चिनूक हेलीकॉप्‍टर्स बढ़ाएंगे वायुसेना की ताकत,जानिए सारी Information

425

आपको हमने अपनी एक रिपोट में पहले ही बताया था की भारत ने अमेरिका से 15 चिनूक और 22 अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदने के सौदे को भारत ने मंजूरी दे दी थी.मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान करीब 19500 करोड़ रुपए के इस सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे..लेकिन अब ये विमान भारत आ गये है ..आज एक कार्यक्रम में चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्‍टर की पहली यूनिट को शामिल कर लिया गया।इससे वायुसेना की ताकत में और इजाफा हो गया, जब अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा बनाए गए चिनूक सीएच-47आइ हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया.


शुरुआत 1957 में हुई थी।
आपको बता दें कि बोइंग CH-47 चिनूक हेलीकॉप्‍टर डबल इंजन वाला है.. इसकी शुरुआत 1957 में हुई थी। और1962 में इसको सेना में शामिल कर लिया गया इसे बोइंग रोटरक्राफ्ट सिस्‍टम ने बनाया है..इसका नाम एक अमेरिकी मूल-निवासी चिनूक से लिया गया है। इसके साथ अमेरिका में चिनूक नाम कि एक गर्म हवा भी चलती है जो पहाड़ों पर जमी बर्फ को बहुत जल्दी पिघला देती है. यह हेलीकॉप्‍टर करीब 315 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है..इसकी शुरआत से लेकर अब तक कंपनी ने इसमें समय के साथ कुछ बदलाव भी किए हैं। और इसके वजन को कम किया गया। आज के समय में यह अमेरिका का सबसे तेज हेलीकॉप्‍टर में से एक है। फिलहाल यह दुनिया के सबसे भारी लिफ्ट चौपर में से एक है।


अब इस पर एयर मार्शल ने क्या कहा आपको ये भी बताते है
एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस मौके पर कहा कि चिनूक हेलीकॉप्टर सिर्फ दिन में नहीं, रात के वक्त भी मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। चिनूक का शामिल होना भी उसी तरह गेम चेंजर साबित होगा,’इस समय देश के सामने सुरक्षा से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियां हैं और मुश्किल जगहों के लिए इस तरह की क्षमता वाले हेलीकॉप्‍टर की जरूरत है और चिनूक को भारत की जरूरतों के लिहाज से तैयार किया गया है।


चिनूक हेलीकॉप्टर की खासियतें

पहले चिनूक ने 1962 में उड़ान भरी थी. यह एक मल्टीमिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है.

चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना की खास ताकत है. इसी चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था. वियतनाम से लेकर इराक के युद्धों तक शामिल चिनूक दो रोटर वाला हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर है.

भारत जिस चिनूक को खरीद रहा है, उसका नाम है सीएच-47 एफ है.

यह 9.6 टन वजन उठा सकता है, जिससे भारी मशीनरी, तोप और गाड़ियां लाने-ले जाने में सक्षम है.
खराब मौसम में भी ये हेलिकॉप्टर उड़ान भरने में सक्षम है. इस हेलिकॉप्टर की अधिकतम स्पीड 315 किमी प्रति घंटे है.


इन देशों के पास है चिनूक
फरवरी 2007 में पहली बार नीदरलैंड इस हेलीकॉप्‍टर का पहला विदेशी खरीददार बना था। उसने CH-47F के 17 हेलीकॉप्‍टर खरीदे थे। इसके बाद 2009 में कनाडा ने CH-47F के 15 अपग्रेड वर्जन हेलीकॉप्‍टर खरीदे थे। दिसंबर 2009 में ब्रिटेन ने भी इस हेलीकॉप्‍टर में अपनी रुचि दिखाई और 24 हेलीकॉप्‍टर खरीदे। 2010 में आस्‍ट्रेलिया ने पहले सात और फिर तीन CH-47D हेलीकॉप्‍टर खरीदे थे। 2016 में सिंगापुर ने 15 हेलीकॉप्‍टर का ऑर्डर कंपनी को दिया था। हालांकि 1994 से ही सिंगापुर के पास चिनूक हेलीकॉप्‍टर थे, जिसको CH-47D से बदल दिया गया था। अब तक कुल 26 देशों के पास ये हेलीकॉप्‍टर मौजूद है।


भारत के लिए इसके मायने
चिनूक के भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने से न केवल सेना की क्षमता बढे़गी बल्कि कठिन रास्ते और बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट को बनाने में भी इसका इम्पोर्टेन्ट रोले हो सकता है। ये हमारी सेना के लिए बहुत मददगार साबित होगा, क्योंकि इसकी मदद से भारी- भरकम गाड़ियों, तोपों और टैंकों को ऊंची जगहों पर भी आसानी से पहुंचाया जा सकेगा. साल 2018 में बोइंग की तरफ से इंडियन एयरफोर्स के पायलट्स और फ्लाइट इंजिनियर्स को शिनूक उड़ाने की ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है.

ट्रेनिंग पहले ही मिल चुकी थी, हेलीकॉप्टर अब मिल गए हैं. मतलब ज़रुरत हुई तो काम में अड़चन कोई नहीं आयेगी. सेना दिन पर दिन तैयार, और तैयार होती जा रही है. देश दिन पर दिन आगे, और आगे बढ़ता जा रहा है.