बंगाल में PM Modi को 10 मिनट में ही क्यों खत्म करना पड़ा अपना भाषण

इसे मोदी साहब के भाषणों की कला कहे या उनके द्वारा किये गए कामो का जादू की लोग उनकी रैली में खींचे से चले आते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जब ममता बनर्जी के गढ़ में जाकर रैली की तो भीड़ को देखकर सभी के होश फाख्ता हो गए। अब आप कहेंगे कि किसी की रैली में भीड़ आना तो अच्छी बात है फिर मैं ये होश फाख्ता जैसे शब्द क्यो यूज कर रहा हूं।

ह्म्म्म आपका डाउट क्लियर करना बहुत ज़रूरी है। दरअसल पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के ठाकुर नगर में एक जनसभा को अड्र्स करने पहुँचे। अब पहुँच तो गए लेकिन भीड़ को देखकर खुद मोदी भी चौंक गए क्योकि जिस मैदान में ये रैली हो रही थी वो भीड़ को देखते हुए काफी छोटा पड़ रहा था भीड़ इतनी हो गई कि वहां भगदड़ जैसी स्थिति हो गई क्योकि आये हुए ज्यादातर लोग पीएम को देखने और सुनने के इरादे से लगातार आगे की तरफ बढ़ने लगे। बाद में पीएम ने सभी को हाथ के इशारो से शांत रहने की अपील भी करनी पड़ी लेकिन लोग नही माने। मैदान में किसी को नुकसान ना हो जाएं इसको देखते हुए मोदी ने 14 मिनट में ही अपना भाषण खत्म कर दिया।


भीड़ से उत्साहित पीएम ने कहा कहा भीड़ देखकर समझ आ रहा है कि दीदी हिंसा पर क्यो उतर आई है। किसानों और गांवों की बात करते हुए पीएम ने कहा ये देश का दुर्भाग्य रहा की आजादी के बाद सालो तक गांवों पर कोई ध्यान नही दिया गया। उन्होंने बंगाल के लोगो को भरोसा दिलाते हुए कहा कि नई सरकार बनने के बाद बंगाल के छोटे किसानो परिवारों,30-40 करोड़ मजदूरो को सीधा लाभ मिलेगा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कर्जमाफी के नाम पर हमेशा देश मे किसानों की आंखों में धूल झोंकी जाती रही है।उन्होंने कहा कि कर्जमाफी करके कुछ लोग अपने आपको जनता का हितेषी समझ रहे है जबकि सच तो यही है कि 13 रुपए की कर्जमाफी से किसी को कोई फायदा नही पहुँचता। नागरिकता कानून का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि बांग्लादेश,पाकिस्तान से लोगो को भागकर भारत मे आना पड़ा है इसलिए संसद में इस कानून का पारित हुआ बहुत जरूरी है।

खैर, जिस तरह से पीएम ने स्थिति को संभाला वो वाकई कमाल है. सोचिये अगर वाकई भगदड़ मचती तो ना जाने कितनो को जान गवानी पड जाती.

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