G-7 समिट का सदस्य न होते हुए भी इस वजह से भारत को किया गया आमंत्रित

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G-7 समिट का भारत हिस्सा नहीं है. इसके बाद भी भारत को इसमें आमंत्रित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को G-7 समिट सम्मलेन में शामिल होंगे. पीएम मोदी रविवार को फ्रांस के बिआरिट्ज शहर पहुंचे गए है. फ्रांस ने इस बार सदस्य देशों के साथ- साथ उन देशों को भी आमंत्रित किया है जो दुनिया में राजनितिक में मजबूत स्थान में है और भारत का इस लिस्ट में पहले नंबर पर नाम है. अब सबके मन में ये सवाल उठना लाज़मी है कि G-7 सम्मलेन का भारत हिस्सा न होते हुए भी पीएम मोदी को सम्मलेन में क्यों शामिल किया गया. आइये हम आपको इसकी वजह बताते है.

दरअसल विदेश मंत्रालय ने बताया कि G-7 में भारत को न्यौता बड़ी आर्थिक शक्ति और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ निजी संबंध का सबूत है. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी जलवायु, वातावरण समुद्री सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर सेशन को संबोधित भी करेंगे. भारत को आमंत्रित करने की एक वजह ये भी है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से भारत का स्थान काफी अहम है. इसके साथ ही फ्रांस के साथ भारत के बेहतर संबंध भी है और इन्हीं वजहों से भारत को इस बार G-7 सम्मेलन में शामिल किया गया है. G-7 सम्मलेन में भारत के आलावा ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और दक्षिण अफ्रीका को भी बुलाया गया है. वहीं इस सम्मेलन में अफ्रीका के रवांडा और सेनेगल देश भी शिरकत करेंगे. हालांकि, G-7 के सदस्य देश है, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, इटली और अमेरिका.

वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमी और ट्रेड वॉर को लेकर बढ़ती चिंता को देखते हुए सभी जी-7 सदस्य देश चर्चा कर सकते हैं और कुछ महत्वपूर्ण निर्णय भी ले सकते हैं. इस सम्मलेन के दोरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मुलाकात हो सकती है और दोनों के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर बात होने भी पूरी संभावना जताई जा रही है. दरअसल अमेरिका कश्मीर मुद्दे पर भारत से बात करने काफी कोशिश कर रहा है. लेकिन भारत ने इसे आंतरिक मामला बता दिया है और किसी अन्य पक्ष को इसमें हस्तक्षेप करने के लिए साफ़ मना कर दिया है. G-7 समिट में भारत का शामिल होना ये दर्शाता है कि भारत सभी देशों के लिए कितना महत्वपूर्ण है. सभी देश भारत की ताकत को देख कर उसके साथ संबंधो को और मजबूत करना चाहते है. मोदी सरकार की विदेश नीतियों का ही ये असर है कि भारत आज दुनिया भर में छाया हुआ है. ये दमदार कुटनीतिक फैसलों का भी असर है कि सदस्य न होते हुए भी G-7 सम्मलेन में शामिल होने के लिए भारत को आमंत्रित किया गया है और ये भारत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.