चीन को भारत का जवाब, ताइवान के राष्ट्रपति के कार्यक्रम में शामिल हुए भारत के दो सांसद, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन

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भारत हर तरफ से अपने दोस्ती के रि’श्तों को निभा रहा है. चाहे फिर कोई भी देश हो. कोरोना के सं’कट के बीच भारत ने कई देशों की मदद करके ये साबित कर दिया है कि भारत एक सच्चे दोस्त की तरह सं’कट के समय में हमेशा साथ खड़ा है. फिर चाहे वो खुद कितने बड़े सं’कट से लड़ रहा है. लेकिन मुश्कि’ल दौर में वो सभी की मदद करने से पीछे नहीं हटेगा.

वही एक बार फिर इशा’रा मिल रहा है कि भारत अपनी दोस्ती बाकी देशों के साथ भी मजबूत कर सकता है. दरअसल त्साई इंग-वेन ने दो दिन पहले ताइवान के राष्ट्रपति पद की दोबारा शपथ ली. इस शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के दो नेता मीनाक्षी लेखी और राजीव कस्वान ने वीडियो कांफ्रे’स्सिंग के जरिये कार्यक्रम में हि’स्सा लिया. इनके अलावा दुनियाभर के 41 देशों के कुल 42 गणमा’न्य हस्ति’यों ने इस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रें’सिंग के जरिये हिस्सा लिया.

जिसके बाद से अब सवाल उठ रहे है कि अचानक से इन नेताओं का ताइवान के राष्ट्रपति शप’थ ग्र’हण समारोह में शामिल होने के पीछे क्या कारण है. दरअसल 2016 में जब त्साई ने पहली बार राष्ट्रपति पद की श’पथ ली थी तब मोदी सरकार ने न्योता मिलने के बावजूद अपने किसी सांसद को ताइवान नहीं भेजने का फैसला किया था. जिसके बाद चीन ने भी इस पर प्रतिक्रि’या देते हुए कहा कि हमें उम्मीद और यकीन है कि ताइवान की आजादी के लिए पृथकता’वादी गति’विधियों का चीन की जनता की ओर से विरो’ध किए जाने और राष्ट्री’य ए’कीकरण की मूल भावना का सम्मा’न करेंगे.

जाहिर है चीन ताइवान को अलग नहीं समझता है उसे वो अपने ही देश का हि’स्सा मानता है. जिसकी वजह से चीन ने ताइवान के राष्ट्रपति को बधाई देते हुए बाकी विदेशी नेताओं की निं’दा की है. गौरतलब है चीन और बाकी देशों के बीच कोरोना महामारी को लेकर काफी ज्यादा तना’व चल रहा है. जिसकी वजह से चीन अब उल’टे सीधे ब’यान देने से पीछे नहीं हट रहा है.