाना गुलाम मुहम्मद के साथ गुलशनाबाद में रहता है. उसने अपनी बारहवीं की पढ़ाई पूरी कर ली है, और डॉक्टर बनने के लिए विदेश जाना चाहता है. विदेश जाने के लिए सभी को पासपोर्ट चाहिए होता है. इसलिए उसने भी पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया. देश का जिम्मेदार मीडिया चौंककर हरकत में आ गया और लगा उसे हीरो बनाने.

मतलब सच में वो- वो बातें लिख गया ग़ालिब गुरु के बारे में जो उसने कही ही नहीं.

“अफ़जल गुरु के बेटे को है भारतीय होने पर गर्व!”

उसने जब खुद ये सब पढ़ा तो सोच में पड़ गया,

“ये सब मैंने कब कहा? मुझे कब गर्व हुआ?”

यही वजह रही कि जब उसे ये सब पता चला तो उसने देश के मीडिया को जमकर लताड़ा.

उसने कहा कि मीडिया प्रोपेगंडा रच रहा है, मुझे सिर्फ़ पासपोर्ट चाहिए था, बाकी जो कुछ भी लिखा गया सबकुछ फर्जी है.

सोशल मीडिया पर एक अफज़ल गुरु के बेटे ग़ालिब गुरु का एक वीडियो है. इस वीडियो में ग़ालिब गुरु ने साफ़ तौर पर कहा है कि,

“अगर मेरे पास आधार कार्ड है तो पासपोर्ट क्यों नहीं हो सकता. तुर्की में मुझे स्कॉलरशिप दे रहे हैं इसलिए मैंने बोला था कि मेरा पासपोर्ट होना चाहिए.”

ग़ालिब गुरु ने साफ़ तौर पर मीडिया संस्थानों पर अपने बारे में झूठ फैलाने का आरोप लगाया और कहा,

“उन्होंने कुछ अजीब बातें भी लिखी,

समझिये, जो इंसान प्राउड इंडियन लिखे जाने की बात को ‘अजीब’ कह रहा है, वो प्राउड इंडियन कैसे हो सकता है? उसे भारतीय होने पर कोई गर्व नहीं है. लेकिन फिर भी इंडियन मीडिया उसे प्राउड इंडियन बनाने पर क्यों तुला हुआ है ये सोचने वाली बात है.

खैर, ग़ालिब गुरु आगे बोलता है,इंडियन मीडिया जिसे प्राउड इंडियन बता रहा था उसी ने अपने वीडियो में कहा है कि इंडिया ने उसके पापा को मारा है. इण्डिया ने उसके परिवार के साथ अन्याय किया है. इंडिया ने पूरे कश्मीर के साथ अन्याय किया है. मैं कैसे प्राउड कर सकता हूँ इंडिया पर.

इस वीडियो के आने के बाद से सोशल मीडिया पर इंडियन मीडिया संस्थानों की जमकर किरकिरी हो रही है. लोग वीडियो को शेयर करते हुए इंडियन मीडिया को खूब लताड़ रहे हैं.

साथ ही लोग ग़ालिब गुरु की बातों पर भी सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि ग़ालिब गुरु भारत का रहने वाला है, उस का आधार कार्ड भारत का है, उसे पासपोर्ट भारत से चाहिए, लेकिन उसे भारतीय होने पर गर्व नहीं है, ऐसा क्यों?

ग़ालिब गुरु को साफ़ तौर पर इस बात को लेकर आपत्ति है कि उसे देश पर गर्व करनेवाला क्यों दिखाया गया. उसे देश पर कोई गर्व नहीं है. उसे गर्व हो भी कैसे सकता है उस देश पर जिसमें वो पैदा हुआ है? उसे गर्व कैसे हो सकता उस देश पर जहां वो पल रहा है? उसे गर्व हो भी कैसे सकता है उस देश पर जिसकी मिटटी में उगा अनाज वो खा रहा है, जिसकी छाती से निकला पानी पीकर प्यास बुझा रहा है, कैसे गर्व हो सकता है उसे उस देश पर.

देश ने उसके आतंकी पिता को पुचकारा होता, दुलारा होता, पाकिस्तान की तरह सर आँखों पर बिठा लिया होता, तो ग़ालिब को हो जाता गर्व. जिस देश की सेना कश्मीर के लोगों की मदद करने के बाद बदले में उन्ही से पत्थर खाती है, उस देश पर ग़ालिब गुरु, या कोई भी कश्मीरी कैसे गर्व कर लें? उसे तो बस भारतीय होने के नाते ‘पासपोर्ट’ चाहिए.

भारत में उसके जो अधिकार हैं वो उसे सब याद हैं. उसे याद है कि अगर उसके पास आधार कार्ड है तो उसे पासपोर्ट भी मिलना ही चाहिए. लेकिन भारत के प्रति उसके कर्त्तव्य क्या हैं ये याद करने की उसे कोई ज़रुरत शायद कभी महसूस नहीं हुई होगी. शायद यही वज़ह है कि मीडिया ज़बरदस्ती उनकी छवि साफ़ करने की कोशिश कर के अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा था.

लेकिन हर तरफ से मिल रही लताड़ के बाद फिलहाल तो देश का मीडिया बगलें झांकने लगा है. लेकिन मुझे नहीं लगता कि इन्हें ऐसे छोड़ देना चाहिए. आप देश की जनता हैं, आप लोकतंत्र के ‘लोक’ हैं, और आपको ‘मीडिया तंत्र’ से सवाल करना चाहिए कि भाई आपने वो सब कैसे सुन लिया जो अफ़जल गुरु के बेटे ने बोला ही नहीं?

देखिये हमारा ये वीडियो: