कोविड-19 के टीके को लेकर काम कर रही 6 भारतीय कंपनियों की तरफ से आई ये बुरी खबर

दुनियाभर के देशों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी कोरोना का कहर थम नहीं रहा है. हर दिन कोरोना के मरीजों की रफ़्तार काफी तेजी से बढ़ रही है. दुनियाभर के देश इस बीमारी का इलाज ढूढ़ने में लगे हुए हैं न ही इसकी दवा बनी है न ही कोई वैक्सीन तैयार हुई है जिससे लोगों को इस बीमारी से बचाया जा सके. अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या 5 लाख से भी ज्यादा हो चुकी है और हर दिन हजारों लोग जान दे रहे हैं.

जानकारी के लिए देश के एक शीर्ष वैज्ञानिक का कहना है कि कोविड-19 का टीका खोजने के लिए भारत की 6 बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं. पूरी दुनिया में फैली इस महामारी से बचने के लिए कई देशों के वैज्ञानिक लगे हुए हैं. 70 तरह के टीकों का परिक्षण हो रहा है और कम से कम तीन टीकों को मानव परिक्षण के चरण में पहुंचा दिया गया है. वहीँ इस टीके को लेकर बुरी खबर है जो आपको विचलित कर सकती है.

कोरोना के टीके पर काम कर रही 6 भारतीय कंपनियों ने कहा है कि नोवेल कोरोना वायरस का टीका बड़े पैमाने पर 2021 से पहले तैयार होने की संभावना नहीं है. कोरोना जैसे गंभीर वायरस से विश्वभर में इस समय 19 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं और 1 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान दे चुके हैं. ऐसे में इस बीमारी के टीके की बड़े पैमाने पर ही जरुरत है नहीं तो हालात और भी ज्यादा बिगड़ सकते हैं.

गौरतलब है कि ट्रंसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट फरीदाबाद के कार्यकारी निदेशक गगनदीप कांग ने कहा, ‘‘जाइडस कैडिला जहां दो टीकों पर काम कर रही है, वहीं सीरम इंस्टिट्यूट, बॉयलॉजिकल ई, भारत बायोटेक, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स और मिनवैक्स एक-एक टीके पर काम कर रही हैं.’’ कांग ‘कोअलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (सीईपीआई)’ के उपाध्यक्ष भी हैं जिसने एक हालिया अध्ययन में उल्लेख किया कि ‘‘कोविड-19 महामारी का तोड़ निकालने के क्रम में वैश्विक टीका अनुसंधान एवं विकास प्रयास स्तर और गति के लिहाज से अभूतपूर्व है.’’ वहीँ केरल स्थित राजीव गाँधी जैव प्रौद्द्योगिकी केंद्र (आरजीसीबी) के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी ई श्रीकुमार ने कहा, ‘‘टीके का विकास करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें प्राय: वर्षों लगते हैं और अनेक चुनौतियां होती हैं.’’