सुरक्षा के लिए सतर्क है सरकार

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पिछले दिनों भारत पर हुए आतंकी और हवाई हमले ने हलचल पैदा कर दी थी… भले ही भारत ने मुह तोड़ जवाब दिया था लेकिन इससे नुक्सान तो सबको हुआ था… इसलिए भारतीय वायु सेना अपने ताकत में इजाफा करना चाहती है… और सेना ने सरकार के पास रूस के 10 कामोव-31 हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए प्रस्ताव भेजा है..वैसे फाइटर विमानों की कमी देखते हुए भारत सरकार ने लगातार विवानों की खरीद जारी रखी है…

21 मिग-29 विमानों को खरीदने के बाद अब सरकार ने रूस के साथ 10, कामोव-31 चॉपर का सौदा भी कर लिया है. आपको बता दें कि इस विमान की खरीदारी में 3500 करोड़ रुपये का खर्चआने वाला है…यह जानकारी रक्षा मंत्रालय द्वारा दिया गया है…

गौरतलब है कि भारत सरकार ने इससे पहले रूस में बने 21 मिग-29 विमानों को सौदा किया है..मतलब की भरात ने रूस से पहले भी कई सौदे किए है…. एक अंग्रेजी वेब पोर्टल की खबर को मने तो भारतीय वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है, लेकिन अभी भारत के पास कुल 30 स्क्वाड्रन हैं… एक स्क्वाड्रन में करीब 16 से 18 फाइटर विमान होते हैं… उम्मीद की जा रही है कि भारत को पहला राफेल सितंबर 2019 में मिलेगा…. यही नहीं पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के दौर में भारत ने रूस से 464, T-90MS टैंक खरीदने का फैसला किया है….हालांकि केंद्र सरकार ने 13,500 करोड़ के इस रक्षा सौदे को मंजूरी दी है…..वैसे T-90MS नाम के जिस टैंक को रूस से खरीदने की बात चल रही है, वह रूसी टैंकों की क्लासिक T-90 फैमिली का सदस्य है…….. ये टैंक रात में भी दुश्मनों के ठिकानों पर हमला करने में सक्षम है……..

वैसे आपको बता दें कि एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल चॉपर्स खरीदने के लिए 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव लाने का फैसला किया है…. इन चौपेर्स की SPECIALITY यह है कि we काफी हलके है और इनका कण्ट्रोल काफी आसान है…. और साथ साथ इनका निशाना काफी सटीक होता है … जिससे दुश्मनों को मार गिराया जता है……. भारत की जरुरतों को ध्यान में रखते हुए इन चॉपर में कुछ बदलाव भी किए गए हैं….

इसके अलावा इंडियन कोर्स गार्ड के लिए छह समुद्री निगरानी विमानों के Acquisition मतलब की अधिग्रहण को लेकर भी एक उच्च-स्तरीय रक्षा मंत्रालय की बैठक हुई है… ये समुद्री निगरानी विमान सी-295 एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म पर आधारित है जो वायु सेना में एवरो ट्रांसपोर्ट विमानों को रिप्लेस कर सकते हैं….

एंटी-सबमरीन वॉरफेयर ऑपरेशन के लिए नौसेना के पास सीकिंग चॉपर्स के साथ-साथ रूसी कामोव-28 चॉपर का एक बेड़ा है, जो 1980 के दशक में ही खरीदे गए थेलेकिन अगर इससे फ्यूचर में इस्तेमाल करना है तो इनको अपग्रेड करने की बहुत आवश्यकता है। ऐसा देखा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने चुनाव का प्रभाव सेना के आधुनिकीकरण पर नहीं पड़ने दिया……. रक्षा अधिग्रहण परिषद और कैबिनेट कमेटी सुरक्षाबलों के लिए महत्वपूर्ण अधिग्रहण को लेकर सिक्यॉरिटी मीटिंग नियमित रूप से ही की जा रही है……बहरहाल यह देखते है कि भारत सरकार की इतनी बड़ी पहल हमारे सेना को कितना शक्तिशाली बनता है ..और इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि भारत सरकार द्वारा इसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर काफी गंभीर और फायदेमंद कदम उठाए जा रहे…..