इमरान खान के प्यार में पागल हो गए हैं सिद्धू

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है समय नदी की बाढ़ सी अक्सर सब बह जाया करते हैं.
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्बत भी झुक जाया करते हैं.
अक्सर दुनिया के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं.
पर कुछ इमरान ख़ान जैसे होते हैं जो इतिहास बनाया करते हैं.

करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर पाकिस्तान गए सिद्धू ने कुछ ऐसे अल्फाजों में इमरान की तारीफ़ की. सिद्दू की सबसे बड़ी कमी है कि वो जब बोलना शुरू करते हैं तो खुद को सुनते नहीं. उनपर इमरान खान की तारीफ़ करने की इतनी सनक सवार थी कि ये भी बोल गए, “ इस एहसान के बदले अब सिख समुदाय जहां भी जाएगा वहां वो इमरान ख़ान की तारीफ़ों के कसीदे पढ़ेगा. उनके प्रवक्ता की तरह उनकी बड़ाई करेगा”.

पूरे सिख समुदाय की बात तो नहीं पता लेकिन सिद्धू जरूर इमरान के प्रवक्ता की तरह बर्ताव करते हैं. इमरान को इतिहास पुरुष बताते हुए सिद्धू ने कहा कि इमरान ख़ान में 14 करोड़ सिखों का विश्वास हैं. वो एक जीता-जागता इतिहास हैं. जिन्होंने कोई नफ़ा-नुकसान नहीं देखा, कोई सौदा नहीं देखा, सिर्फ़ और सिर्फ़ ईश्वर के नाम पर यह क़दम उठाया है.

अगर अपनी आँखों से इश्क की पट्टी हटा कर सिद्धू ने देखा होता तो उन्हें समझ आता कि करतारपुर साहब कॉरिडोर के ऑफिशियल  विडियो में भिंडरेवाला की तस्वीर का इस्तेमाल करके इमरान खान ने अपने सारे नफा-नुक्सान और राजनीति और भारत के खिलाफ अपने अन्दर के ज़हर को जगजाहिर कर दिया. बोलते बोलते सिद्धू इतने बहरे हो गए कि भारत के खिलाफ दुनिया भर में साजिशें करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को संत जैसा घोषित कर दिया. सिद्धू ने कहा, “सिकंदर ने लोगों को डराकर दुनिया पर राज किया था लेकिन इमरान ख़ान वो सिकंदर हैं जो लोगों के दिल में बसते हैं और दुनिया पर राज करते हैं.” वो कौन सी दुनिया है जहाँ इमरान खान प्यार से राज करते हैं, वो कौन सी दुनिया के लोग हैं जिनके दिलों में इमरान खान बसते हैं ये बस सिद्धू जानते हैं और सिद्धू ही समझते हैं.

आपने इमरान खान का वो विडियो तो देखा ही होगा जिसमे वो पूछते हैं “हमारा सिद्धू किधर है? आ गया वो? लेकिन अगले ही सेकेण्ड में इमरान अपने उस एजेंडे को भी सामने रख देते हैं कि अगर भारत ने सिद्धू को आने से रोका तो वो सिद्धू को और हीरो बनायेंगे. पूरा भारत इमरान और पाकिस्तान की साजिशों से वाकिफ है सिवाए सिद्धू के.

ये सच है कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर सिखों के लिए बहुत मायने रखता है लेकिन ऐसी भी क्या मज़बूरी कि इमरान खान के सामने बिछ गए सिद्धू. वो तो शायद सिद्धू को याद नहीं रहा होगा वरना वहीँ मंच से खड़े खड़े इमरान खान को शांति का नोबेल भी देने की पैरवी कर देते. वैसे भी सिद्धू का ये इमरान प्रेम नया नहीं है. पहले भी कई मौकों पर उनका इमरान प्रेम छलक छलक कर बाहर आता रहा है और उसी इमरान प्रेम की वजह से आज सिद्धू का राजनीतिक कैरियर कब्र में पहुँच चूका है और उनकी राजनीतिक हैसियत पूरी तरह से ख़त्म हो चुकी है.