कैसे एक गाय ने बचाया जवानों की जान को नक्सलियों के इस हमले से

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हमारे देश के जवान अपनी जान की चिंता किये बिना नक्सल प्रभावित राज्यों में तैनात रहते है..और आपने देखा होगा कि नक्सलवादी हमेशा से हमारे जवानों पर कायराना हमला करते ही रहते है.. दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला में हुआ वो नक्सली हमला शायद ही कोई भूल सकता है जिस नक्सली हमले में हमारे 76 जवान शहीद हो गये थे… ये तस्वीर 6 अप्रैल 2010 की है, जब दंतेवाड़ा में अब तक सबसे बड़ा नक्सली हमला हुआ था…. इस हमले में नक्सलियों ने जवानों के हथियार और जूते भी लूट लिए थे.. उसके बाद छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सीआरपीएफ के जवानों पर नक्सलियों का वो हमला जिसमे हमारे 25 जवान शहीद हो गए थे

ऐसा ही कुछ करना चहा था नक्सलियों ने इस बार , क्यों की अब एक ऐसी ही खबर आई है नक्सल प्रभावित राज्य छतीसगढ़ से .. दरअसल छतीसगढ़ राज्य के गंगालूर के घने जंगल में नक्सलियों ने बिस्फोटक IED उस रास्ते में लगा दिया था, जहाँ से crpf के जवानों का किला गुजरना था.. जवानों के ठीक वहां से गुजरने से पहले एक गाय वहां से गुजर गई …जैसे ही गाय ने अपना पैर उस जगह रखा जहाँ बिस्फोटक IED लगा रखा था…वहां एक बड़ा धमाका होता है ,और उस गाय की जान चली जाती है. असल में जो बिस्फोटक जवानों के लिए लगा रखा था पर गाय वहां से गुजरी और उसकी की मौत हो गई..

कितना खतरनाक होता है IED ब्लास्ट?

IED यानि (Improvised Explosive Device)यह भी एक तरह का बम ही होता है, लेकिन यह मिलिट्री के बमों से कुछ अलग होता है. आतंकी और नक्सलवादी IED का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए करता है. IED ब्लास्ट होते ही मौके पर अक्सर आग लग जाती है, क्योंकि इसमें घातक और आग लगाने वाले केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. खासकर आतंकी सड़क के किनारे IED को लगाते हैं, ताकि इसके पांव पड़ते या गाड़ी का पहिया चढ़ते ब्लास्ट हो जाता है. IED ब्लास्ट में घुआं भी बड़ी तेजी से निकलता है.


यहाँ गाय ने अपने जान देकर इन जवानों की जान को बचा लिया..हमारे जवान हर मुसीबत का सामना करते हुए ऐसे जंगलों में तैनात रहते है ,ऐसी जगहों पर उनकी जान पर हमेशा ही संकट मडराता रहता है ,इस बार तो गाय ने सामने आकर इनकी जान बचा ली ..पर कई बार हमारे जवान नक्सलियों की इन ओछी चालों और हमलों में फस जाते है और अपने देश के लिए शहीद हो जाते है ,पर कुदरत को इस बार ये मंजूर नहीं था ,इसलिए गाय ने उनके मनसूबे पूरे नहीं होने दिए ..भारत में गाय को माता क्यों कहा जाता है..आज इसका जवाव मिल गया है भारतीय संस्कृति में गाय को ऐसे ही माता नहीं कहते..वैसे गाय का गोबर मूत्र से कई प्रकार की मेडिसीन बनती है अगर गाय बीच में नहीं आती तो शायद ये हमला भी इन नक्सली हमलों जितना ही आत्मघाती होता क्यों की तरीका भी वैसा ही कायराना था जैसा पिछले नक्सली हमलों के समय नक्सलवादियों ने अपनाया था ..