भारत-भूटान की दोस्ती से इसलिए चिढ़ता है चीन? जानिये वजह

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प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में भूटान के दौरे पर गये थे..कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद पीएम मोदी का ये दौरा बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और अगर इस दौरे को चीन के लिहाज से देखा जाए तो इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. चीन हमेशा से कोशिश करता आया है कि चीन और भूटान की नजदीकियां बढ़ें लेकिन भूटान का झुकाव हमेशा से भारत की तरफ रहा है. इतना ही नही चीन को भारत और भूटान की दोस्तों भी खटकती है. भारत और भूटान की दोस्ती को और करीब लाने में 1949 में हुई इस संधि का बड़ा योगदान रहा है। इस संधि के तहत भूटान को अपने विदेशी संबंधों के मामले में भारत को भी शामिल करना होता है.

हालाँकि साल 2007 में इसमें बदलाव किया गया मतलब संसोधन किया गया कि जिन विदेशी मामलों में भारत सीधे तौर पर जुड़ा होगा, उन्हीं में भूटान भारत सूचित करेगा। यही नहीं, इस संधि से दोनों देश भारत और भूटान  अपने राष्ट्रीय हितों से संबंधित मुद्दों पर एक दूसरे के साथ घनिष्ठ सहयोग करने तथा एक दूसरे की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के विरुद्ध अपने क्षेत्रों का उपयोग न करने देने के लिए प्रतिबद्ध होंगे. यही वजह है कि चीन को ये दोस्ती हमेशा से खटकती रही है.

हिमालय की गोद में बसे भूटान की आबादी 8 लाख है. भूटान की वित्तीय और रक्षा नीति पर भी भारत का प्रभाव है. इतना ही नहीं भूटान अपना 98 फीसद निर्यात भारत को करता है और करीब 90 फीसद सामान भी भारत से ही आयात करता है. भारतीय सेना  भूटान की शाही सेना को ट्रेनिंग में देती रही है ये भी एक वजह है जिसकी वजह से चीन को भारत और भूटान की दोस्ती खटकती है और इससे चीन परेशान भी होता है.

डोकलाम के विवाद में भी इन तीनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है. भारत और भूटान की 699 किलोमीटर लंबी सीमा मिलती है. डोकलाम जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है. ये वही क्षेत्र है जो भारत को सेवन सिस्टर्स नाम से मशहूर उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ता है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण भी है.

2001 में भारत ने भूटान, नेपाल, बांग्लादेश व म्यांमार को जोड़ने के लिए सासेक (साउथ एशियन सब रीजनल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन) कॉरिडोर शुरू किया था। इंफाल से मोरेह (म्यांमार) को जोड़ने वाले इस मार्ग को पूर्वी एशियाई बाजार के लिए भारत का प्रवेश द्वार माना जा रहा है।  चीन की महत्वकांक्षी ओबीओआर परियोजना के जवाब में भारत यह परियोजना लेकर आया है.

 ऐसे में भारत और भूटान में की दोस्ती में चीन को दर्द होना तो लाजमी है. भूटान की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भूटान ने सद्भाव, एकजुटता और करुणा की भावना को समझा है। यह भावना मुझे उन बच्चों में दिखाई दी जो मेरा स्वागत करने के लिए सड़कों पर कतारबद्ध थे। उनकी मुस्कान मुझे हमेशा याद रहेगी।’