भारत के इस रणनीतिक कदम से पानी मांगता नजर आएगा चीन

“नापाक” पाकिस्तान के हमदर्द बने चीन की और से थाईलैंड के साथ मिलकर वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो कि अब तक हमारे भारत के लिए एक खतरे की घंटी थी। लेकिन कूटनीतिक स्तर पर ज़बरदस्त रणनीति के साथ फ्रंटफ्रंट पर खेल रही मोदी सरकार इस मोर्चे पर चीन को बुरी तरीके से पटखनी देने की फिराक में है।

भारत ने म्यांमार और थाईलैंड के साथ मिलकर चीन की बादशाहत को खत्म करने के इरादे से एक ऐसे प्रोजेक्ट की नींव रख दी है जिससे अब चीन की नींद उड़नी तय है।

आख़िर कैसा है ये प्रोजेक्ट आइए आपको बताते है।

मुद्दे की शुरुआत करे उससे पहले आप ये जान लीजिए की आख़िर वन बेल्ट वन योजना क्या है और उससे चीन भारत को क्या नुकसान पहुँचा रहा है। क्या है ये योजना वन बेल्ट वन बेल्ट,चीन की 10 खरब अमरीकी डॉलर की एक महत्वकांक्षी योजना है। जिसके तहत चीन सड़क, रेल,समुन्दर के जरिए दुनिया तक अपनी पहुँच बनाना चाहता है। चीन कहता है कि इस योजना से वो एशियाई देशों के साथ अपने संपर्क बेहतर करने के लिए और यूरोप अफ्रीका जैसे देशों को एशिया के करीब लाने के लिए इस प्रोजेक्ट को हर हाल में पूरा करना चाहता है। जबकि असल बात तो ये है कि उसका मकसद दूसरे देशों से सम्बंध स्थापित करना कम बल्कि नेपाल,म्यांमार जैसे देशो को आर्थिक मदद का लालच देकर भारत को घेरने का ज्यादा है। चीन पाकिस्तान के सहयोग से कश्मीर में तीसरी ताकत बनने की सोच रहा है और इसमें वन बेल्ट वन योजना उसका मुख्य हथियार है ।

पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह बनाना हो या थाईलैंड में सड़क बनाना,चीन ये सब करके भारत को घेरने की रणनीति पर लगातार काम कर रहा है। चीन का पिछला इतिहास भी उठाकर देखे तो उसकी रणनीति ही विकास के नाम पर कब्जा करने की ही रही है।

ख़ैर अब बात कर करते है की मोदी सरकार कैसे इनको जवाब देने की तैयारी कर रही है।

दरअसल भारत म्यांमार और थाइलैंड के साथ मिलकर 1360 किमीं.लम्बा एक हाईवे बना रहा है । भारत को तीन देशो से जोड़ने वाले इस हाइवे के लिए 1830 करोड़ की राशि मंजूर कर दी है। इस हाईवे के दो सेक्शन का निर्माण करेगा। इसके क्लेवा-यांग्यी (Kalewa-Yagyi) रोड सेक्शन के निर्माण के लिए भारत सरकार ने 193 करोड़ रुपए जारी किए हैं। सेक्शन में 120 किमीं. रोड सेक्शन होगा, जबकि 69 पुलों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा दूसरा सेक्शन 149 किलोमीटर तामू-कियोंग-क्लोवा सेक्शन होगा। इन दोनों सेक्शन के निर्माण में भारत सरकार की ओर से म्यांमार सरकार को वित्तीय सहायता दी जाएगी। बाकायदा इसके लिए भारत सरकार की ओर से 193.16 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी गई है।

भारत के लिए ये पुल न सिर्फ रणनीतिक बल्कि पर्यटन के लिहाज से फायदेमंद साबित होगा। नॉर्थ-ईस्ट के विकास में भी ये हाइवे अहम भूमिका निभाएगा। बताते चले की ये हाईवे मणिपुर के मोरेह से म्यांमार के तामू शहर तक जाएगा। इस हाईवे से जुड़ी दिलचस्प बात ये है की इसको महज़ तीन साल में बनाने का लक्ष्य रखा गया है। हाईवे के निर्माण से भारत से सीधे थाईलैंड तक का सफर रोड से तय किया जा सकेगा। इस हाईवे के बनने से म्यांमार और थाईलैंड में चीनी प्रभाव को कम किया जा सकेगा। दरअसल चीन लंबे अरसे से म्यांमार, थाईलैंड और बांग्लादेश के सहारे भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में चीन की ओर से थाईलैंड के साथ वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो कि भारत के लिए एक खतरे की घंटी थी। ऐसे में भारत ने म्यांमार और थाईलैंड के साथ मिलकर चीन की बादशाहत को खत्म करने के इरादे से इस प्रोजेक्ट की नींव रखी है। उम्मीद है भारत की इस रणनीतिक कूटनीति से चीन के हौसले पस्त ज़रूर होंगे।


चीन के नापाक मंसूबो को जानने के लिए देखे ये विडियो

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