गरीबी से मुक्त होने की तरफ भारत ने बढ़ाए कदम

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बड़े बड़े मंचो से तमाम सियासी पार्टियां देश को खुशहाल बनाने का वादा करती है। वो बात दूसरी की मंच से किए गए वादों की वैलिडिटी बस सीट मिलने तक ही रहती है,उसके बाद नेताजी भी गायब हो जाते है और उनके वादे भी,।लेकिन पिछले पांच सालों में  इस मामलों में थोड़ा सुधार देखने को मिला है। सांसदों पर टॉप लेवल से बनाया गया दबाव कह लीजिए या फिर खुद सांसदों द्वारा समाज मे काम के प्रति पहल करना,कारण कुछ भी रहा हो लेकिन फिलहाल सामने आए ताज़ा आंकड़ो पर गौर करे तो भारत जल्द ही गरीबी को पूरी तरह टाटा बाय बाय कर देगा। 

चौंक गए क्या ???  ह्म्म्म आपके चौंकने की वजह भी बड़ी साफ है क्योकि 2011 में गरीबी को लेकर आंकड़ा जारी हुआ था जिसमे बताया गया था कि भारत मे करीब 30 प्रतिशत लोग गरीब है।  ना जाने 6-7 साल में ऐसा क्या हो गया जिससे गरीबी दूर होने की खबरे आने लगी।
थोड़ा चौकाने वाली बात तो है पर यकीन करिएगा ख़बर फर्जी तो नही है बल्कि इसके पीछे की वजह है सरकार की कुछ योजनाएं जिससे ये सब पॉसिबल होता दिख रहा है। 

वर्ल्ड डाटा लैब की तरफ से सामने आए आंकड़ो को देखे तो भारत मे 2012 तक शहरी क्षेत्रों में 25.7 और ग्रामीण इलाकों में 13.7 प्रतिशत लोग गरीब थे लेकिन 2018 आते आते इसमें जबर सुधार देखने को मिला और शहरी इलाकों में मात्र 4.8 और गांवों में महज 3.8 प्रतिशत गरीब लोग रह गए। 
इसके पीछे कोई चमत्कार नही है बल्कि इसके पीछे सरकार की वो योजनाएं है जिन्हें लोगो तक पहुँचाकर उसने देश को गरीबी के दंश से मुक्ति दिलाने का काम किया है। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने 12 सेकंड में एक व्यक्ति को ईलाज देकर गरीबी की ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम किया है। 2022 तक हर किसी को मकान देने का काम देने की योजना पर भी काम चल रहा है,दो करोड़ लोगो को तो बाकायदा उनका आशियाना मिल भी चुका है। मनरेगा जैसी योजनाओं में आवंटन राशि को 58 हजार करने का भी फायदा लोगो को मिला है और गरीबो को काम के लिए धक्के नही खाने पड़ रहे है ।वर्ल्ड डाटा लेब की माने तो 2011 में 26 करोड़ लोग रोज 135 रुपए से कम इनकम पा रहे थे जबकि अब ये संख्या घटकर 5 करोड़ तक आ गई है। 

उज्ज्वला योजना के तहत गरीबो को गोबर वाले चूल्हे के बीमारी युक्त धुंए से दूर करते हुए गैस सिलिंडर दिए गए जिससे गरीबो के बड़े तबके को फायदा पहुचाँ । घर घर मे शौचालय बना दिये गए जिसका फायदा भी लोगो को हुआ। यही वजह है कि जहां पहले 38 प्रतिशत लोग शौचालय का इस्तेमाल करते थे अब ये आंकड़ा 98 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। 

वर्ल्ड डाटा लैब मान रहा है कि  जिस हिसाब से भारत तरक्की कर रहा है उसको देखते हुए 2030 तक भारत मे मात्र 30 लाख लोग ही रह जाएंगे और दुनिया के दस सबसे निचले देशो की सूची से भारत निकल जायेगा।
हम ये नही कहते कि देश मे सब अच्छा हो रहा है लेकिन जितना भी रहा है उसका फायदा देश के लोगो को वाकई में हो रहा है।