वाराणसी के चुनाव में परदेशी और विदेशी क्या कर रहे हैं?

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19 मई को वाराणसी में चुनाव होने वाले हैं, वाराणसी में अंतिम चरण यानी सातवे चरण में वोटिंग होने वाली है.. वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के अलावा मुख्य रूप से सपा और कांग्रेस के उम्मीदवार भी है. कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक विशाल रोड शो करने के बाद उन्होंने अपना नामांकन किया था.. बड़ी संख्या में लोग रोड शो में पहुंचे थे.. इस रोड के बाद वाकई कुछ हद तक तो वाराणसी की स्थिति साफ़ हो गयी थी.. लेकिन वाराणसी में अभी जो भी कुछ हो रहा है वो वाकई हैरान करने वाला है.


दरअसल वाराणसी में इस समय बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं जो ना तो पार्टी से जुड़े हुए हैं और ना ही वे राजनीतिक रूप से सक्रीय है उनका कहना है वे बस प्रधानमंत्री मोदी को सपोर्ट करना चाहते हैं. वे कहते हैं कि उन्हें बखूब पता है कि मुकाबला एकतरफा है, लेकिन वे मोदी के सम्मान और समर्थन में यहां पहुंचे हैं। वे चाहते हैं कि मोदी इस बार रिकॉर्ड वोट हासिल करें।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश से लोग पहुँच रहे हैं और अलग अलग टुकड़ियों में जाकर प्रधानमंत्री को रिकॉर्ड जीत दिलाने की अपील कर रहे हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल से 22 पदाधिकारी अधिकृत तौर पर बनारस में मौजूद हैं जबकि बिना बुलाए वहां से आने वालों की संख्या 300 से अधिक है। वहीँ अगर बात दक्षिण भारत की करें तो यहाँ लोग बिना बुलाये प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करने पहुँच रहे हैं. अब तक इनकी संख्या 1400 के आसपास बतायी जा रही है. गुजरात और महाराष्ट्र से भी लोग वाराणसी पहुंचे हुए हैं.

सिर्फ यही नही मोदी का प्रचार करने के लिए देश ही नही बल्कि विदेशों से भी लोग वाराणसी पहुँच रहे हैं. नार्वे के हॉस्टन शहर से पीवी पटेल, कैलिफोर्निया से लता अहिर और क्योटो से आए महेश माधव ओगरे जैसे लोग भी शामिल हैं। इन लोगों का मानना है कि मोदी की जीत तो तय है पर वे प्रधानमन्त्री मोदी के सम्मान में यहाँ आये हैं. ये लोग कहते है कि जब पिछले पांच वर्षों में मोदी के चलते दुनिया में भारत की साख बढ़ी है, भारतीयों का मान बढ़ा है तो चुनाव के वक्त क्या हम दस-पंद्रह दिन अपने प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और समर्थन दर्शाने केलिए नहीं निकाल सकते हैं।
वैसे खबर हैं कि प्रधानमंत्री मोदी लोगों को बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील करने के लिए प्रधानमंत्री वाराणसी भी पहुँच सकते हैं और लोगों को बड़ी संख्या वोट डालने की अपील करने के लिए सड़कों पर निकल सकते हैं. अगर प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा किया तो वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद अधिक है और तो और पड़ोस के जिलों में इसका प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है. वैसे काशी को देश की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है लेकिन इस समय काशी मानों राजनीति की राजधानी बन गयी है, सबकी नजर यहाँ पर होने वाले लोकसभा चुनाव पर है. मोदी जीतेंगे या नही ये तो सवाल ही नही है बल्कि लोगों में सवाल तो यहाँ है कि प्रधानमंत्री मोदी इस बार कितने मार्जिन से जीतते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पिछले रोड शो के दौरान भी यह अपील की थी कि लोग यह सोच कर घर ना बैठे कि मोदी जीत रहे हैं बल्कि अधिक से अधिक मात्रा में घर से निकलकर लोकतंत्र के इस पर्व का हिस्सा बने.

अभी हाल ही प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो सन्देश जारी कर कहा था कि लोग बड़ी संख्या में वोट डालकर रिकॉर्ड स्थापित करें. इसके साथ वाराणसी को हासिल हुई पांच साल की उपलब्धियों के बारे में भी बताया था.
हालाँकि यह बात देखनी वाली होगी कि 23 मई को जब नतीजे सामने आते हैं तो किसके हक़ में आते हैं, प्रधानमंत्री कौन बनता है? एक तरफ जहाँ विपक्ष प्रधानमंत्री पद की तरह बड़ी उम्मीद से देख रहा है वहीँ बीजेपी और एनडीए सरकार बनाने के लिए कांफिडेंस में दिख रही है.