खतरे में उद्धव की कुर्सी, अगर देना पड़ा इस्तीफ़ा तो ये बन सकते हैं महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री

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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे को झटका देते हुए गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दी है. अब उद्धव की कुर्सी सिर्फ चुनाव आयोग ही बचा सकता है, 27 मई से पहले MLC चुनाव करा कर. लेकिन कोरोना की वजह से राज्य के जो हालात है उसमे MLC चुनाव कराना खतरे से खाली नहीं. महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 10 हज़ार के पार पहुँच चुका है. ऐसे में ये भी अटकलें लगनी शुरू हो गई है कि अगर चुनाव नहीं हो पाया और उद्धव ठाकरे को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर होना पड़ा तो फिर उद्धव की जगह पर कौन संभालेगा महाराष्ट्र की सत्ता? हो सकता है अगर चुनाव नहीं हो पाए और उद्धव को इस्तीफ़ा देना ही पड़े तो उनकी जगह पर ओई और मुख्यमंत्री बने और जब हालात सही हो जाएँ तो वो उद्धव के लिए कुर्सी खाली कर दे.

लेकिन किसी को अपनी कुर्सी अमानत के तौर पर सौंपना खतरे से खाली नहीं होता. याद कीजिये बिहार को, जब 2014 के लोकसभा में बुरे प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे कर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था. नीतीश ने अपना वोटबैंक बचाने के लिए मांझी को मुख्यमंत्री बना तो दिया लेकिन उसके बाद मांझी नीतीश के लिए गले की हड्डी बन गए. उन्होंने नीतीश के लिए दोबारा कुर्सी छोड़ने से साफ़ इनकार कर दिया. राजनीति इसी का नाम है सत्ता जिसके पास जाती है उसके हाथों से सहज ही नहीं छूटती.

अब आते हैं वापस महाराष्ट्र पर. जब महाराष्ट्र में चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की जिद पकड़ी थी तब उद्धव क्खुद मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे. बल्कि वो अपने बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे. लेकिन पहली बार विधायक चुन कर आने वाले आदित्य के नेत्रित्व में काम करना न तो कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों और नेताओं को मंजूर था और न ही एनसीपी के विधायकों और नेताओं को. लिहाजा उद्धव को ही मुख्यमंत्री बनना पड़ा. उस समय उद्धव ठाकरे ना तो विधायक थे और ना ही एमएलसी. संविधान के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अगर मंत्री या मुख्यमंत्री पद की शपथ लेता है तो उसे छह महीने के अंदर किसी भी एक सदन का सदस्य चुना जाना होता है. उद्धव ने सोचा था कि लम्बा समय है, वो अप्रैल में होने वाले एमएलसी चुनाव के जरिये विधान परिषद में आ जाएंगे. लेकिन कोरोना संकट की वजह से चुनाव टल गया और उद्धव की कुर्सी पर पेंच फंस गया.

ऐसे में अब ये सवाल सामने है कि अगर चुनाव नहीं पाया और उद्धव को इस्तीफ़ा देना पड़ा तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा? अगर ऐसी नौबत आई तो ये तो तय है कि शिवसेना की तरफ से आदित्य ठाकरे का नाम आगे किया जाएगा. जैसे कांग्रेस गाँधी परिवार के अलावा न कुछ देखती है और न कुछ सोचती है वैसे ही शिवसेना भी ठाकरे परिवार के अलावा न तो कुछ देखती है और न सोचती है. लेकिन इसकी संभावना बहुत कम है कि एक दिन के लिए भी एनसीपी आदित्य के नेतृत्व में काम करने को तैयार होगी. एनसीपी भी सत्ता में बराबर की हिस्सेदार है ऐसे में वो CM पद पर अपना दावा ठोक सकती है. हालांकि, गठबंधन में यह तय हो चुका है कि पांच साल तक सीएम की कुर्सी शिवसेना के पास ही रहेगी. लेकिन राजनीति में कब कौन कैसा दांव चल दे ये कहा नहीं जा सकता. अगर ऐसा होता है तो एनसीपी अजीत पवार या फिर सुप्रिया सुले का नाम आगे बढ़ा सकती है. आने वाले वक़्त में महाराष्ट्र की राजनीति बहुत रोचक होने वाली है. देखते हैं उद्धव अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या महाराष्ट्र को कोई नया CM मिलता है.