विवादित नक़्शे में भारत के हिस्सों को अपना बताने के बाद अब नेपाल उठाने जा रहा भारत के खिलाफ बड़ा कदम

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अपने विवादित नक़्शे में भारत के तीन इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल करने के बाद भी नेपाल भारत से सुलह करने के मूड में नहीं है. नेपाल अब भारत के खिलाफ और आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है. उसने विवादित नक़्शे को संवैधानिक दर्जा देने की तैयारी शुरू कर दी है. आज नेपाल की संसद में विवादित नक्शा को मान्यता देने के लिए संविधान संशोधन बिल पर आज वोटिंग हो सकती है. नेपाल के कानून मंत्री शिव माया ने 31 मई को संसद में इस पेश किया था.

इस नक़्शे को संवैधानिक मान्यता देने के लिए संसद में संविधान संधोषण प्रस्ताव पर वोटिंग होगी. इसके लिए सरकार को दो तिहाई वोटों की जरूरत पड़ेगी. अगर कोई आपत्ति नहीं आती और बिल पास हो जाता है तो 72 घंटे के भीतर संविधान में संसोधन करके इसे संवैधानिक मान्यता दे दी जाएगी. नेपाल की संसद में कुल 275 सीटें है. नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के पास 174 सीटें है जबकि विपक्षी नेपाली कांग्रेस के पास 63 सीटें है. नेपाल के लिए ये अस्मिता का मामला है इसलिए ये बिल संसद में आसानी से पास हो जाएगा. नेपाली कांग्रेस ने पहले ही समर्थन का ऐलान कर दिया है.

भारत और नेपाल के बीच ये विवाद तब शुरू हुआ जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख में कैलाश मानसरोवर रोड का उद्घाटन किया. नेपाल दावा कर रहा है कि इस सड़क का 19 किलोमीटर का हिस्सा उसके क्षेत्र से गुजर रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि नेपाल लिपुलेख पर अपना दावा जता रहा है जबकि भारत सरकार ने साफ कर दिया कि ये सड़क पूरी तरह से उसके हिस्से में बना है और लिपुलेख भारत का अभिन्न हिस्सा है. इसके बाद नेपाल ने अपना नया नक्शा जारी किया और भारत के तीन इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपना हिस्सा बताते हुए अपने नक़्शे में शामिल कर लिया.