वायु सेना ने इन परिस्थितियों में की बालाकोट में एयर स्ट्राइक

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पुलवामा हमले के बाद वायु सेना ने जैश के ठिकानों में एयर स्ट्राइक कर के पूरी दुनिया को संकेत दे दिए कि ये न्यू इंडिया है जो आतंकवाद से लड़ाई के खिलाफ घर में घुसेगा भी और मारेगा भी. लेकिन क्या आपको पता है कि वो क्या परिस्थितियां थी जिनकी वजह से 26 फ़रवरी के दिन की गयी एयर स्ट्राइक से वायु सेना को इतनी बड़ी सफलता मिली. वायु सेना अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कह चुकी है कि उन्होंने उन कैम्पों को नेस्तनाबूत कर दिया जिनपर उन्होंने निशाना साधा था.

26 फ़रवरी सुबह पांच से छह मिराज विमान करीब 10 किलोमीटर तक एलओसी के अंदर जाते हैं और सुबह के तीन बजकर 27 मिनट में मिसाइल छोड़ देते हैं. ट्रेनिंग कैंप एलओसी से 65 किलोमीटर दूर था. विमानों की और मिसाइल कि रेंज 60 से 80 किलोमीटर थी लेकिन फिर भी वायु सेना ने एलओसी को क्रॉस किया और टारगेट को हिट किया.

इस ऑपरेशन में सुखोई विमान के बजाये मिराज विमानों को इस्तेमाल किया गया और वो इसलिए क्योंकि मिराज आसानी से लॉन्ग रेंज टारगेट्स को बहुत एक्यूरेसी के साथ अलग अलग तरह के बम और मिसाइल से हिट कर सकते हैं. साथ ही मिराज विमान कि स्पीड 2.2 मैक है, जो कि साउंड कि स्पीड से दोगुनी है वही सुखोई कि स्पीड मिराज से थोड़ी कम है और साथ ही सुखोई विमान का वजन भी थोड़ा ज्यादा होता है.

इस एयर स्ट्राइक में इस्तेमाल बम भी बहुत विशेष हैं. इस ऑपरेशन में मिराज विमान ने इस्राइली टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया था. बम का नाम था स्पाइस 200. इसे स्मार्ट बम भी कहा जाता है. ये बम दिवार में 60 सेंटीमीटर तक गड्ढा कर सकता है और फिर बिल्डिंग के अंदर जाकर ब्लास्ट कर सारे टारगेट्स हिट कर सकता है.

26 फ़रवरी के दिन भारत के लक ने भी भारत का भरपूर साथ दिया. भारत कि सिक्यूरिटी एजेंसीज को पता था कि पुलवामा हमले का जश्न मनाने जैश के टॉप 25 कमांडर के साथ 300 से 400 आतंकी बालाकोट में मौजूद होंगे जहाँ वे ये रणनीति भी बनायेंगे कि भारत पर आगे हमले कैसे किए जाए. इसी के चलते इंडियन सिक्यूरिटी फोर्सेज ने फुर्ती से एक्शन लिया और प्रिसिशन एयर स्ट्राइक करके जैश को भारी नुकसान पहुँचाया.

टॉप ऑफिसर्स भी कहते है कि एयर स्ट्राइक के दौरान परिस्थितियां ऐसी थी कि की वे भी सरप्राइज थे. सबसे पहले सिक्यूरिटी एजेंसीज को लगा था कि पुलवामा हमले के बाद भारत के दबाव से जैश बहुत सतर्क हो जायेगा. लेकिन जैश ने अपने टॉप लीडर्स और कैडरों को एक ही छत के नीचे पता नहीं क्या सोच के रखा था. और उसके बाद जो हुआ वो आप सब जानते हैं.

दूसरा, बालाकोट कि लोकेशन बिलकुल रिमोट थी. जैश ट्रेनिंग कैंप बालाकोट के जाबा हिलटॉप में था. जाबा जहाँ एयर स्ट्राइक हुई वो जगह सिविलियन पापुलेशन और मिलिट्री कैंप से बहुत दूर थी. जिससे यहाँ एयर स्ट्राइक करना और भी आसान हो गया. ऐसा इसीलिए क्योंकि भारत ने स्ट्राइक के बाद साफ़ तौर पर कहा कि ये स्ट्राइक नॉन मिलिट्री यानि असैन्य कार्यवाही थी. अगर ये कैंप सिविलियन पापुलेशन के बीच होता तो शायद वायु सेना जैश के कैंप पर एयर स्ट्राइक नहीं करती.

तीसरा, जैश का ट्रेनिंग कैंप सारी सुविधाओं से लेस था जैसे कि स्विमिंग पूल, रेसिंग ट्रैक, फायरिंग रेंज, सोशल मीडिया वॉर रूम और पता नहीं क्या क्या. भारत में दो महीनों में लोक सभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में जैश के कैडर और कमांडर वहां इसलिए इकट्ठे थे ताकि वो आगे के हमले कि प्लेनिंग कर सके. इससे भारत को एक अवसर मिल गया कि भारत अपनी आत्म रक्षा में आतंकवादी संगठनों पर कार्यवाही करे.

बालाकोट की स्ट्राइक एक बहुत बड़ी सफलता है. ऐसा इसीलिए क्योंकि इस ट्रेनिंग कैंप में बहुत ही एडवांस्ड ट्रेनिंग सुविधाएँ थी. यहाँ पर बहुत सारे बैरक्स थे जहाँ पर एक साथ करीब 200 आतंकवादी रह सकते थे. बहुत से ट्रेनर्स यहाँ आयी एस आई और पाकिस्तान आर्मी के पूर्व अफसर भी थे. सूत्र ये भी बताते हैं कि आतंकी मसूद अजहर और उसका भाई मुफ़्ती रौफ असग़र भी यहाँ बालाकोट के पांच सितारा कैंप में आते थे और सुसाइड बोम्बेर्स को मोटीवेट करते थे. इसके साथ मसूद कि वीडियो भी आतंकियों को दिखाई जाती थी.

जैश के दो आतंकियों से पूछताछ के दौरान नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी को पता चला कि बालाकोट ट्रेनिंग कैंप में नए आतंकवादियों को बहुत ही व्यापक तरीके से मोटिवेशनल, फिजिकल, मिलिट्री और टैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है. जिहादी सबसे पहले अपनी बेसिक ट्रेनिंग करते हैं जिसे दौरा-ऐ-आम कहा जाता है. इसके अंदर धार्मिक भावना भरना, ग्रेनेड फेंकना, एक्सप्लोसिव्स को संभालना और फिसिकल ट्रेनिंग होती है. इसके बाद ट्रेनिंग का लेवल बढ़ता है जिसे दौरे-ए-खास कहा जाता है. इसमें बड़े हथियारों को संभालना, IED को अस्सेम्ब्ल करना, सुरक्षा बालों के काफिले पर हमला करना , सुसाइड बम बनना, ऊँचाई पर बना रहना कि ट्रेनिंग होती है.

यहाँ तक की अमेरिकी सिक्यूरिटी एजेंसीज को भी बालाकोट कैंप के बारे में जानकारी है. अमेरिका ने हाफिज रहमान नाम का एक तालिबानी पकड़ा था जिसने पूछताछ के दौरान एजेंसीज को बताया था कि वो भी बालाकोट में ट्रेनिंग लेकर आया है.

खैर जो भी हो बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद इसका असर पाकिस्तान पर साफ़ देखा जा सकता है. हाफिज सईद से लेके तमाम आतंकवादी संगठनों पर पाकिस्तान सरकार बैन लगा चुकी है. अब कभी उनके प्रधानमंत्री शांति कि बात करते हैं तो कभी उनके विदेश मंत्री और आर्मी जेनेरल्स मीडिया को सफाई दे रहे हैं कि पाकिस्तान हर वो कदम उठाएगा जिससे पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों पर कार्यवाही होगी और दक्षिण एशिया में शांति बनी रहेगी.