“जिस हाथ में चाय का जूठा कप देना था, उसके हाथ जनता ने देश दे दिया”

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राफेल को लेकर विवाद थमने का नाम नही ले रहा है ये शायद विवाद चुनाव तक थमेगा भी नही! चुनाव के नजदीक आते ही नेता अब अपना असली रंग दिखाने लगे हैं.. कोई किसी को नीच दिखा रहा है तो कोई अधिकारियों को धमका रहा है हालाँकि राफेल मुद्दे पर कई बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी किरकिरी करवा चुके हैं. अब शायद उनके नेताओं की बारी आ ही गयी है.
अब राफेल के विवाद पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेसी नेता अब धमकियों पर उतर आये हैं. जी हाँ अब राफेल से जुड़े विभाग के अधिकारीयों को कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल धमका रहे हैं. कपिल सिब्बल ने राफेल डील पर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक CAG की संभावित रिपोर्ट को लेकर अधिकारियों को धमकी दी है. कैग सोमवार को राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर अपनी रिपोर्ट दे सकती है, जिसे जल्द ही संसद में पेश भी किया जा सकता है. इसे लेकर सिब्बल ने कहा, ‘अधिकारियों को ध्यान रखना चाहिए कि चुनाव आते जाते हैं, कभी हम विपक्ष में होते हैं और कभी सत्ता में होते हैं. कपिल सिब्बल ने आगे कहा कि हम उन अधिकारियों की निगरानी में लगे हुए हैं, जो ज्यादा उत्साही है और पीएम मोदी के प्रति अपनी वफादारी दिखाने में लगे हुए हैं.
अब कपिल सिब्बल की इस धमकी को क्या समझा जाए, बौखलाहट या फिर अतित्साह? अधिकारी अपना काम कर रहे हैं और सरकार अपना …तो कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल आखिर अधिकारीयों को इस तरह से धमकाकर क्या हासिल करना चाहते हैं. जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है इन नेताओं की जुबान और तेवर किसी और ही दिशा में जा रहे हैं…नेताओं के स्तर दिनों दिन गिरते क्यों जा रहे हैं.


अब यही देख लीजिये ….विपक्ष के नेता अधिकारियों को धमकी देने के साथ साथ प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं. खुद राहुल गांधी स्वच्छ राजनीति की बात करते हैं लेकिन चुनाव के नजदीक आते ही वे खुद अब प्रधानमंत्री के लिए तू तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल करने लगे हैं. ऐसे में उनके सहयोग कैसे पीछे रहते हैं. चंद्रबाबू नायडू को तो आप जानते ही होंगे…दिल्ली में सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे..जहाँ वे धरने पर बैठे थे वहां पर एक पोस्टर लिखा हुआ दिखा जिसपर लिखा हुआ था कि जिसके हाथ चाय का झूठा कप देना चाहिए थे उसके हाथ में जनता ने देश दे दिया है.
वैसे प्रधानमंत्री मोदी चायवाले थे और चाय बेचते थे इस बात को वे खुद कह चुके हैं. लेकिन इस बात को ध्यान रखना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी को मुख्यमंत्री के बाद प्रधानमंत्री देश की जनता ने बनाया है..लोकतांत्रित तरीके से वोट देकर….और ऐसे प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना तो छुटभैये नेता को ठीक लगता है. किसी पार्टी के अध्यक्ष को नही, किसी बड़े नेता को नही! नीच और बेहद घटिया मानशिकता के लोग इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं और देश की जनता के फैसले पर सवाल खड़ा कर सकते हैं… ये राजशाही नही लोकतंत्र है लोकतंत्र…..


वैसे कोई जांच एजेंसी के छापे से परेशान है, तो कोई इडी के पूछताछ से…कोई राफेल पर झूठ को लेकर परेशान है तो कोई 2019 चुनाव को लेकर…. आखिर भारत के नेता इतने परेशान क्यों है! शायद जवाब आपके पास होगा.