मलखान सिंह के मशहूर डाकू बनने से लेकर आम आदमी बनने तक की कहानी

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6 फीट लंबा कद, खाकी वर्दी, चेहरे से बाहर निकलती मूंछे। कई सालों तक ये चेहरा मध्यप्रदेश के चंबल के इलाकों में खौंफ की तस्वीर बना रहा। जी हां ये मशहूर डाकू मलखान सिंह को कभी चंबल का शेर कहा जाता था…मलखान सिंह के गोलियों के तड़तड़ाहट से पूरा चंबल कांप उठता था.

एक तरफ जहाँ 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले के बाद से ही हर भारतवासी आतंकियों और उनके आका के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहा है..वहीं दूसरी तरफ बीहड़ों में कुख्यात रहे पूर्व डाकू मलखान सिंह ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि वे पाकिस्तान के साथ युद्ध के लिए तैयार हैं..डाकू मलखान सिंह ने कहा कि देश के सभी नेताओं को एकजूट बैठक कर, पाक के खिलाफ फैसला लेना चाहिए और पाकिस्तान के घर में घुसकर उसकी घज्जियां उड़ा देनी चाहिए..पुलवामा आतंकी हमले से आहत पूर्व दस्यु सरगना मलखान सिंह ने कहा कि एमपी में 700 बागी बचे हैं. अगर सरकार चाहे तो बिना शर्त, बिना वेतन के हम अपने देश के लिए बॉर्डर पर लड़ने-मरने को तैयार हैं….

दरअसल, कानपुर में मलखान सिंह शहीदों के श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के लिए आए थे. इस दौरान मलखान सिंह ने कहा कि पुलवामा में जो हमारे सैनिक शहीद हुए हैं, उसको लेकर हमारा खून खौल रहा है..हम अनाड़ी नहीं हैं..हमसे लिखवा लिया जाए कि हम मारे जाएं तो कोई जुर्म नहीं। बचा हुआ जीवन हम लगाने को तैयार हैं। अगर इसमें पीछे हट जाए तो नाम मलखान सिंह नहीं है।

अरसे पहले आत्मसमर्पण कर चुके मलखान सिंह ने कहा कि अगर उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट मिला, तो वे जरूर चुनाव लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव होंगे और होते रहेंगे लेकिन पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला जरूर लेना चाहिए। अगर अब कश्मीर पर फैसला नहीं लिया गया तो कोई भी राजनीती पर विश्वास नहीं करेगा..ये तो रही खबरों की बात लेकिन यहां आपको ये भी बता दें की मलखान सिंह का इतिहास क्या रहा है, बता दें की मलखान सिंह एक समय में आंतक का दूसरा नाम हुआ करते थे लेकिन उन्होंने 1982 में आत्मसमर्पण कर लिया था..और उसके बाद से वो आम आदमी बन गए थे.

आईए जानते है उनके आम आदमी बनने की कहानी

एक समय था जब मलखान सिंह के नाम से पूरा चंबल हिल उठता था, मलखान सिंह पर हत्याओं और डकैती के हजारों मामले दर्ज थे। मलखान सिंह के डकैत और फिर डकैत से सामान्य आदमी बनने की कहानी दिलचस्प है। मलखान सिंह ने अपने गांव के सरपंच पर आरोप लगाया था कि उसने मंदिर की जमीन हड़प ली।

युवा मलखान ने जब इस घटना का विरोध किया तो सरपंच ने उसे गिरफ्तार करवा दिया और उसके मित्र की हत्या करवा दी। कहा जाता है कि वह सरपंच एक मंत्री का करीबी था और पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकती थी। विरोध स्वरूप मलखान सिंह ने राइफल उठा ली और खुद को बागी घोषित कर दिया। मंदिर की 100 बीघा जमीन को मंदिर में मिलाने के लिए उन्होंने हथियार उठाए थे। उस दौरान वे पंच भी थे।

कहा जाता है कि पूर्व डाकू मलखान सिंह के गिरोह में करीब डेढ़ दर्जन लोग थे। गिरोह में शामिल लोग उनके गांव और आस- पास के इलाके में रहने वाले लोग थे। 1980 के दशक में मलखान सिंह ने अपने गिरोह के अन्य साथियों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसर्मपण कर दिया। 70 के दशक में चंबल घाटी के गांवों में आतंक का पर्याय बन चुके मलखान सिंह को पकडऩा पुलिस के लिए नामूमकिन सा था। उससे भी ज्यादा उसे पकडक़र जेल में रखना मुश्किल था। मलखान ने करीब 1983 तक चंबल घाटी पर राज किया। आत्मसर्मपण के बाद उसे भूदान आन्दोलन के जरिए मिली जमीन भी दी गई, ताकि वह आम आदमी के रूप में अपना गुजर-बसर कर सके।

मलखान सिंह ने पंचायत चुनाव लड़ा था और इसमें जीत भी हासिल की थी। वहीं वर्ष 2014 के चुनावों में मलखान ने बीजेपी और नरेन्द्र मोदी के पक्ष में यह कहते हुए चुनाव प्रचार किया था कि वह कांग्रेस के राज में डकैत बनने के लिए बाध्य हुआ था। 15 साल से अधिक समय तक चंबल घाटी में आतंक मचाने के बाद मलखानसिंह ने तीन दशक पहले अर्जुन सिंह सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था और अब वे बंदूक छोड़ आध्यात्मिक मार्ग अपना चुके हैं।

साढ़े तीन दशक पहले चंबल के बीहड़ में आतंक फैलाने वाले मलखानसिंह खुद को डाकू कहना गलत बतलाते हैं। मलखान सिंह के अनुसार वे अन्याय के खिलाफ बगावत करते हुए बागी हुए थे।

कहा जाता है कि पहले आमतौर पर मलखान सिंह जिधर से भी गुजरता था, वहां से लोग भाग खडे होते थे। इसके बाद आत्मसम्र्पण के चलते धीरे-धीरे मानसिंह की छवि लोगों के बीच में सेलिब्रिटी की हो गई और लोगों में से डर खत्म हो गया.