राजस्थान में घूंघट पर प्रतिबंध की बात कर ट्रोल हुए जावेद अख्तर

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शिवसेना के मुखपत्र सामना में भारत में बुर्के पर बैन की बात ने देश की राजनीति को तेज कर दिया … हालाँकि शिवसेना ने सामना में लिखे बातों से खुद को अलग कर लिया और सहयोगी भाजपा ने भी इसका विरोध कर दिया लेकिन .. जब बात शुरू हुई तो इसे दूर तक जानी ही थी… बुर्के पर रोक से शुरू हुई बात अब घूँघट तक आ पहुंची .. पहले तो ओवैसी ने कह दिया – घूँघट पर बैन कब लगाओगे? उसके बाद शायर और लेखक जावेद अख्तर भी इस बहसबाजी में कूद पड़े और घूँघट पर बैन की बात को हवा दे दी..दरअसल एक प्रोग्राम के दौरान जावेद अख्तर ने कहा कि मुझे कोई आपत्ति नहीं है,इराक एक बड़ा कट्टर मुस्लिम देश है. लेकिन वहां पर औरतें चेहरे को कवर नहीं करती हैं. श्रीलंका में भी जो कानून आया है उसमें यह है कि आप चेहरा कवर नहीं कर सकते. बुर्का पहनो, लेकिन चेहरा ढका हुआ नहीं होना चाहिए..और अगर देश में बुर्के पर प्रतिबंद लगे,तो  जो केंद सरकार है वो राजस्थान में 6 मई को होने वाले लोकसभा से पहले घूंघट प्रथा पर भी प्रतिबंध लगाए..

जब उनके बयान पर बवाल बढ़ा तो जावेद को अहसास हुआ कि वो कुछ ज्यादा बोल गए .. फिर उन्होंने सफाई देनी शुरू की … अपनी सफाई में उन्होंने शुक्रवार को एक ट्वीट किया और कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है, मैंने ये कहा था कि श्रीलंका में भले ही यह सुरक्षा के लिहाज से किया गया हो लेकिन वास्‍तव में यह महिला सशक्तिकरण के लिए जरूरी है, चेहरे को ढंकना बंद होना चाहिए, फिर चाहे वह नकाब हो या घूंघट।

उनके इस ट्वीट के बाद कुछ लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी, एक शख्स ने उनको उन्ही का बयान दुबारा सुनने की सलाह दी ,और कहा की जावेद साहव आप अपना बयान खुद ही सुनिये कि अपने आवेश में आकार क्या कहा..

तो वही किसी ने कहा कि वो सेक्युलर होने का ढोंग कर रहे है , वो यूजर लिखते है कि पहले जो बोलना था बोल दिया , जिसको प्रभावित करना था कर दिया और अब पलटी मार के सेक्युलर बनने का ढोंग वाह और ये घूँघट बिच में क्यों लाया ???

अगर यहाँ बुर्के पर प्रतिबंद की बात को घूंघट के प्रतिबंद से जोड़ा जा रहा है तो जावेद साहव जी को ये भी सोचना चाहिए कि सती प्रथा या बाल विवाह जो भी सामजिक कुरीतियाँ थी,उन्हें ख़त्म करने में खुद हिन्दू आगे आये है,पर जावेद जी घूंघट और बुर्के की तरह कभी ऐसे ही तीन तलाक पर भी सबके सामने अपने विचार रखे..क्यों की इस से कई मुस्लिम महिलाये परेशान है.