दिल्ली चुनाव में उतरने जा रही है ये बड़ी पार्टी,मुश्किल में पड़ सकते हैं केजरीवाल

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नए साल को बीते कुछ दिन ही हुए थे कि देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी माहौल गरम हो गया है. बात करें अगर दिल्ली के विधानसभा चुनाव की, तो यहाँ क्या होगा किसी को पता ही नही है. अभी एक दिन पहले एक न्यूज़ चैनल ने अपने ओपिनियन पोल में बतया था कि आम आदमी पार्टी पूर्ण बहुमत से सत्ता पर दुबारा से काबिज होगी, लेकिन वो कहते हैं न कि राजनीति का उंट किस करवट बैठेगा ये किसी को नही पता होता है. तो इतनी जल्दी दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर ये फैसला समझ से परे है.   

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। दिल्ली के चुनावी अखाड़े में एक और बड़ी पार्टी (JDU) ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है. दिल्ली के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बिहार राज्य की संयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) दिल्ली के चुनाव में अलग लड़ने का फैसला कर लिया है. JDU ने फैसला किया है की वो दिल्ली का चुनाव अपने बलबूते लड़ेगी. बिहार में जद(यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री संजय झा ने बताया है कि पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली विधानसभा चुनाव पूरे दमखम से लड़ने का फैसला किया है. चुनाव को लेकर JDU ने अपनी कमर कस ली है और पार्टी ने रणनीति बना ली है. गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने दिल्ली में आठ फरवरी को विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा की है,जिसके नतीजे 1 फरवरी को आएंगे.

जद(यू) के दिल्ली प्रभारी संजय झा ने कहा, ‘पार्टी अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली प्रदेश इकाई के अनुरोध पर राज्य में अपने बलबूते चुनाव लड़ने पर सहमति जताई है. ‘सूत्र के मुताबिक,ये कहा गया है कि फिलहाल यह तय नहीं किया गया है कि पार्टी विधानसभा की 70 में से कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.दिल्ली में बड़ी संख्या में पूर्वाचल के लोग रहते हैं और जद(यू) की नजर इन्हीं वोटों पर है। सूत्रों ने आगे ये भी कहा कि, इस चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी प्रचार करने आएंगे.

आगे ये बताया गया है कि नीतीश का दिल्ली चुनाव प्रचार का कार्यक्रम तय किया जा रहा है. नीतीश चार-पांच सभाओं को संबोधित कर सकते हैं.जद(यू) पूर्वाचल के मतदाताओं की अनदेखी का मुद्दा उठाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करेगी. सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार शुक्रवार को दिल्ली आ रहे हैं और इस दौरान वह सीटों के चयन को लेकर और उम्मीदवारों के चयन के लिए दिल्ली प्रदेश इकाई के साथ बैठक करेंगे.

गौरतलब है कि जद (यू) बिहार में भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रही है. लेकिन पार्टी झारखंड विधानसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरी थी. अब उसने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी अकेले उतरने का निर्णय लिया है. इसे ये कयास लगाये जा रहें है कि क्या बीजेपी और JDU के बीच राजनीतिक रिश्ते में किसी तरह की खटास नजर आ रही है. उल्लेखनीय है कि 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में जद(यू) ने तीन विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन पार्टी को जीत नसीब नही हुई. जद(यू) को इस चुनाव में हर विधानसभा क्षेत्र में 10 से 12 हजार वोट मिले थे. वहीं 2017 के नगर निगम चुनाव में जद(यू) ने 98 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली.

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दरअसल, दिल्ली की बात करें तो 15 विधानसभा सीटें ऐसी है, जहाँ पर पूर्वांचल मतदाता अच्छी तादाद में हैं, और हर पार्टी जातिगत राजनीति कर के अपने वोट बैंक को सड़ने की तयारी में झूट गई है,और पूर्वांचल की सीट की बात करें तो दिल्ली में इनकी मौजूदगी 30 फीसदी तक है, जो किसी भी दल का खेल बिगाड़ सकती है.अगर वोट शेयर की बात की जाये तो 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 54.3 प्रतिशत मतों के साथ 67 सीटों पर रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी। आप ने मतों में 2013 के मुकाबले 24.8 प्रतिशत मतों का इजाफा दर्ज किया गया था। वहीं, 32.3 प्रतिशत मतों के साथ भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी.