NRC की प्रक्रिया पूरी कराने वाले व्यक्ति की कहानी, नही कर सकते मीडिया से बात

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असम में एनआरसी की फ़ाइनल लिस्ट आ गयी है.. इस पर जमकर राजनीति हो रही है.. जो नेता और पार्टियाँ पहले एनआरसी की मांग कर रही थी वहीँ आज इस लिस्ट का विरोध भी कर रही हैं… लेकिन इस सबके बीच एक व्यक्ति जो पिछले कई सालों से एनआरसी के लिए काम कर रहा है.. वो भी चर्चा का विषय बना हुआ है.. नाम है आईएएस प्रतीक हजेला.

भोपाल में जन्मे प्रतीक ने आइआइटी दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स से बीटेक किया. बाद में वह आइएएस बने. टेक्नोलॉजी के प्रति गहरा लगाव रहा.. एनआरसी असम के संयोजक के तौर पर प्रतीक हजेला के पास 3.3 करोड़ लोगों के 6.6 करोड़ कागजात की छानबीन की जिम्मेदारी थी. ये कागजात असम के नागरिकों ने इसलिए लगाए थे ताकि वे साबित कर सकें कि वे 24 मार्च, 1971 के पहले से भारत में रह रहे हैं. प्रतीक हजेला असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन यानी एनआरसी की प्रक्रिया को अपने नेतृत्व में पूरा किया है. उनका कार्यालय गुवाहाटी की जीएस रोड पर स्थित है. उन्होंने 55,000 अधिकारियों की टीम के साथ 47 करोड़ दस्तावेजों की जांच की. एनआरसी की पूरी प्रक्रिया में 1,200 करोड़ रुपये का खर्च आया है. हजेला को तत्कालीन कांग्रेस सरकार की सिफारिशों पर सितंबर 2013 में एनआरसी का स्टेट कॉर्डिनेटर नियुक्त किया गया था…हजेला ने खुद को इस प्रक्रिया में तब शामिल किया जब उच्चतम न्यायालय राज्य और केंद्र से इसे लेकर नियमित अपडेट मांग रही थी.

हजेला के एक सहयोगी ने कहा, ‘उन्होंने हमें बताया कि यह प्रक्रिया एक पहाड़ी सड़क की तरह है जहां आप बाधा को मोड़ से पहले नहीं देख सकते हैं.’ हजेला को उच्चतम न्यायालय ने मीडिया में बोलने से मना किया है, इसलिए वे मीडिया से दूर ही रहते हैं. एनआरसी की जांच के लिए हजेला को उनके करीबियों से कई सुझाव भी मिले.. जिसमें से एक तरीका फैमिली ट्री की जांच करना था। जिससे कि कोई किसी के परिवार के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल न कर सके. हाथ से बनी फॅमिली ट्री को कम्प्यूटर पर बने फॅमिली ट्री से मिलाया जाता था किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर परिवार को सेंटर पर बुलाया जाता था. उन्होंने 53 से अधिक सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों को तैयार करने में बारीकी से काम किया जो इस प्रक्रिया की रीढ़ बनी. फ़ाइनल लिस्ट सामने आने के बाद शनिवार को हजेला ने एक संक्षिप्‍त बयान जारी किया, ‘लिस्‍ट में किसी को शामिल करने या बाहर करने के सभी फैसले वैधानिक अधिकारियों ने लिए हैं. पूरी प्रक्रिया…ध्‍यानपूर्वक एक उद्देश्‍य के साथ पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है. हरेक व्‍यक्ति को प्रक्रिया के प्रत्‍येक चरण में अपनी बात रखने के लिए पर्याप्‍त अवसर दिया गया था.’

हजेला को लेकर राजनीति भी होती रही है. कोई इन पर दबाव में आकर काम करने का आरोप लगाया तो हजेला स्थानीय लोगों के निशाने पर भी रह चुके हैं. प्रतीक हजेला के नेतुत्व में उनकी टीम ने काम किया..जिसके बाद फाइनल लिस्ट में 19 लाख लोगों को जगह नही मिली. मतलब ये 19 लाख ये साबित नही कर पाए कि वे 24 मार्च, 1971 के पहले से भारत में रह रहे हैं.