चीन को लगा और एक और झटका, अमेरीका के बाद अब ये देश आया भारत के साथ

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कोरोना वायरस के महासंक’ट के बीच चीन ड्रैगन ने फुफकारना शुरू किया हैं. क्योकि उसको लग रहा है कि भारत अभी कोरोना वायरस की चपेट में है और वो अभी अपनी सीमा को लेकर ध्यान नहीं दे पायेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और दूसरी तरफ हिन्द महासागर में दो देश भारत और ऑस्ट्रेलिया अब साथ खड़े हुए नजर आ रहे हैं. आज भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्चुअल शिखर बैठक भी शुरू हो चुकी हैं.

बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि ‘भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने सम्बन्धों को व्यापक तौर पर और तेज़ गति से बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. यह न सिर्फ़ हमारे दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इंडो पेसिफिक  क्षेत्र और विश्व के लिए भी आवश्यक है.’ इस वर्चुअल बैठक में आज पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन एक महतवपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं.

आज दोनों के बीच जिस समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं. उसमे दोनों देश एक दुसरे के सैन्य ठिकानो का इस्तेमाल कर सकते हैं. उधर दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से ग्रुप-7 देशो की जगह पर नया वैश्विक मंच बनाने को लेकर प्रस्ताव पर बात होने को लेकर कयास लगाए जा रहें हैं. इसको लेकर ट्रम्प ने पीएम मोदी से बात करके नए मंच में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया और दो और देशों को शामिल करने का प्रस्ताव किया है.

कोरोना वायरस महामा’री जो की चीन की देन है. इन सबके बीच चीन ने ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों को घेरने की कोशिश की थी. जबकि चीन ने भारत की लद्दाख के गलवान इलाके में चीन ने अपने 5 हज़ार सैनिकों को भारत की ज़मीन को कब्ज़ा करने के लिए वहां पर तैनात कर रखा हैं. कोरोना वायरस की बीच में चीन भारत के लद्दाख से लेकर सिक्किम तक घुसपैठ करने के फिराक में था. कुछ ऐसा ही चीन ने ऑस्ट्रेलिया के साथ भी करना चाह था.

लेकिन चीन अपने मंसूबे पुरे नहीं कर पाया और अब भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देश चीन को सबक सिखाने के लिए एक साथ खड़े नजर आ रहें हैं. आज दोनों देशों के बीच सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने को लेकर एक समझौता होने जा रहे हैं. इस समझौते का फायदा यह होगा कि भारत अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित अपने नौसैनिक अड्डे का इस्‍तेमाल करने की सुविधा ऑस्‍ट्रेलिया को देगा.

वहीँ दूसरी ओर ऑस्‍ट्रेलिया इंडोनेशिया के पास स्थित अपने कोकोज द्वीप समूह पर स्थित नेवल बेस को भारत के लिए खोल देगा. इससे दोनों देशों की नेवी हिंद महासागर में स्थित मलक्‍का स्‍ट्रेट और आसपास के इलाके पर कड़ी नजर रख सकेगी. मलक्‍का स्‍ट्रेट के रास्‍ते ही चीन का बहुत सारा सामान अफ्रीका और एशिया के देशों में जाता है. यही वजह है की चीन यहाँ पर अपना दबदबा बनाना चाहता है. लेकिन अब ऐसा कर पाना चीन के लिए मुश्किल है.