भारतीय सेना ने दो घंटे के भीतर सिक्किम की भारी बर्फ़बारी में फंसे 150 पर्यटकों को बचाया


देश की सरहदों पर मोर्चा संभाले खडी है इंडियन आर्मी, दुश्मनों से लोहा लेते हुए ताकि हम अपने दिन – रात, होली – दिवाली, सुरक्षित और सुकून से गुज़ार सकें… वैसे तो हमारे देश की आर्मी का हर पल देश सेवा को समर्पित हैं लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उस ख़ास घटना की जब इंडियन आर्मी बॉर्डर से दूर भी अपने फ़र्ज़ को निभा रही थी
“देश में दंगा हो, तब आती है इंडियन आर्मी
जब बाड़ आये तब आर्मी, जब भूकंप आये तब इंडियन आर्मी “
कोई गड्डे में गिर जाये तब आर्मी यह आर्मी आपको सिर्फ सरहदों पर चीन और पाकिस्तान से ही नहीं.. बल्कि देश और देशवासियों पर आये हर संकट से उबारती है.. प्राकृतिक आपदा हो या कोई और मुसीबात जब बात सबके हाथ से निकल जाती है तब मोर्चा संभालती है आर्मी |

ऐसा ही एक मोर्चा आर्मी सिक्किम में भारी बर्फ़बारी और शुन्य से भी कम तापमान में संभाल रही है. उन्होंने रातों रात सिक्किम की फेमस लाचुंग घाटी में फंसे 150 tourists को बचाया जो भारी बर्फ़बारी की वजह से वहां फंस गए थे.. और यह सब कुछ उन्होंने किया मात्र दो घंटे में.
उत्तरी सिक्किम में इस वक़्त मौसम का तापमान 0 से भी कम है और tourist प्लेस होने के कारण यहाँ पर आने जाने वाले लोग की भीड़ हमेशा बनी रहती है लेकिन अचानक बिगड़े मौसम के बारे में किसी को भी अंदाजा नहीं था, ऐसे में जगह जगह फसे tourists को सही सलामत वहां से निकालना और तुरंत चिकित्सा देने का बीडा उठा रही है आर्मी. कल उन्होंने लाचुंग घाटी में फंसे 150 tourists जिनमे बच्चे और बूढ़े भी शामिल थे उन्हें दो घंटे के अन्दर अन्दर वहां से निकालकर मेडिकल कैम्पस में पहुंचाया और रात भर फंसे हुए पर्यटकों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते रहे.
इतने कम समय में इतने लोगों को बचाने का काम हमारी आर्मी ही कर सकती है, आप में से बहुत कम लोगों को पता होगा कि सिक्किम में यह इन सर्दियों में हुआ दूसरा सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन था, इससे पहले 28 दिसम्बर 2018 में नाथुला क्षेत्र से आर्मी 3000 tourists को निकाल चुकी है जिसके बारे में हम में से ज्यादातर लोग जानते ही नहीं हैं.

देश के जवान आपकी सुरक्षा में रात और दिन एक किये हुए हैं, पर अफ़सोस कि लोग आर्मी पर भी राजनीति करने से बाज़ नहीं आते
उन्हें शुक्रिया बोलने की बजाय कभी उन्हें निर्दयी और उन पर हमला करने वालों को मासूम का दर्ज़ा दे देते हैं.. तो कभी यह कहकर कि हमारी सैन्य शक्ति चीन से कम है उनका हौंसला तोड़ते रहते हैं, अभी यह बात आप बोल रहे हैं.. अगर वो भी ऐसा बोलकर सरहद से हट जायें तो आपका क्या होगा??
और अगर तुलना करनी ही है, तो उन देशों से करें जहाँ हर देशवासी देश के लिए मर मिटने को तैयार है.. अपने देश की कमजोरी नहीं हौसला बनें.. इंडियन आर्मी कि तरह.
जय हिन्द.. जय हिन्द की सेना

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