जारी हुआ भारत का नया नक्शा, देख कर पाकिस्तान के उड़ जायेंगे होश

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जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 निरस्त करने और राज्य को दो भागों में बांटने के बाद पहली बार देश का नया राजनितिक नक्शा जारी किया गया. ये नक्शा सरदार पटेल की जन्मतिथि के अवसर पर 31 अक्टूबर को सर्वेयर जनरल ऑफ़ इंडिया की ओर से जारी हुआ. देश के इस नए नक़्शे से पाकिस्तान की नींद उड़ जायेगी तो चीन के माथे पर भी शिकन तो जरूर आएगी.

देश के इस नए नक़्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित- बाल्टिस्तान और चीन के कब्जे वाला अक्साई चीन लद्दाख के हिस्से में शामिल किया गया है जबकि पाकिस्तान के आब्जे वाले मीरपुर और मुज़फ्फराबाद को जम्मू- कश्मीर के दो जिलों के रूप में पहली बार शामिल किया गया है.

यूँ तो पहले भी भारत का नक्शा ऐसा ही होता था लेकिन मीरपुर और मुज़फ्फराबाद का स्पष्ट तौर पर ज़िक्र नहीं होता था. इस नए नक्शे में जम्मू-कश्मीर के हिस्से में कुल 22 जिले आये हैं जिनमे मीरपुर और मुज़फ्फराबाद भी शामिल है. जबकि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में दो जिले बनाए गए हैं लेह और कारगिल. पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित- बाल्टिस्तान, वजारत, चिल्हास, ट्राइबल टेरिटरी और पाकिस्तान की तरफ से चीन को तोहफे में सौंपे गए अक्साई को लेह जिले का हिस्सा बनाया गया है. हालाँकि नक़्शे में इन क्षेत्रों का अलग से जिक्र नहीं है.

साल 1947 में जब महाराजा हरी सिंह ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ मिलाने का फैसला किया तो  जम्मू- कश्मीर राज्य में कुल 14 जिले थे. जम्मू, उधमपुर, कठुआ, अनंतनाग, बारामुला, पूंछ, मीरपुर, मुज़फ्फराबाद, रियासी, गिलगित वजारत, गिलगित, चिल्हास, लेह और लद्दाख और ट्राइबल टेरिटरी.

31 अक्टूबर से पहले इनकी संख्या 28 हो गई थी लेकिन अब नए नक़्शे में जम्मू-कश्मीर में 22 जिले बनाए गए हैं. जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, डोडा, किश्तवार, रियासी, राजौरी, पूंछ, रामबन, कुलगाम, श्रीनगर, शोपियां, अनंतनाग, पुलवामा, बांदीपोरा, बारामुला, कुपवाड़ा, गांदरबल, बडगान, मीरपुर और मुज़फ्फराबाद. अब तक हम गिलगित बाल्टिस्तान को पाक अधिकृत कश्मीर यानी कि POK कहते थे लेकिन अब से इसे पाक अधिकृत लद्दाख यानी कि POL कहने की आदत डालनी पड़ेगी.

भारत का नया नक्शा चार देशों को छूता है- पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन और तिब्बत. अगर भविष्य में भारत पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाले लद्दाख के क्षेत्र को हासिल कर लेता है तो हम दिल्ली से वाया गिलगित बाल्टिस्तान अफगानिस्तान तक रोड ट्रिप पे भी जा सकते हैं. कश्मीर को लेकर जिस तरह से भारत सरकार की मौजूदा नीति है, उम्मीद करनी चाहिए कि वो दिन भी ज्यादा दूर नहीं है.