अब इस तरह मंदी का मुकाबला करने जा रही हैं कंपनियाँ, ऐसे होगा फायदा

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भारत में अर्थव्यवस्था को लेकर इस समय बहस चल रही है लोग इसे मंदी कह रहे हैं.. मंदी कहते किसे है इसपर हम आगे बात करेंगे लेकिन अर्थव्यवस्था की रफ़्तार सुस्त हुई है. जिसके कारण कई कम्पनियों ने बड़े कदम उठाये हैं हालाँकि ये समय कम्पनियों के लिए किसी बड़े मौके से कम भी नही है, दरअसल ऐसा माना जा रहा है कि ईकोनॉमी की सुस्त रफ्तार के इस माहौल को कंपनियां कारोबारी विस्तार के मौके के तौर पर देख रही हैं। बिक्री में गिरावट के बावजूद ऑटोमोबाइल से लेकर मोबाइल हैंडसेट और रिटेल सेक्टर की कई कंपनियां विस्तार पर नए निवेश की योजनाएं लेकर सामने आई हैं। इनमें ऑटो सेक्टर की मारुति सुजुकी, मोबाइल हैंडसेट सेक्टर की वीवो और वन प्लस तथा अपैरल रिटेलिंग सेक्टर की वी-मार्ट जैसी कंपनियां शामिल हैं जिन्होंने इस दिशा में अपने कदम आगे बढ़ाए हैं. दरअसल माना जा रहा है कि इस माहौल में कम्पनियों के विस्तार से इंडस्ट्री में कॉम्पटीशन बढेगा और अंततः फायदा ग्राहकों को होने वाला है.

दैनिक जागरण में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार जानकार मानते हैं इससे उनके पास अधिक विकल्प बनेंगे. इंडस्ट्री एनालिस्ट और जुनिपर एडवाइजर्स के निदेशक श्रीनिवास रेड्डी मानते हैं, ‘इस तरह के कदम बाजार में नई मांग पैदा करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं.’यही वजह है कि अपनी कारों की बिक्री में बड़ी गिरावट का सामना कर रही मारुति सुजुकी न केवल नए उत्पादों में निवेश की रणनीति पर कायम है, बल्कि अपने गुजरात प्लांट में तीसरी उत्पादन लाइन के निर्माण कार्य को भी जारी रखे हुए है. मोबाइल हैंडसेट कंपनियों की रणनीति भी निवेश और विस्तार को बनाए रखने की है. वीवो इंडिया भी देश में एक नई मैन्यूफैक्चरिंग इकाई लगा रही है, जिस पर वह 3,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. साथ वीवो कम्पनी 10 वर्षों तक के लिए व्यापक प्लान भी बना रही है. इसके तहत कंपनी हैंडसेट निर्माण पर कुल 7,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी.

वन प्लस भी भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रही है, जानकारी के अनुसार ये निवेश एक हजार करोड़ रूपये का हो सकता है. कम्पनियों की नजर बढती मांग और त्योहारों के सीजन पर टिकी हुई हैं.. मांग को बढ़ाने में इस त्योहारी सीजन को कम्पनियाँ एक शुरुआती टिगर मान रही हैं. यही वजह मानी जा सकती है कि फैशन और लाइफस्टाइल रिटेल में छोटे शहरों में कारोबार करने वाली कंपनियां भी विस्तार के मोड में हैं. जानकारी के अनुसार देश के करीब 198 शहरों में 233 रिटेल स्टोर चला रही वी-मार्ट 60 नए स्टोर खोलने जा रही है.. खैर कम्पनियां अर्थ व्यवस्था की सुस्त रफ़्तार को एक अच्छे मौके के तौर पर भी देख रही हैं. अब बात करते है कि क्या होती है मंदी और क्या इस देश में मंदी है?

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ, विवेक कॉल कहते हैं भारत की अर्थव्यवस्था के विकास की रफ़्तार में सुस्ती ज़रूर आयी है लेकिन इसे मंदी नहीं कहेंगे. वो कहते हैं, “मंदी या रिसेशन का मतलब लगातार दो तिमाही में नकारात्मक विकास है. भारत की इकॉनमी में सुस्ती आयी है लेकिन नेगेटिव ग्रोथ नहीं हो सकता”. नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के अनुसार जून में ख़त्म होने वाली साल की पहली तिमाही में विकास दर में गिरावट से ये मतलब नहीं निकलना चाहिए कि देश की अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो गयी है. वो कहते हैं, “भारत में धीमी गति से विकास के कई कारण हैं जिनमे दुनिया की सभी अर्थव्यवस्था में आयी सुस्ती एक बड़ा कारण है.”

क्या होती है मंदी? दरअसल इस पर अभी भी अर्थशास्त्री बंटे हुए है अपने अपने हिसाब से इसकी परिभाषा बना लेते हैं. तकनीकी रूप से भारत की अर्थव्यवस्था लगातार दूसरी तिमाही में सुस्ती से आगे बढ़ी है यानी कुछ महीने से विकास की दौड़ में कमी आयी है लेकिन अगर इस वित्तीय वर्ष की अगली तीन तिमाही मतलब नौ महीने में विकास दर बढ़ती है तो इसे मंदी नहीं कहेंगे. इससे सामान्य प्रक्रिया में गिना जा सकता है. हालाँकि जीडीपी में आई गिरावट से विपक्ष के पास सरकार को घेरने का मौका जरूर मिल गया है. लगातार कई मुद्दों पर खुद अपनी किरकिरी करवा चुका विपक्ष अब जीडीपी में आई गिरावट की तरफ बड़ी उम्मीद से देख रहा है..उम्मीद इसी बात की कि मोदी सरकार को घेरने का मौका मिलने वाला है.. लेकिन सरकार ने भी पूरी ताकत के साथ जीडीपी की रफ़्तार बढाने की दिशा में काम पर लग गयी है.