सयुंक्त राष्ट्र में भारत को मिली बड़ी कामयाबी, हफिज सईद की अर्जी को ठुकराया

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संयुक्त राष्ट्र ने 2008 के मुम्बई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद का नाम प्रतिबंधीत सूची से हटाने से इनकार कर दिया है
सईद ने 2017 में लाहौर स्थित लॉ फर्म मिर्जा के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के साथ एक अपील दायर की थी और पाबंधी खत्म करने की गुहार लगायी थी  संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस तरह के सभी अनुरोधों की जांच करने के लिए नियुक्त स्वतंत्र लोकपाल ने सईद के वकील को सूचित किया है कि उनके अनुरोध की जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है कि आतंकियों की सूची में सईद का नाम रहेगा

सयुंक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित हाफ़िज़ सईद पर 10 दिसम्बर 2008 को पाबंदी लगाई थी मुम्बई हमलों के बाद सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उसे प्रतिबंधित किया था इस मुम्बई हमले में 166 लोग मारे गए थे
हाफिज सईद पर यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति को पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने का नया अनुरोध प्राप्त हुआ है

भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे उन देशों ने भी सईद के अनुरोध का विरोध किया जिन्होंने मूल रूप से उसे प्रतिबंध सूची में डाला थाइन देशों ने संयुक्त राष्ट्र में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख अजहर को प्रतिबंधित घोषित कराने की नए सिरे से कोशिश की थी. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने खुद कबूल किया है कि अजहर पाकिस्तान में रह रहा है. जैश पहले से संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है

इसके अलावा  हाफिज सईद को एक और बड़ा झटका लगा है पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार  हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के मुख्यालय को अपने कब्जे में ले लिया है. प्रांतीय सरकार ने यह कार्रवाई नेशनल एक्शन प्लान पर हुई नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की बैठक में हुए फैसले के बाद की है. इसमें सभी प्रतिबंधित संगठनों की संपत्तियां जब्त करने के आदेश दिए गए थे वहीं लाहौर स्थित मरकज अल कदसिया मस्जिद को भी कब्जे में ले लिया गया है आपको बता दें कि लाहौर की इसी मस्जिद से ही हाफिज सईद अपने फरमान जारी किया करता था

पाकिस्तान के वित्त सचिव आरिफ अहमद खान ने अपने एक बयान में कहा था कि अगर पाकिस्तान प्रतिबंधित संगठनों पर कार्रवाई में तेजी नहीं लाता है तो उसे आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि दुनिया भर में आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाले संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को 10 सुत्रीय ऐक्शन प्लान के तहत कार्रवाई करने के लिए जून 2019 तक का समय दिया है

जून 2019 में  फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक में पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग रोकने की दिशा में की गई कार्रवाई के सबूत देने हैं. पाकिस्तान का नाम पहले से ही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स  की निगरानी सूची यानी ग्रे-लिस्ट में शामिल है अगर पाकिस्तान सरकार जून 2019 की बैठक तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं करती है तो सितंबर 2019 में उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है. जिसके बाद पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगना तय हो जाएगा



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