अबकी बार मुश्किल में ट्रम्प सरकार, महाभियोग के फंदे से कैसे बचेंगे ट्रम्प?

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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होना है. नवम्बर से प्राइमरी चुनाव शुरू भी हो जायेंगे लेकिन चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मुश्किल में हैं. उनपर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. ‘हाउस ऑफ रेप्रेजेंटेटिव’ की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने 24 सितंबर को इसका ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि ट्रम्प पर जो आरोप लगे हैं वो बेहद गंभीर है. क़ानून से बड़ा कोई भी नहीं.”

वैसे ट्रम्प कोई पहले राष्ट्रपति नहीं जिन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ेगा. ट्रम्प से पहले अमेरिका के 3 और राष्ट्रपति महाभियोग का सामना कर चुके हैं. वो थे – एंड्रयू जॉनसन, रॉनल्ड रीगन और बिल क्लिंटन. रीगन ने तो महाभियोग की प्रक्रिया चलने से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया था. जबकि क्लिंटन और जॉनसन ने अपना कार्यकाल पूरा किया था. लेकिन आज बात सिर्फ ट्रम्प की.

ट्रम्प पर आरोप

ट्रम्प के महाभियोग का मामला जुड़ा है उनके एक प्रतिद्वंदी जोसेफ बाइडन से. जोसेफ बाइडन अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति रह चुके हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए संभावित उम्मीदवार भी हैं. ट्रम्प पर आरोप है कि उन्होंने जोसेफ बाइडन और उनके बेटे बेटे के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए दवाब डाला. ये दवाब डाला गया एक फोन कॉल के जरिये. 25 जुलाई को ट्रम्प और युक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदीमीर ज़ेलेंस्की के बीच फोन पर लम्बी बातचीत हुई.

अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने सरकार के वाचडॉग से शिकायत की थी कि ट्रंप ने एक विदेशी नेता से बातचीत की है. वाचडॉग को एक तरह का लोकपाल मान लीजिये. इस खबर के सामने आने के बाद  डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प पर आरोप लगाया कि इस बातचीत में जेलेंस्की से कहा गया कि वो बाइडन पिता पुत्र के खिलाफ भ्रष्टाचार की जाँच को मंजूरी दे नही तो अमेरिका युक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद रोक देगा.

ट्रम्प पर ये भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने पद की शपथ और राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन किया है. इसके अलावा एक तीसरा आरोप ट्रम्प पर ये है कि राजनैतिक फायदे के लिए न सिर्फ अपने विरोधियों की छवि खराब करने की कोशिश की बल्कि इसके लिए दुसरे देश से मदद लेने की भी कोशिश की.

क्या होता है महाभियोग

महाभियोग शब्द भारत में बहुत प्रचलित नहीं है. भारत में ये शब्द बहुत अनोखा है क्योंकि कभी कभार हमें विदेशों से ही सुनने को मिलता है कि फलाना राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री पर महाभियोग चलाया गया. भारत में ये शब्द पिछले साल तब चर्चा में आया साल 2018 में कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया. लेकिन अमेरिका में ये बहुत आम है. अमेरिकी संविधान के आर्टिकल 2 के सेक्शन 4 में कहा गया है कि पद का दुरूपयोग करने, रिश्वत लेने, देशदोह या फिर कोई बेहद गंभीर अपराध के आरोप पर राष्ट्रपति को कार्यकाल ख़त्म होने से पहले पद से हटाने के लिए महाभियोग चलाया जा सकता है. ना सिर्फ राष्ट्रपति बल्कि उपराष्ट्रपति पर भी महाभियोग चलाया जा सकता है.

किसने की ट्रम्प की नींद हराम

अब बात उनकी जिन्होंने चुनाव से ठीक पहले ट्रम्प के आँखों से नीद उड़ा दी. उनका नाम है नैंसी पेलोसी. नैंसी कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद हैं. भारत की तरह ही अमेरिका के संसद कांग्रेस के भी दो सदन है। उपरी सदन सेनेट और निचली सदन हाउस ऑफ रेप्रेजेंटेटिव्स. अमरीका में पिछले साल के अंत में संसद के लिए मध्यावधि चुनाव हुए जिसके बाद निचले सदन यानी कि हाउस ऑफ़ रिप्रज़ेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत में आ गई. नैंसी को प्रतिनिधि सभा का स्पीकर चुना गया और इसके साथ ही वो अमेरिका की सबसे ताकतवर महिला भी बन गई. अमेरिका में सबसे ताकतवर शख्स होता है राष्ट्रपति, उसके बाद उपराष्ट्रपति. नैंसी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बाद अमेरिका की तीसरी सबसे ताकतवर शख्सियत बन गईं.

कैसे चलेगा महाभियोग

महाभियोग प्रक्रिया शुरू होते ही सबसे पहले छह हाउस कमेटियां महाभियोग संबंधी आरोपों को लेकर ट्रंप के खिलाफ जांच करने के बाद अपनी राय न्यायिक कमेटी को भेजेंगी. अगर इस राय में ये निकल कर आये कि ट्रम्प महाभियोग चलाया जा सकता है तो फिर सदन में वोटिंग होगी. अगर वोटिंग रिजल्ट महाभियोग के पक्ष में आया तो ट्रम्प पर महाभियोग चलेगा. उसके बाद सीनेट में ट्रंप के खिलाफ ट्रायल चलाया जाएगा. ट्रायल के बाद सीनेट में ट्रंप को महाभियोग में दोषी ठहराने और राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सेनेट में कम-से-कम दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी.

सदन की वर्तमान स्थिति

सीनेट में 100 सीनेटर हैं. इनमे से ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन के सीनेटर की संख्या 53 है जबकि विपक्षी डेमोक्रेटिक सीनेटर की संख्या है 45. दो सीनेटर निर्दलीय हैं. ऐसे में महाभियोग के पक्ष में वोटिंग होना बेहद मुश्किल है. इसके लिए ट्रंप पर लगाए गए आरोपों का बेहद संगीन साबित होना बहुत ज़रूरी होगा और डेमोक्रेट्स को वोटिंग की स्थिति में कम से कम 20 रिपब्लिकन सीनेटर का साथ चाहिए होगा. ये तभी होगा जब क्रॉस वोटिंग हो जैसे भारत में वोटिंग के दौरान संसद में होता है. जैसे राज्यसभा में बहुमत में न होने के बावजूद भी भाजपा ने कई बिल पास करा लिए.

आने वाले दिनों में अमेरिका की राजनीति बहुत दिलचस्प होने वाली है. अबकी बार मुश्किल में है ट्रम्प सरकार