इमरान खान ने भारत के आगे हथियार डाले ….

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बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ! अरे रुकिए रुकिए!  बेगानी शादी में अब्दुल्ला ने अपनी गलती स्वीकार ली है।अब देखना ये है की अब्दुल्ला बेगानी शादी में कहीं दोबारा दीवाना तो नहीं होगा? बेगानी शादी यानी जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने का मुद्दा और अब्दुल्ला यानी पाकिस्तान के पीएम इमरान खान!

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़िलहाल UNGA सत्र में भाग लेने के लिए न्यू  यॉर्क में हैं। आपको ये जान कर हैरानी होगी कि मंगलवार को इमरान खान जो लम्बे समय से भारत के जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने पर हाय तोबहा मचा रहे थे उन्होंने इस मुद्दे पर भारत के आगे हार मान ली है। लम्बे समय से भारत के खिलाफ डींगे हांकने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ आवाज़ उठाने की धमकियाँ देने वाले, खान साहब ने भारत के आगे हथियार दाल दिए हैं । उन्होंने मान लिया है कि इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना गलत था और पाकिस्तान इस प्रयास में बुरी तरह से फेल हुआ है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370  हटाने पर अधिकतर देशों का भारत को समर्थन देख कर पाकिस्तान की हालत खराब हो गई है।

न्यूयोर्क में खान साहब कश्मीर के मुद्दे पर रोने लगे और कहा, “ मैं कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निराश हूँ। मैं ये पूछना चाहता हूँ की अगर आठ मिलियन यूरोपी नागरिकों या यहूदियों या अमेरिकियों को ऐसे बंदी बनाकर रखा गया होता तो क्या तब भी यही प्रतिक्रिया होती? ”

अरे! कमाल करते हो खान साहब! किसने कहा भारत के कश्मीरी बंदी हैं? अपना देश आपसे संभल नहीं रहा और रो आप कश्मीर के लिए रहे हैं। आपको टेंशन ही लेनी है तो बलूचिस्तान की लीजिये, अपने देश में पल रहे आतंकवादियों की लीजिये!

आपको बता दें, इमरान खान ने भारत के आर्थिक कद और विश्व में कमाई हुई इज़्ज़त व प्रमुखता को भी स्वीकार किया है। लेकिन इस पर भी उनकी बड़बोली रुकी नहीं। बिना किसी लॉजिक के कुछ भी बोलते रहे। उन्होंने कहा लोग भारत को सवा सौ करोड़ लोगों के बाजार के रूप में देखते हैं, इसीलिए कश्मीर मुद्दे पर शांत हैं। खान साहब को समझने की ज़रूरत है कि  यूएन अंतरराष्ट्रीय विषय पर चर्चा करने का एक मंच है। कोई थिएटर या ड्रामा क्लब नहीं। ख़ैर आप इस ड्रामेबाज़ी की आदत से मजबूर हैं और लोग भी आपके बड़बोलेपन के आदि हो गए हैं लेकिन कुछ समय मिले तो दूसरों के घर में झाँकने से पहले अपने घरेलु मुद्दों पर भी नज़र डाल  लीजियेगा। कश्मीर खुश है और भारत में खुश ही रहेगा।

अपने ड्रामे  को आगे बढ़ाते हुए इमरान खान कश्मीर में कर्फ्यू, सेना की तैनाती, आदि के बारे में बोलने लगे। जनाब कश्मीर किसी कैद में नहीं है। हाँ एक हिस्सा हमारे एक पडोसी की कैद में ज़रूर है लेकिन वो भी जल्द वापस आजाएगा।

आपको बता दें कि भारत आर्मी के चीफ जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को ही कश्मीर के हालातों के बारें में बताते हुए कहा  “कश्मीर में हालात बेहतर हैं, लोगों के अपने प्रियजनों से बात करने के लिए स्पेशल इंतेज़ाम कर दिए गए हैं, टेलीफोन लाइन चालू हैं।” बिपिन रावत की मानें तो 500 से अधिक आतंकवादी कश्मीर बॉर्डर से भारत में घुसपैठ करने के लिए तैयार बैठे हैं। वहीँ खान साहब पूछते हैं कि कश्मीर में सैनिक क्यों तैनात हैं ? वाह खान साहब वाह! अब इमरान खान साहब बता ही दीजिये इस रिश्ते को मई क्या नाम दूँ? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इमरान खान दोनों ही 27  सितम्बर को अपना संबोधन देंगे।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी विफलता और इंसल्ट के बाद भी एक ज़िद्दी बच्चे की तरह पाकिस्तान का दावा है कि वह 27 सितम्बर को इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ आवाज़ उठाएगा। वहीँ मोदी जी भी इमरान खान को कश्मीर मुद्दे पर घेरने के लिए रेडी बैठे हैं। 

इस पूरे मामले में डोनाल्ड ट्रम्प की भी एंट्री होती है, वो दोनों पक्षों से अलग अलग मिलते हैं।रूठे हुए जीजा जी की तरह कहते हैं कि अगर मुझे दोनों पक्ष सेटलमेंट के लिए मनाएं तो मैं सेटलमेंट कराने के लिए बीच में बैठ सकता हूँ।अब ट्रम्प साहब को कौन बताएं कि भैया नहीं है ज़रुरत हमें किसी सेटलमेंट की! 

कश्मीर मुद्दे पर भारत पाकिस्तान ने पिछले 7 दशक में  बहुत बात चीत की,कई जंगे लड़ी, दोनों तरफ से कई जानें कुर्बान हुई। लेकिन ट्रम्प साहब कभी भी किसी तीसरे आदमी को बीच में सेटलमेंट के लिए नहीं घुसाया।

अब देखना ये है कि पाकिस्तान की 27 सितम्बर को क्या प्रतिक्रिया रहेगी और मोदी जी उसका क्या रिएक्शन देंगे।