लद्दाख बॉर्डर पर लगातार तनाव बनाने के बाद चीन ने कही ये बड़ी बात

भारत और चीन के बीच लद्दाख छेत्र में तनाव जारी है. दोनों देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं लेकिन चीन का ये प्लान था की भारत के उपर दबाव बनाकर उसके इस छेत्र पर कब्ज़ा कर लें लेकिन शायद चीन ये बात भूल गया है कि ये भारत 1962 का भारत नहीं हैं. अब ये भारत वो भारत है जो बराबर की टक्कर देने का मादा रखता हैं. इन सबके बीच शनिवार को लद्दाख में इस तनाव को लेकर दोनों देशों के बीच बात होनी हैं.

इन दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत होनी है. लेकिन उससे पहले चीन की तरफ से बयान आया हैं कि वो भारत के साथ बात कर के मसला सुलझाने को तैयार हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने शुक्रवार को बयान दिया कि ‘भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर हालात काबू में हैं और स्थिर हैं. दोनों देशों के पास बॉर्डर पर बात करने का मैकेनिज्म है और सेना की बातचीत और डिप्लोमेटिक रास्ते से दोनों मुद्दे को सुलझा सकते हैं.’चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ‘हम शनिवार को होने वाली बातचीत में अहम मसलों पर चर्चा के लिए तैयार हैं. दोनों देशों के बीच होने वाली ये बातचीत लद्दाख के चुशूल इलाके में होगी.’

ये जो बातचीत दोनों देशों के लेफ्टिनेंट लेवल की बीच होगी. इस वार्तालाप में भारत की तरफ से 14 कॉर्प्स के लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भारत का पक्ष रखेंगे. भारत और चीन के बीच बात होगी लद्दाख के पास पेंगोंग, गलवान और डेमचोक इलाके के पास आ चुकी चीनी सेना को वापस भेजने के लिए. भारत की तरफ से प्रस्ताव क्या रखा जायेगा ये तय नहीं हैं लेकिन हाँ ये बात साफ़ है कि भारत एक भी कदम पीछे नहीं हटेगा. क्योंकि भारत पहले ही अपना सख्त रुक अख्तियार कर चूका हैं और उसने पहले ही साफ़ कर दिया है कि वो पीछे नहीं हटेगा.

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