अगर चिदंबरम ने नहीं मानीं SC की ये शर्तें तो फिरसे हो सकती है जेल

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आज दिनभर देश में बहुत कुछ हुआ, लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो अक्सर लोगों की नजर से छूट जाती हैं ऐसी ही 4 दिनभर की सबसे महत्वपूर्ण खबरों को हम आपको यहाँ बतायेंगे जो शायद सुर्ख़ियों में रही हों..

1-UPA सरकार में रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है.. आपको बता दें चिदंबरम गुजरे 105 दिन से जेल में बंद थे.. उनको सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों  के चलते 21 अगस्त को घर से गिरफ्तार कर लिया था.. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी उन्हें 16 अक्तूबर की शाम को गिरफ्तार कर लिया था.. इससे पहले स्पेशल कोर्ट ने चिदंबरम की जमानत याचिका को ख़ारिज कर दिया था.. और अब सीबीआई और ईडी दोनों से इस मामले में जमानत मिलने के पश्चात पी चिदंबरम जल्द ही जेल से बाहर निकल सकते हैं… सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार उनकी जमानत रिहाई के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन के पास एक आदेश भेज दिया गया है. चिदंबरम के सामने जो शर्ते रखीं गयी हैं उनके मुताबिक वो साक्षात्कार या बयान नहीं दे सकते हैं.

2-केंद्र सरकार एक लम्बे वक्त से संसद के शीतकालीन सत्र में CAB (नागरिक संशोधन बिल ) लाने की तैयारी में जुटी हुई थी.. और अब आखिर पूरी मोदी कैबिनेट ने 4 दिसम्बर को इस बिल पर आखिरी मुहर भी लगा दी है.. इसके तहत भारतीय नागरिकता के नियमों व शर्तों में बदलाव किया जायेगा..  इस बिल में भारत के तीन सबसे कट्टर पडोसी मुल्कों, पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफ़ग़ानिस्तान में मजहबी रूप से अल्पसंख्यक प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता योग्य बनाने का प्रावधान शामिल किया गया है, इस नागरिकता (संशोधन) विधेयक का मकसद 6 समुदायों – हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी – के लोगों को भारत की सिटिजनशिप प्रदान करना है. हालाँकि इस बिल का कुछ लोगों द्वारा मुस्लिम विरोधी बताकर 2016 लगातार विरोध किया जा रहा था.. लेकिन फिर भी मोदी कैबिनेट ने इस मसौदे को पास कर दिया है.. अब इसको संसद में अगले हफ्ते पेश किये जाने की उम्मीद है…

3- दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी गूगल (Google) ने भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई को सोंपी है दरसल उनको अब गूगल की पेरेंट कम्पनी अल्फाबेट का सीईओ बनाया गया है… ये फैसला गूगल के को फाउंडर्स लेरी पेज और सरगी ब्रिन के इस्तीफे के बाद लिया गया है..  हालांकि कम्पनी के Administration डिपार्टमेंट में हुए नए बदलावों के बावजूद भी संस्थापक सर्गी ब्रिन और लैरी पेज कंपनी के शेयरहोल्डर और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बने रहेंगे.. स्टेनफोर्ड युनिवेर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाले दोनों संस्थापकों ने गूगल के जन्म के करीब दो दशक के बाद इस्तीफे का ऐलान किया है.. और दोनों के एक साथ इस्तीफे के बाद सुन्दर पिचाई गूगल और अल्फाबेट दोनों के सीईओ बन गए हैं..  चलिए अब आपको बताते हैं कि अल्फाबेट का दरअसल काम क्या है…. गूगल ने साल 2015 में कंपनी स्वरूप में बदलाव किया था और जिसके लिए अल्फाबेट को बनाया गया… अल्फाबेट अलग-अलग कंपनियों का एक सामूहिक रूप है, ये कंपनी गूगल को (स्वचालित कार) कम्पनी वायमो…  (जैव विज्ञान) कम्पनी वेरिली, (शहरी नवोन्मेष) कम्पनी साइडवॉक लैब और (गुब्बारे की सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट उपलब्ध कराने वाली कम्पनी लून…इन जैसी तमाम कंपनियों से अलग रखती है.

4-हाल ही में इसरो चीफ के सिवन ने नासा के विक्रम लैंडर खोजे जाने के दावे पर एक बड़ा अपडेट दिया है.. उनके मुताबिक इसरो ने नासा से पहले चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर की मदद से लैंडर विक्रम की क्रेशिंग साईट को खोज लिया था और इसका अपडेट उन्होंने इसरो की ऑफिसियल वेबसाइट पर 10 सितम्बर को दे दिया था…वेबसाइट पर मौजूद उस अपडेट में लिखा हुआ है कि इसरो ने विक्रम लैंडर की लोकेशन को खोज लिया है लेकिन अब भी सम्पर्क स्थापित नही हो सका है.. और लगातार इससे संचार स्थापित करने के लिए जैसे भी हो सके संभावित प्रयत्न किेए जा रहे हैं…

के सिवन के बयान से पहले अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा ने मंगलवार सुबह अपने लूनर रेकॉन्सेन्स ऑर्बिटर (एलआरओ) से चाँद की सतह पर खींची गयी एक तस्वीर को tweet किया था. जिसमें नासा ने दावा किया कि तस्वीर में विक्रम लैंडर से प्रभावित चाँद का वो हिस्सा दिखाई दे रहा है जिसकी तलाश एक लम्बे वक्त से की जा रही थी.. और इसी तस्वीर से मिले डाटा के आधार पर नासा ने एक बयान जारी किया और कहा हुए कहा चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर के हिस्सों को ढूँढ लिया गया है.. नासा ने अपनी वेबसाइट पर जारी तस्वीर में नीले और हरे डॉट्स के द्वारा विक्रम लैंडर के मलबे वाला वह क्षेत्र दिखाया है जहाँ वो पाया गया है.. इससे पहले नासा ने 26 सितंबर को क्रैश साइट की एक फोटो जारी करते हुए आम लोगों और वैज्ञानिकों को साथ आकर विक्रम लैंडर की खोज करने के लिए कहा था… और चेन्नई के कंप्यूटर प्रोग्रामर और मैकेनिकल इंजीनियर शनमुग सुब्रमण्यम ने हफ्ते भर हर रोज 6 से 7 घंटे इस तस्वीर को गहराई से परखा और पिक्सेल बाई पिक्सेल इसकी जांच की और वो मलबे की पहचान करने में सफल हुए थे. उन्होंने ही नासा को इसकी जानकारी दी थी