बौखलाया चीन दे रहा युद्ध की धमकी, लेकिन भारत ने रचा है ऐसा चक्रव्यूह कि चीन का निकलना मुश्किल

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जानबूझ कर कोरोना फैलाने के आरोपों से घिरा चीन पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ चुका है. लगभग हर देश के साथ उसने तनाव मोल ले लिया है. चाहे अमेरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो, ताइवान हो या भारत. हर तरफ से घिर चुका चीन बौखला गया है और इसलिए प्रेशर पॉलिटिक्स का इस्तेमाल कर रहा है और युद्ध की धमकियाँ दे रहा है. लेकिन भारत ने भी चीन के इर्द गिर्द एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है जिससे चीन का निकलना बहुत ही मुश्किल है. चीन के लिए सबसे ख़राब स्थिति है कि उसके खिलाफ कई देश अब गठबंधन बनाने लगे हैं. और यही चीन की बौखलाहट का कारण है. आइये एक नज़र डालते हैं कि किस तरह चीन के चारो तरफ भारत ने तैयार कर दिया है चक्रव्यूह.

LAC पर मजबूत होता भारत

भारत अब 1962 के दौर को पीछे छोड़ दिया है. उस वक़्त भारत को अंदाजा नहीं था कि चीन गद्दारी करेगा. लेकिन अब भारत चीन की मक्कारी से भलीभांति परिचित है और सतर्क है. इसके अलावा भारत ने अब LAC पर अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत ही मजबूत कर लिया है. अब भारत के पास अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और सैनिक साजो सामान पहुँचाने वाले ग्लोबमास्टर जैसे विमान है. भारत ने चीन से लगती सीमाओं पर सड़कों का जाल बिछा दिया है और चीन के हर दुस्साहस का जवाब देने को तैयार है.

WHO में भारत को बड़ा पद, अब होगी चीन की जांच

कोरोना को लेकर WHO भी दुनिया के निशाने पर है. उसपर चीन के साथ सांठ-गांठ के आरोप लग रहे हैं. अमेरिका तो WHO पर बुरी तरह से भड़का हुआ है. ऐसे में WHO के एग्‍जीक्‍यूटिव बोर्ड की कमान भारत के हाथ में आ चुकी है. दुनिया के कई देशों ने मांग की है कि कोरोना फैलने के मामले में चीन की जवाबदेही तय की जाए. उसने शुरू से ही बातें छुपाई और दुनिया को गुमराह किया. 62 देशों ने चीन के खिलाफ जांच मांग की है. भारत भी उन देशों में शामिल है जो चीन की जांच का पक्षधर है. भारत ने तो उस प्रस्ताव पर साइन भी कर दिया है. अब जांच के बाद चीन की असलियत सामने आ सकेगी.

ताइवान से नजदीकी बढाता भारत

बीते दिनों साइ इंग-वेन ताइवान की नयी राष्ट्रपति निर्वाचित हुई. उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत के दो सांसद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शामिल हुए. दिल्ली से बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी और राजस्थान के चुरू से सांसद राहुल कासवान ने इसमें तकनीक के जरिए शिरकत की थी और उन्हें दूसरे कार्यकाल की बधाई दी थी. भारत का ये कदम चौकाने वाला था. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. चीन का कहना है कि ताइवान एक राष्ट्र दो सिस्टम के तहत उसका हिस्सा है. भारत ने भी उसकी बात मानते हुए ताइवान के साथ कभी कूटनीतिक सम्बन्ध नहीं बनाये. लेकिन इस बार भारत ने अपना स्टैंड बदल लिया. भारत के इस कदम से चीन को मिर्ची लग गई. ताइवान के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में 41 देशों की 92 हस्तियों ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शिरकत की. ताइवान हमेशा से अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए संषर्ष कर रहा है. साइ इंग-वेन ने दूसरी बार राष्ट्रपति का पद संभाला है. वू ताइवान ककी आज़ादी की समर्थक है और उन्हें अमेरिका का भी समर्थन प्राप्त है.

चीन से बाहर निकल रही कंपनियां

कोरोना संकट के बाद से 1000 कम्पनियाँ चीन छोड़ कर भारत आने को तैयार है. इन कंपनियों की भारत सरकार के साथ बातचीत चल रही है. लावा मोबाईल और एक जर्मन फुटवियर कंपनी ने तो भारत में अपने प्लांट लगाने का ऐलान भी कर दिया है. चीन से अपना कारोबार समेटने वाली कंपनियां भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रही हैं. इसके अलावा अमेरिका ने भी चीन से अपनी कंपनियों को वापस बुलाने वाला बिल पास किया है. आर्थिक मोर्चे पर भी चीन घिर चुका है. ऐसे में उसका बौखलाना समझ में आता है.

दक्षिणी चीन सागर में चीन की दादागिरी के खिलाफ दुनिया की एकजुटता

साउथ चाइना सी में चीन अपनी दादागिरी दिखाने से बाज नहीं आ रहा. साउथ चाइना सी पर चीन अपना कब्ज़ा मानता है और उसने कई इलाकों के नाम बदलने शुरू कर दिए. चीन के पड़ोसी देश फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई साउथ चाइना सी पर चीन के दावे को नकारते हैं. इस टकराव के बीच अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया के युद्धपोत साउथ चाइना सी में पहुँच गए. इंडोनेशिया ने दक्षिणी चीन सागर में मौजूद एक द्वीप पर अपने लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया है.