पैर में लगी थी गोली, सामने खड़ी थी फौज देखिये फिर आतंकी के साथ क्या हुआ

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कश्मीर घाटी के लड़कों को किस तरफ भटकाया जाता है, उन्हें जिहाद के नाम पर किस तरह आतंकी बनाया जाता है, आजादी के नाम पर उन्हें किस तरह जहन्नुम की तरफ भेजा जाता है, इसकी कई कहानियाँ आपने सुनी होंगी. आज हम आपको जिहाद और आतंक की राह पर निकलने एक ऐसे ही कश्मीरी युवक से मिलवाने जा रहे हैं जिसने फौज को सामने देखकर कहा माफ़ कर दीजिये गलती हो गयी!!


दरअसल कुछ समय पहले आरिफ हुसैन बट नामक युवक आतंक की राह पर निकला था. उसे लगता था कि कश्मीर और इस्लाम का अगर कोई सबसे बड़ा दुश्मन है तो वो है फौज! जब आतंक की राह पर निकला तो उसके हाथ में रायफल भी आ गयी, अब तो उसका मनोबल और बढ़ गया.. जैसे की सबका बढ़ता है हाथ में हथियार आने के बाद, इसके कुछ समय बाद हुसैन वीडियो बनाकर जारी कर दिया है कि वो कश्मीर से भारतीय सेना को भगा कर ही दम लेगी क्योंकि वे उनके दुश्मन है. जैसा कि आपको याद होगा कि पिछले कुछ समय से जिस आतंकी का वीडियो सामने आता है उसके कुछ ही समय में सेना के जवान उसको मौत के घाट उतार ही देते थे. लेकिन किस्मत से हुसैन अभी तक बचा हुआ था.


ऐसे ही कुछ बीते …इसके बाद जिहाद की राह पर निकले आरिफ हुसैन बट को इसकी हकीकत से पता चला… अब उसे पता चल गया है कि हमारा असली दुश्मन कौन है? दरअसल जिहादी बनने निकला आरिफ हुसैन और उसके एक अन्य साथी आदिल अहमद को बीती रात हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर के आतंकियों ने एक बैठक के लिए बुलाया था.. बैठक में शामिल होने के लिए अँधेरे में सब पहुंचे. इसके बाद आरिफ हुसैन बताता है कि ‘मैं और आदिल सोच रहे थे कि शायद हिज्ब और लश्कर के लड़के हमारे गुट में शामिल होने वाले हैं।’ फिर मुझे लगा कि ये लोग हमारे साथ मिलकर फौज पर कोई बड़ा हमला करना वाले हैं लेकिन मैं गलत था. हमारे पहुँचते ही हमें घेर लिया गया है और हमें जिहाद का दुश्मन और पाक के खिलाफ जाने का आरोप लगाया गया… हमें पीटा गया.. फिर हथियार छीना गया और फिर आदिल को मेरे सामने गोलियों से भून दिया गया…. मैं गली नही मारी मुझे हिजबुल या लश्कर का हिस्सा बनने को कहा गया लेकिन मैं वहां से भागने लगा.. तो मेरे पैर में गोली मार दी और कहा कि नए हो इसलिए छोड़ रहे हैं. इसके आगे वो बताता है कि मैं बाग़ में पड़ा तडफ रहा था मुझे लग रहा है कि फौज मुझे देखेगी तो मुझे देखते ही गोली मार देगी..

इसके बाद कुछ ग्रामीण और फौज वहां पहुंची.. फौज वालों ने मुझसे कहा कि हथियार है तो उसे नीचे रख दो.. मुझे लगा था कि वे लोग मुझे पीटेंगे… तब मैंने कहा कि मुझे गोली लगी है.. फौज वालों ने कहा कि गोली लगी है.. बच गये हो.. अब अच्छी जिंदगी जीना। हम यूं ही तुम्हें मरने नहीं देंगे। अस्पताल ले जाएंगे। तुम्हारे घर वाले भी तुम्हें देखेंगे तो खुश होंगे। माफी मांगनी होगी या तौबा करनी होगी तो उनसे करना।..


इसके बाद मुझे अस्पताल लाया गया.. मुझे नही पता कि मुझे जेल होगी या नही है लेकिन अब मुझे पता चल गया है कि हमारा असली दुश्मन कौन है? अब ठीक होते ही घर जाऊँगा और मैं मस्जिद में जाकर उन लोगो के खिलाफ जिहाद का एलान करुंगा जो मेरे जैसे लड़कों को गुमराह कर जिहादी बनाते हैं.. तो ये तो थी उस भटके हुए नौजवान की जिसने आतंकी की राह चलने का फैसला लिया था आतंकियों की असलियत पता चल गये और किस्मत थी कि वो बच गया.. ऐसे ना जाने कितने युवक इन जिहादियों के चक्कर में फंसकर अपनी जान गंवा बैठते हैं..


वैसे गृहमंत्री अमित शाह कश्मीर की स्थिति पर विशेष नजर बनाये हुए हैं. हाल ही अमित शाह जम्मू कश्मीर के दौर पर थे. पिछले कई सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब केंद्र के किसी बड़े नेता के घाटी के दौरे के दौरान अलगाववादियों ने बंद ना बुलाया हो, हिंसा ना हुई हो, विरोध ना हुआ हो.. कड़ी सुरक्षा के बीच आम नागरिकों का जीवन सामान्य था.