क्रिकेट को लेकर आखिर इतनी गंदी राजनीति क्यों हो रही है

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विश्व वर्ल्ड कप चल रहा है. टीम इंडिया अच्छा खेल रही है.. भारत में क्रिकेट प्रेमियों की संख्या कम नही है.. क्रिकेट और राजनीति एक दुसरे से अलग नही हो पाते.. क्रिकेट को लेकर भारत में खूब बवाल मचता है. इस समय मचा हुआ है जर्सी को लेकर.. दरअसल टीम इंडिया की जर्सी में बदलाव किया जा रहा है. इस बदलाव को लेकर अब बवाल शुरू हो गया है.. हम यहाँ पहले ही बता दें कि ये बवाल बेहद शर्मनाक है. टीम इंडिया को इस वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ 30 जून को परंपरागत नीले ड्रेस की बजाए नारंगी ड्रेस पहनकर खेलना है। टीम इंडिया ने अभी यह ऑरेंज जर्सी पहनी भी नहीं लेकिन उससे पहले ही इस पर राजनीतिक पार्टियों ने इसका राजनीतिकरण शुरू कर दिया है।


इग्लैंड सहित कुछ टीमों के खिलाफ विश्वकप के मैचों में भारतीय टीम नारंगी जर्सी पहन सकती है क्योंकि भारत और इंग्लैंड दोनों की टीमें नीली रंग की जर्सी पहनती हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इंग्लैंड को छोड़कर सभी टीमों से दो तरह की यूनीफॉर्म तैयार रखने को कहा है। लेकिन अब इस पर राजनीति शुरू हो गयी है.’ सपा नेता आजम खान ने एक बयान में कहा कि आजमी ने कहा कि जब भारतीय टीम जीतती है तो उन्हें खुशी होती है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मोदी पूरे देश को भगवा रंग में रंगना चाहते हैं।‘‘आज, जर्सी भगवा रंग की हो रही है। मोदी जी, राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का निर्णय करने वाला व्यक्ति एक मुस्लिम नेता था। अगर आप जर्सी के लिए रंग चुनना चाहते हैं तो तिरंगे के रंग को चुनिये, मुझे कोई परेशानी नहीं।’’आजमी ने कहा, ‘‘लेकिन अगर आप हर चीज को भगवा रंग में रंगेंगे तो यह अनुचित होगा… लोगों को इसका विरोध करना चाहिए”. वहीँ महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक एमए खान से इस बारे में सवाल किया गया तो वो भड़क उठे। उन्होंने कहा कि यह सरकार हर चीज को अलग नजर से देखने और दिखाने की कोशिश पूरे देश में पिछले पांच साल से कर रही है। “चाहे खेल हो, चाहे सांस्कृतिक कार्यक्रम हो या चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो। इस देश में भगवा राजनीति करने की जो शुरुआत हुई है वो दुर्भाग्यपूर्ण है।”


हा भैया दुर्भाग्यपूर्ण जरूर है क्योंकि ये फैसला बीसीसीआई ने लिया है और कुछ जरूरी कारण से लिया गया है. आज बोलने की आजादी है तो हर किसी का फैसला हर किसी का दोषी सिर्फ मोदी सरकार है. हाँ ये भी है कि अगर कोई संस्था कोई फैसला स्वतंत्र रूप से लेती है तो भी यही कहा जाता है कि सरकार के दबाव में ये फैसला लिया गया है. दूसरी बात तो ये है कि कुछ लोगों के दिमाग में भगवा इस कदर हावी हो चूका है कि उनके भगवा,नारंगी मतलब ही बीजेपी और मोदी सरकार होता है. अरे भाई भगवा को शौर्य और विजय का प्रतिक भी माना जाता है। और तो और बौद्ध धर्म के भिक्षुओं के कपड़ों का रंग भी भगवा ही है। ऐसे में भगवा को लेकर इस तरह की राजनीति समझ से परे है।


दरअसल विश्वकप शुरू होने से पहले ही ICC ने एक नया आदेश दिया था कि आईसीसी के टूर्नामेंट में सभी प्रतिभागी टीमों को दो अलग-अलग रंग का किट रखना होगा। मेजबान मतलब जिस देश मे मेहमान टीम पहुँच रही हैं उस देश को आईसीसी टूर्नामेंट में खेलते हुए अपनी जर्सी के रंग को बरकरार रखना होगा, मतलब जर्सी में बदलाव मेहमान टीम को ही करना होगा.. ऐसे में इस बार बदलाव भारत को ही करना है और बदलाव में नारंगी कलर को चुना गया है जिसपर अब गंदी राजनीति शुरू हो गयी है. वहीँ बीसीसीआई के कार्यवाहक अक्ष्यक्ष सीके खन्ना ने मीडिया से कहा कि ‘टीम इंडिया की जर्सी का रंग बोर्ड ने तय किया है।‘ उन्होंने आगे कहा, ‘टीम इंडिया इस जर्सी को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले वर्ल्ड कप मुकाबले में पहनकर उतरेगी। अब इस जर्सी को लेकर देश में हो रही राजनीति में बोर्ड किसी प्रकार का दखल नहीं देगा..


अब सवाल ये है कि आखिर अब क्रिकेट में राजनीति क्यों आ रही है? इसका जवाब है मुद्दा..! विपक्ष के पास मुद्दा नही है, मुद्दे की कमी है.. और अबू आजमी जैसे नेता सिर्फ विवादों में रहने के लिए बयान देते हैं. ऐसे लोगों को जनता खुद ही जवाब देती रही हैं. मुद्ददे की कमी झेल रहा विपक्ष परेशान होकर फालतू का मुद्दा उठाने की कोशिश में लगी हुई है.