भारत का नाम इंडिया क्यों ? संविधान से इंडिया हटाने को लेकर कल सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

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भारत को हम कई नामों से पुकारते हैं. कभी भारत कहते हैं तो कभी इंडिया तो कभी हिंदुस्तान. भारत दुनिया का ऐसा एकमात्र ऐसा देश है जिसके तीन नाम है. लेकिन सिर्फ भारत का नाम ही तीन क्यों? अमेरिका को अमेरिका ही कहते हैं. जापान को पूरी दुनिया जापान ही कहती है, चाइना को पूरी दुनिया चाइना ही कहती है तो फिर भारत को इंडिया क्यों कहा जाता है? और हम भारतीय ही भारत को कभी कभी हिंदुस्तान के नाम से भी संबोधित करते हैं. इसी सवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिस पर आज सुनवाई होनी थी लेकिन ये सुनवाई कल तक के लिए टल गई है. अब इस याचिका पर चीफ जस्टिस की बेंच बुधवार को सुनवाई करेगी.

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन कर इंडिया शब्द हटा दिया जाए. अभी अनुच्छेद 1 कहता है कि भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा. इसकी जगह संशोधन करके इंडिया शब्द हटा दिया जाए और भारत या हिन्दुस्तान कर दिया जाए. देश को मूल और प्रमाणिक नाम भारत से ही मान्यता दी जानी चाहिए. याचिका में ये भी कहा गया है कि इंडिया नाम गुलामी का प्रतीक है. इंडिया हटा कर देश का नाम भारत करना यह हमारी राष्ट्रीयता, खास तौर से भावी पीढ़ी में गर्व का बोध भरने वाला होगा.

नाम के मामले में भारत से लेकर हिंदुस्तान होते हुए इंडिया तक का सफ़र काफी दिलचस्प है. जब महाराजा भरत ने देश का विस्तार किया तो उनके नाम पर इसका नाम भारत पड़ा. फिर मध्य काल में तुर्क और ईरानी सिन्धु घाटी के रास्ते भारत आये. वो ‘स’ का उच्चारण ‘ह’ किया करते थे. उन्होंने सिन्धु को हिन्दू कहना शुरू किया और देश का नाम हिंदुस्तान हो गया. जब विदेशी आये तो उन्होंने सिन्धु नहीं को इंडस कहना शुरू किया और सिन्धु घाटी सभ्यता इंडस वैली सिविलाइजेशन कहलाई. लैटिन भाषा में इंडस इंडिया हो गया. अब कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी कि भारत को इंडिया कहना बंद किये जाए.