भारत की इकॉनोमी पांचवे स्थान से गिरकर सातवें तक पहुंची, सरकार ने बुलाई आपात बैठक

402

मोदी सरकार के दुसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए वित् मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले पांच सालों में देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा था . इस घोषणा के कुछ ही दिनों बाद विश्व बैंक ने 2018 की रैंकिंग जारी की . इस रैंकिंग के नतीजे उत्साह पैदा करने वाले नहीं बल्कि ऐसे हैं जिससे मोदी सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें आ जायेंगी और उन्हें विपक्ष के कई सवालों के जवाब देने पड़ेंगे .

विश्व बैंक द्वारा जारी वित्त वर्ष 2018 के आंकड़ों के मुताबिक भारत दुनिया की शीर्ष 5 अर्व्यवस्था की लिस्ट से बाहर हो गया है .जीडीपी के मामले में भारत पांचवे स्थान से गिरकर सातवें स्थान पर पहुँच गया है जबकि ब्रिटेन और फ़्रांस क्रमशः चौथे और पांचवे पर हैं . साल 2017 की रैंकिंग में भारत ने फ़्रांस और ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया था . पहले स्थान पर अमेरिका बना हुआ है जबकि एशिया में भारत का प्रतिद्वंदी चीन ने अपना दूसरा स्थान बरक़रार रखा है . जापान तीसरे नंबर पर बना हुआ है और जर्मनी ने अपना चौथा स्थान बरक़रार रखा है .

2017 में भारत की GDP 2.65 ट्रिलियन डॉलर थी, 2018 में ये बढ़कर 2.72 ट्रिलियन डॉलर हो गई लेकिन भारत की जीडीपी में शीर्ष 5 देशों की तुलना में बहुत ही मामूली बढ़ोतरी हुई . अक्सर हम एशिया में अपनी तुलना चीन से करते हैं . अगर इस तुलना को देखें तो चीन की अर्थव्यवस्था 13. 60 ट्रिलियन डॉलर है .

2025 तक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लिए जीडीपी में सालाना 8 प्रतिशत के ग्रोथ की जरूरत है लेकिन 2018-19 में जीडीपी में ग्रोथ 6.8 प्रतिशत की रही . ये ग्रोथ पिछले 5 सालों में सबसे कम रही .आर्थिक सर्वे के मुताबिक़ पिछले 5 सालों में आर्थिक विकास की दर औसत 7.5 फ्रातिशत रही .

अब सवाल ये उठता है कि जब केंद्र सरकार अब तक ये दावा करती आ रही है कि देश की अर्थव्यवस्था में सबकुछ अच्छा चल रहा है तो फिर अचानक से इतनी बड़ी गिरावट कैसे आ गई ? आर्थिक विश्लेषक इस बारे में बताते हैं कि 2017 में डॉलर के मुकाबले रूपया 3 प्रतिशत मजबूत हुआ लेकिन 2018 में इसमें 5 प्रतिशत की गिरावट आई . मुद्रा में उतार चढाव के कारण ग्रोथ में सुस्ती आई और इस कारण रैंकिंग में गिरावट आई . एशियन डेवलपमेंट बैंक ने जुलाई मे कहा था कि भारत का वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान भारत के आर्थिक विकास की दर 7 फीसदी रह सकती है जबकि 2020-21 के दौरान 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था .

रैंकिग गिरने की खबर से खलबली मचनी थी और मची भी. विपक्ष पिछले कई दिनों से अर्थव्यवस्था की ख़राब स्थिति को लेकर बातें कर रहा है . दो दिनों से शेयर मार्केट में भारी गिरावट जारी है . विदेशी निवेशकों की ओर से जारी बिकवाली के चलते घरेलू शेयर बाजार में आई तेज गिरावट और फिर अर्थव्यवस्था में भारत की रैंकिंग गिरने के बाद सरकार हरकत में आई और पीएमओ में बड़ी बैठक बुलाई गई . सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी विदेशी निवेशकों को राहत देने के लिए सरकार सरचार्ज के फैसले पर बड़ा कदम उठाया जा सकता है. साथ ही, प्राइवेट लिस्टेड कंपनियों को पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के फैसले से छुटकारा मिल सकता है.

बजट में 2 करोड़ रुपये और 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई पर सरचार्ज लगाने का ऐलान किया गया था…. इसके बाद सरचार्ज के दायरे में के बाद FPI ने बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया … इससे चिंतित सरकार फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) को सरचार्ज से जल्द राहत देने पर विचार कर रही है …

सरकार अर्थव्यवस्था पर नज़रें जमाये हुए हैं और आने वाले दिनों में सरकार कुछ बड़े फैसले ले सकती है …