दुश्मनी पर उतारू नेपाल लेकिन फिर भी भारत ने दरियादिली दिखाते हुए निभाया बड़े भाई का फर्ज, की मदद

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भारत वो देश है जो किसी की मदद करने से कभी पीछे नहीं हटता. फिर चाहे मदद कोई दोस्त मांगे या कोई दुश्मन. नेपाल और भारत के रिश्ते बहुत पुराने है. लेकिन इन दिनों दोनों देशों के रिश्ते बुरे दौर से गुजर रहे हैं. नेपाल ने अपना नया नक्शा जारी करते हुए भारत की जमीन के 395 वर्ग किलोमीटर हिस्से को अपना हिस्सा बताया और भारत पर अआरोप लगाया कि भारत ने उसके हिस्से को कब्ज़ा लिया है. उसके बाद नेपाल ने सीमा पर सड़क का निर्माण भी शुरू कर दिया. और नेपाल की तरफ से कोरोना के लिए भी भारत को जिम्मेदार बताया गया. नेपाल हर दिन भड़काऊ बयानबाजी करता है और अपनी समस्याओं के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरता है.

भले ही नेपाल भारत से दुश्मनी करने पर उतारू हो लेकिन जब मदद की जरूरत पड़ी तो नेपाल को भारत की ही याद आई. भारत ने भी बड़ा भाई होने का फर्ज निभाया और पिछली बातों को अलग रखकर नेपाल की मदद की. दरअसल ऑस्ट्रेलिया में फंसे एक नेपाली परिवार को मेडिकल इमरजेंसी आई तो नेपाल ने भारत से मदद मांगी. भारत ने भी बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए तुरंत मदद पहुंचाई. विदेशों से लोगों को ला रहे स्‍पेशल एयर इंडिया विमान से तीन नेपाली नागरिकों को दिल्‍ली लाया गया है.

जिन तीन नेपाली नागरिकों को भारत लाया गया है, उनमें से एक का दिल्‍ली में बोनमैरो ट्रांसप्‍लांट होना है. दूसरा शख्‍स मरीज का भाई है और वही बोनमैरो डोनेट कर रहा है. इनके पिता भी साथ आए हैं. भारत और नेपाल के रिश्ते बहुत पुराने हैं. नेपाल और भारत के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है. भारत ने नेपाली नागरिकों को भारतीय नागरिकों जितनी ही सुविधाएँ मिलती है. ऐसे में छोटा भाई नेपाल चाहे जितनी शैतानी करे. भारत ने बड़े भाई का फर्ज बखूबी निभाया.