भारत ने सिखाया ऐसा सबक कि गिड़गिड़ाने लगा मलेशिया

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कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ दे कर मलेशिया इतनी बुरी तरह फंस गया है कि नाराज भारत को मनाने के लिए उसे अब गिड़गिड़ाना पड़ रहा है. दरअसल संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर पर मलेशिया के बयानों से नाराज हो कर पिछले महीने भारतीय व्यापारियों ने मलेशिया का बहिष्कार कर दिया और वहां से पाम ऑइल खरीदना बंद कर दिया. मलेशिया से आयात बंद करने के बाद भारत ने अपनी जरूरत पूरी करने के लिए इंडोनेशिया का रुख कर लिया. जिसके बाद मलेशिया के होश उड़ गए. बता दें कि मलेशिया के बाद इंडोनेशिया ही पाम आयल का सबसे बड़ा उत्पादक है.

भारत मलेशियाई तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. साल 2018-19 में मलेशिया की जीडीपी में भारत का 2.8 फीसदी का योगदान था और मलेशिया के कुल निर्यात में 4.5 फीसदी का योगदान था. लेकिन भारतीय व्यापारियों के बहिष्कार के बाद मलेशिया को बहुत अधिक नुकसान हो रहा है. अब नाराज भारतीय कारोबारियों को मनाने के लिए मलेशिया ने प्रति टन तेल खरीद पर 5 डॉलर की छूट की पेशकश की. भारतीय व्यापारियों को इंडोनेशिया से शिपमेंट की लागत 608 डॉलर बैठती है जबकि मलेशिया से शिपमेंट की लागत 603 डॉलर बैठती है.

आपको बता दें कि कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद मलेशिया के राष्ट्रपति महातिर मोहम्मद ने कहा था कि “भारत ने कश्मीर पर हमला कर के जबरदस्ती कब्ज़ा कर रखा है.” मलेशिया के इस बयान के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. मलेशिया के इस बयान से नाराज हो कर भारतीय व्यापारियों और रिफाइनरी ने मलेशिया से पाम ऑयल खरीदना बंद कर दिया. भारतीय व्यापारियों का कहना था कि हमें इंडोनेशिया से तेल खरीदना थोडा महंगा पड़ेगा लेकिन मलेशिया को सबक सिखाने के लिए हम नुकसान उठाने को भी तैयार है.

भारत के कुल खाद्य तेल आयात में पाम ऑयल की हिस्सेदारी दो-तिहाई है. भारत हर साल 90 लाख टन पाम ऑयल का आयात करता है. इनमे से भी 2 तिहाई अकेले मलेशिया से ही आयात होता है. इस साल के शुरूआती 9 महीनों में यानी कि सितंबर तक मलेशिया से पाम आयल आयत करने के मामले में भारत पहले नंबर पर रहा. इस अवधि में भारत ने 39 लाख टन पाम आयल खरीदा. मलेशिया को लगता है कि छूट देने से भारत के नाराज व्यापारी वापस उसके पास आ जायेंगे. लेकिन वो ग़लतफ़हमी में है.