कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की का ये दुश्म’न देश भारत से खरीदेगा इतने करोड़ डॉलर का हथि’यार

529

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजनीति करने में तो माहिर है. मोदी राजनीति में पूरी तरह से अपना लोहा मनवा रहें है. लेकिन इसी के साथ-साथ उनकी कूटनीति भी कम नहीं है. जहाँ पर राजनीति करनी होती है वहां पर राजनीति करते हुए नजर आते है और जहाँ पर कूटनीति की जरूरत होती है वहां पर कूटनीति से अपना काम करते है. पीएम मोदी सेना के हाथो को पिछले 6साल से मजबूती प्रदान करते आये है. इसी सिलसिले में उन्होंने मेक इन इंड़िया को आगे बढ़ाने के लिए ये कदम उठाया है.

भारत ने मेक इन इंड़िया को लेकर एक और उपलब्धि हासिल की है. रूस और पौलैंड को पछाड़ते हुए आर्मेनिया के साथ एक बड़ा रक्षा सौदा करने पर सफलता हासिल की है. इस करार के जरिए भारत रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा निर्मित 4 करोड़ डॉलर (करीब 290 करोड़ रुपये) के हथि’यार आर्मेनिया को बेचेगा.

सूत्रों के मुताबिक इस सौ’दे में ‘स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार’ सिस्टम शामिल है. इन हथि’यारों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किया गया है. इस जानकारी के मुताबिक, इसके लिए आर्मेनिया को रूस और पौलेंड ने भी ऑफर किया था. दोनों देशों ने ट्रॉयल का भी आयोजन किया, लेकिन आर्मेनिया ने भारत द्वारा बनाए गए सिस्टम पर भरोसा जताया और डील फाइनल कर ली है. दरअसल सौ’दे के मुताबिक भारत चार स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार की आपूर्ति करेगा, जो 50 किमी के रेंज में दु’श्मन के हथ‍ि’यारों जैसे मोर्टार, शेल और रॉकेट तेज, स्वचालित और सटीक तरीके से पता लगा लेता है. रडार एक साथ विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग हथि’यारों से दागे गए कई प्रोजेक्टाइल को पता लगा सकता है.

जो सौदा भारत अर्मेनिया के साथ कर रहा है. उसका उपयोग भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर इसी रडार का उपयोग कर रही है. सेना को 2018 में ट्रायल के लिए यह सिस्टम दिया गया था. अधिकारियों ने कहा कि इन हथियारों का निर्यात भारत को अपनी स्वदेशी प्रणालियों की बिक्री के लिए एक नया बाजार खोलने में मदद करेगा, जो कि उसके यूरोपीय और अन्य प्रति’द्वं’द्वियों की तुलना में सस्ता है. इससे दोनो देशों के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे.