1967 न भूले चीन,भारतीय सैनिकों ने उतार दिया था जीत का न’शा, मा’रे गए थे इतनी चीनी सैनिक

6485

लद्दाख में भारत और चीन के बीच गतिरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा. चीन लद्दाख में दुस्साहस की ताक में है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना को यु’द्ध की तैयारी करने का आदेश दिया है. लेकिन इन सबके बीच सोशल मीडिया पर लोग चीन को 1967 की याद दिला रहे हैं. ट्विटर पर #chinaindiaborder और #IndiaChinaFaceOff ट्रेंड कर रहा है और लोग चीन को 1967 याद दिला रहे हैं. आखिर क्या हुआ था भारत और चीन के बीच 1967 में आइये जानते हैं.

भारत और चीन के बीच आखिरी भि’डंत 1967 में हुई थी. 1962 की हार का दंश झेल रहे भारत को अंदाजा भी नहीं था कि चीन फिर से ह’मला कर देगा लेकिन 5 साल बाद ही भारत ने चीन को सबक सिखा दिया था. बात उन दिनों की है जब सिक्किम पूर्ण रूप से भारत का हिस्सा नहीं बना था. वहां राजतंत्र था और भारत की सेना उन्हें सुरक्षा मुहैया कराती थी. चीन को ये बात हमेशा खलती थी. उसकी नज़र सिक्किम पर थी. इसलिए वो इस बात पर आपत्ति जताता कि भारत का हिस्सा न होने के बावजूद सिक्किम में भारतीय सेना क्यों है?

13 अगस्त, 1967, सिक्किम के नाथू ला में चीन ने बंकर बनाने के लिए गड्ढे खोदने शुरू कर दिए. भारतीय सैनिकों की नज़र इस पर पड़ी. उन्होंने देखा कि कई गड्ढे सिक्किम में भी खोदे जा रहे हैं. उन्होंने चीनी लोकल कमांडर से अपने सैनिकों को पीछे ले जाने को कहा. लेकिन वो नहीं माने तो उनके सामने भारतीय सैनिक भी अड़ गए. 1 अक्टूबर 1967 को नाथू ला से उत्तर की तरफ कुछ किमी दूर चो ला में दोनों सैनिकों के बीच भि’ड़ंत हो गई. इस भि’डंत में भारत के 88 सैनिक श’हीद हो गए. लेकिन इस भि’ड़ंत में चीन को बहुत नुकसान उठाना पड़ा. चीन के 400 सैनिक मा’रे गए और उसके 450 सैनिक घा’यल हो गए. भारतीय सैनिकों ने नाथू ला में चीनी सैनिकों के कई बंकर न’ष्ट कर दिए. चीनी सैनिकों को सिक्किम से पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा.

अब फिर चीन लद्दाख में दुस्साहस करने की कोशिश में है. इसलिए लोग उसे 1967 की याद दिला रहे हैं. लोगों का कहना है कि 1967 को न भूले चीन, ये तो 2020 है और उसे किसी भी हिमाकत की कीमत चुकानी पड़ेगी.