जानिए अब क्यों कोई नही भाग पायेगा देश का पैसा लेकर

835

सरे मोदी चोर हैं… मेहुल चौकसी की जय ,नीरव मोदी की जय. नीरव मोदी भाग गया….चौकीदार चोर है… ये सभी बातें हमे राहुल गाँधी सुनते रहते है …

वो इसलिए क्योंकि हमारे देश में बैंक घोटाले और दिवालियापन पिछले कुछ दिनों से काफी ट्रेंडिंग है… मेहुल चौकसी, विजय माल्या, नीरव मोदी , चंदा कोचर और दीपक कोचर.. कुछ ऐसे नाम है जो बैंक घोटाले को लेकर सामने आए है… यह सिलसिला 2015 के बाद शुरू हुआ… जब सरकार के सामने कई ऐसे रिपोर्ट्स और डाटा आए जो की कई तरह से देश की economic कंडीशन को नुक्सान पंहुचा रहा था….
वैसे आपको याद दिलाते है मामा भांजे मतलब मेहुल चौकसी और और नीरव मोदी की मिली भगत की….
कैसे इन दोनों ने मिल कर पंजाब नेशनल बैंक को 14 हज़ार करोड़ का चुना लगाया था… सब कहते है मोदी सरकार ने इन्लोग को श्रेय दिया है… लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जब इन्होनें लोन लिया तब तो ये सरकार नहीं थी .. साल 2011 के बाद उन्होंने करीब 4 सालों तक सरकार और बैंक की आखों में धुल झोका…
वैसा ही कुछ हाल videocon और icici बैंक scandle का भी है …. चंदा कोचर बैंक की एमडी और उनके पति ने मिल कर बैंक को चुना लगाने का काम किया था…

दरअसल इन दोनों ने अपने आपसी समझ से ICICI बैंक को करीबन 1800 कड़ोर का झटका लगाया था… इन दोनों की मिलीभगत से “icici- videocon” scam हुआ… चंदा कोचर ने अपने पति और वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के साथ मिलकर बैंक को बड़ा झटका दिया…. लेकिन अब videocon खुद को दिवालिया घोषित करने के कगार पर है…
जब bussiness ठप हो जाती है या फिर सही से नहीं चलती तो उस कंपनी को ओनर द्वारा कंपनी को किसी और से बेच दिया जाता और लोन को चुकाने का इंतज़ाम किया जाता है…. इसको प्रोसेस ऑफ़ वाइंडिंग अप कहते है …

बात दरअसल यह है कि इन लोगों की हिम्मत इसलिए बढ़ी क्योंकि लोन लेने के बाद ना चुका पाने के पीछे कोई बड़ा कानून नहीं था… कानून था भी तो इसका उपयोग सहीं से नहीं हो पता .. वह कानून था NPA का…
NPA का मतलब होता है non progressive assest… अगर सरल शब्दों में कहें तो जब बैंक किसी व्यक्ति को लोन देती है तो कभी-कभी ऐसा होता है कि लोन लेना वाला इंसान बैंक को regular payment नहीं कर पाता है… फिर बैंक उसे एक नोटिस भेजती है कि भाई तुम अपना देख लो, नहीं तो तुम्हारे खिलाफ लीगल एक्शन लिया जायेगा…फिर भी वह आदमी payment नहीं करता है या कर पाता है….. अब उसके खिलाफ बैंक ने क्या एक्शन लिया वो बैंक ही जाने… जब वह आदमी बैंक को पैसे या interest चुकाने में नाकामयाब हो जाता है तो बैंक उस लोन को Non-Performing Asset (NPA) (Bad Loan) करार देती है……

इस NPA के कारण देश को काफी आर्थिक नुक्सान हुआ…. एक डाटा के हिसाब से करीबन 2013 -2014 में 1 लाख NPA थे… मतलब की इतनी कंपनियों या लोन धारक बैंकों का कर्ज़ चुकाने में असक्षम थे….इसी वजह से सरकार को IBC 2016 को introduce करना पड़ा ..
आपको बता दें कि टी. के विश्वनाथन की अध्यक्षता में वित्त मंत्रालय द्वारा एक दिवालियापन कानून सुधार समिति बनायी गयी….

इस कोड का उद्देश्य दिवालियेपन से संबंधित मामलों के समाधान में देरी को कम करने और उधार दी गयी राशि की वसुली में सुधार से है….इसके द्वारा अर्थव्यवस्था में पूंजी के प्रवाह को सुविधाजनक बनाने के उपाय किये गए हैं….

वैसे चलिए आपको बताते है IBC 2016 के बारे में…

  1. अधिक से अधिक कानूनी स्पष्टता के लिए यह एक एकीकृत कोड है
  2. दिवाला या दिवालियापन के मामलों को हल करने के लिए 180 दिन का नियम समय दिया जाता है…. जिसे एक बार और 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है…
  3. यह पेशवरों/ दिवालियेपन तथा सूचना के उपयोग के साथ निपटने वाली एजेंसियों को विनियमित करने का कार्य करेगा।
  4. बिल में सूचना उपयोगिता और दिवालिया व्यक्ति डेटाबेस (परिकलक में संचित विपुल सूचना-सामग्री) का प्रस्ताव है। क्स्च्जक .
  5. राष्ट्रीय कंपनी (साहचर्य) कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में एक विशेष खंडपीठ की स्थापना जो कंपनियों, सीमित देयता संस्थाओं के ऊपर दिवालियापन मामलों पर निर्णय करती है ….
  6. ऋण वसूली न्यायाधिकरण (”डीआरटी”), व्यक्तियों और असीमित देयता भागीदारी फर्मों (खेत) पर अधिकार क्षेत्र के साथ निर्णायक प्राधिकरण होता है
  7. यह संहिता कॉर्पोरेट ऋणी को ऋण में एक बार डिफ़ॉल्ट (अपराध) हो जाने पर खुद दीवालिया संकल्प की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देता है।
  8. लेनदारों के विभिन्न वर्गो द्वारा दावों को प्राथमिकता दी गयी है।

IBC 2016 की तारीफ हम नहीं कर रहे बल्कि इसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है…. विश्व बैंक , गोल्डमन सैक के साथ साथ दुनिया की सभी फ़ाइनैंसियल इन्स्टीट्यूशन्स ने अब यह मान लिया है की मोदी के आर्थिक निर्णय से भारत , 2030 तक ही अमेरिका को पीछे छोड़ देगा…
वैसे अगर देखा जाए तो IBC 2016 को सरकार लेकर नहीं आती तो हमारे देश की आर्थिक स्थिति आने वाले समय में भयानक हो सकती थी… NPA और पूर्व सरकार के लचर रवैये के करण भारत का economic ग्रोथ काफी खराब था … लेकिन 2015 के बाद सरकार action में आई और आज हम देख सकते है कैसे हमारे देश का economic ग्रोथ रेट और जीडीपी रेट दिन पर दिन बढ़ता जा रहाहै..